TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    रामपुर में शादी के नाम पर कथित धोखाधड़ी का माम

    रामपुर में मुस्लिम युवती ने हिंदू युवक को दिया धोखा, असलियत सामने आने पर मामला पहुंचा कोर्ट में

    Defence System: भारत का मल्टी लेयर्ड बैलिस्टिक डिफेंस सिस्टम पास

    Defence System: भारत का मल्टी लेयर्ड बैलिस्टिक डिफेंस सिस्टम सफल, 5000 किमी रेंज की मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम

    ममता बनर्जी के चुनावी भाषण पर एक और एफआईआर

    ममता बनर्जी के चुनावी भाषण पर एक और एफआईआर, कानूनी जांच हुई तेज

    नोएडा में 110 इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत

    नोएडा में 110 इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत: ग्रेटर नोएडा तक सफर हुआ सस्ता, आसान और पर्यावरण के अनुकूल

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी तेजी से बढ़ रहा

    UPI ने मई में 29.9 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन के साथ बनाया नया रिकॉर्ड, भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था हुई और मजबूत

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    एनडीए के कई पूर्व छात्र देश के बड़े सैन्य

    एनडीए की 150वीं पासिंग आउट परेड आज, 77 साल के इतिहास का खास पल

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस

    चीन को ‘कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस, बयान बना वैश्विक कूटनीतिक विवाद

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    महाभारत से जुड़े प्रमुख दृश्य

    महाभारत: श्रीकृष्ण ने पांडवों के लिए मांगे थे ये 5 गांव, आज इन नामों से जाने जाते हैं शहर

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच SIT के हाथों में, 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी की आशंका

    लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी के माता-पिता

    लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया

    राम मंदिर के चंदे को लेकर विवाद

    राम मंदिर के चंदे को लेकर विवाद, अखिलेश यादव के आरोपों पर ट्रस्ट ने दिया जवाब

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज शिप

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज पर नोरोवायरस का हमला: 3116 यात्रियों वाले क्रूज शिप पर 115 लोग बीमार

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    रामपुर में शादी के नाम पर कथित धोखाधड़ी का माम

    रामपुर में मुस्लिम युवती ने हिंदू युवक को दिया धोखा, असलियत सामने आने पर मामला पहुंचा कोर्ट में

    Defence System: भारत का मल्टी लेयर्ड बैलिस्टिक डिफेंस सिस्टम पास

    Defence System: भारत का मल्टी लेयर्ड बैलिस्टिक डिफेंस सिस्टम सफल, 5000 किमी रेंज की मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम

    ममता बनर्जी के चुनावी भाषण पर एक और एफआईआर

    ममता बनर्जी के चुनावी भाषण पर एक और एफआईआर, कानूनी जांच हुई तेज

    नोएडा में 110 इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत

    नोएडा में 110 इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत: ग्रेटर नोएडा तक सफर हुआ सस्ता, आसान और पर्यावरण के अनुकूल

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी तेजी से बढ़ रहा

    UPI ने मई में 29.9 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन के साथ बनाया नया रिकॉर्ड, भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था हुई और मजबूत

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    एनडीए के कई पूर्व छात्र देश के बड़े सैन्य

    एनडीए की 150वीं पासिंग आउट परेड आज, 77 साल के इतिहास का खास पल

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस

    चीन को ‘कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस, बयान बना वैश्विक कूटनीतिक विवाद

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    महाभारत से जुड़े प्रमुख दृश्य

    महाभारत: श्रीकृष्ण ने पांडवों के लिए मांगे थे ये 5 गांव, आज इन नामों से जाने जाते हैं शहर

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच SIT के हाथों में, 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी की आशंका

    लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी के माता-पिता

    लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया

    राम मंदिर के चंदे को लेकर विवाद

    राम मंदिर के चंदे को लेकर विवाद, अखिलेश यादव के आरोपों पर ट्रस्ट ने दिया जवाब

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज शिप

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज पर नोरोवायरस का हमला: 3116 यात्रियों वाले क्रूज शिप पर 115 लोग बीमार

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

दिल्ली धमाका: ‘वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ की बर्बरता को कैसे ‘ह्यूमनाइज़’ कर रहे हैं  The Wire जैसे मीडिया संस्थान ?

TFI Desk द्वारा TFI Desk
17 November 2025
in चर्चित, मत, समीक्षा
आतंकवाद को भावुकता की आड़ में ढकने की कोशिश

दिल्ली हमले के आरोपियों पर 'द वायर' की रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं

Share on FacebookShare on X

NIA ने स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली में लाल किले के पास हुआ धमाका, सामान्य हमला नहीं बल्कि फिदायीन हमला था। यानी आई-20 कार में सवार आतंकी उमर ने जानबूझकर ख़ुद को विस्फोटक समेत उड़ा लिया था। NIA का ये स्टेटमेंट इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये कश्मीर से बाहर देश का पहला फिदायीन हमला है और ये सुसाइड ब्लास्ट किसी जाहिल – अनपढ़ या बेरोज़गार आतंकी ने नहीं किया था (भटके हुए नौजवान की घिसी पिटी थ्योरी) बल्कि ये हमला एक पढ़े–लिखे  डॉक्टर ने किया है। इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग घायल हुए।

आतंकियों को ‘पीड़ित’ दिखाने का प्रयास
जाँच के मुताबिक़ ये हमला कश्मीर से ताल्लुक़ रखने वाले डॉक्टर डॉ. मोहम्मद उमर–उन–नबी ने उस समय किया जब जैश–ए–मोहम्मद का एक बड़ा मॉड्यूल सुरक्षा एजेंसियों के हाथों बेनकाब हो चुका था। जांच के अनुसार उमर नबी ने घबराहट में अपनी Hyundai i20 को उड़ा दिया और फिर डीएनए टेस्ट से उसकी पहचान की पुष्टि हुई।
लेकिन कुछ मीडिया संगठनों ने, खासकर The Wire ने, इन आरोपियों को जिस तरह दिखाया, उसने मीडिया की भूमिका और आतंकवाद जैसे खतरनाक और मानवताविरोधी विषयों पर चुनिंदा मीडिया घरानों की नैरेटिव गढ़ने की प्रवृत्ति को लेकर देशभर में चर्चा छेड़ दी।

संबंधितपोस्ट

UNSC की रिपोर्ट में खुलासा : जैश-ए-मोहम्मद ने करवाया था लाल किले के पास धमाका

संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

दिल्ली धमाका और PoK के नेता का कबूलनामा: क्या भारत के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ का समय आ गया है?

और लोड करें

पिछले कुछ हफ्तों में सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया जिसमें लगभग 2900 किलो विस्फोटक, हथियार और संवेदनशील सामग्री बरामद हुई। यह नेटवर्क सिर्फ आम अपराधियों का नहीं था, बल्कि इसमें कई डॉक्टर, मेडिकल प्रोफेशनल और उच्च शिक्षा प्राप्त लोग शामिल पाए गए। इनमें कश्मीर के डॉक्टर अदील अहमद भट, मुज्म्मिल शकील, मोहम्मद आरिफ और लखनऊ की डॉक्टर शाहीन सईद जैसे नाम थे। कई आरोपियों का संबंध जमात–उल–मोमिनात से बताया गया, जिसका नेतृत्व मसूद अज़हर की बहन सादिया अज़हर करती है। यानी यह एक ऐसा मॉड्यूल था जो चिकित्सा, शिक्षा और प्रोफेशनल प्रतिष्ठा की आड़ में आतंक के बड़े नेटवर्क को आगे बढ़ा रहा था।

लेकिन ठीक इसी दौरान The Wire ने 13 नवंबर को एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें इन आरोपियों को ऐसे दिखाया गया जैसे ये आतंकी, ‘धर्मांध’ न होकर किसी सामाजिक अन्याय के शिकार हों। इस पूरे लेख का ‘मूल’ आतंकवाद नहीं, बल्कि आरोपियों की पारिवारिक दिक्कतें, उनके आर्थिक संघर्ष और भावनात्मक पहलू थे। लेख में उमर नबी के पिता और रिश्तेदारों से हुई बातचीत भी छापी गई।जिसमें उमर की तंगहाली, फटे कपड़े पहन कर कॉलेज जाने की मजबूरी, पढ़ाई में उसकी मेहनत लगन और परिवार के लिए वो कितना ज़िम्मेदार था ? जैसी सकारात्मक बातें बताईं गईं। अब सवाल ये है कि—क्या एक आतंकवादी की गरीबी या उसकी व्यक्तिगत उपलब्धियों से उसके अपराध की गंभीरता कम हो जाएगी? क्या आतंकवाद के प्रति आम देशवासियों की चिंताएं खत्म हो जाएंगी?

‘भावुकता’ की आड़ में आतंकवाद के खतरे को कमतर दिखाने का प्रयास?

The Wire के इस लेख में बार–बार यह भी संकेत दिया गया कि उमर के हमले में शामिल होने को लेकर पुख्ता सबूत नहीं है, संशय बरकरार है। जबकि जांच एजेंसियों ने इस पूरे नेटवर्क को न सिर्फ एक्सपोज़ किया है, बल्कि फोरेंसिक सबूतों का हवाला भी दिया है, फिर चाहे वो कार से बरामद हुए शव का उमर की मां के डीएनए से मैच होना हो, या फिर मॉड्यूल से बरामद हुए हथियारों और विस्फोटकों का पूरा रिकॉर्ड सामने रखना हो।
ज़ाहिर है इस तरह की रिपोर्टिंग न सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर  आम लोगों के मन में शंका पैदा होती है, बल्कि आतंक के असली रूप से ध्यान भी भटकाती है।

बहस का बड़ा हिस्सा इसी बात पर केंद्रित है कि क्या उच्च शिक्षा और मेधावी होना किसी व्यक्ति के निर्दोष होने का प्रमाण माना जा सकता है? सुरक्षा विशेषज्ञ तो साफ़ कह रहे हैं कि “ये मामला इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कट्टरपंथ किसी वर्ग, पेशे या शिक्षा से बंधा हुआ नहीं होता।”  डॉक्टरों और प्रोफेशनल्स का एक आतंकी नेटवर्क का हिस्सा होना इस बात का साफ़ संकेत है कि ‘रैडिकलाइजेशन’ कहीं भी पनप सकता है—क्लासरूम में भी, अस्पतालों में भी और विश्वविद्यालयों में भी। ऐसी स्थिति में किसी आरोपी के घर की आर्थिक तंगी या उसकी पढ़ाई के संघर्ष को केंद्र में रखकर रिपोर्टिंग करना–आतंकवाद के असली खतरे को लेकर समाज में भ्रम पैदा करने से ज्यादा कुछ नहीं है।

पीड़ित/भावुक नैरेटिव से नहीं ढकी जा सकती आतंकवाद की बर्बरता

The Wire की रिपोर्टिंग ने आरोपियों के परिवारों की कठिनाइयों से लेकर उनके धार्मिक होने, उनकी बहन की शादी टल जाने या घर में पुलिस के आने–जाने से जीवन अस्त–व्यस्त होने जैसे मानवीय पहलुओं को प्रमुखता दी है। जबकि इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा पहलू है,  “13 निर्दोष लोगों की मौत, दिल्ली में हुआ बड़ा फिदायीन धमाका और एक भयानक आतंकी मॉड्यूल का खुलासा।” लेकिन इस पहलू को पीछे धकेल दिया गया। अब द वायर के इस लेख पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि ये मीडिया संस्थान का ये दृष्टिकोण पीड़ितों के दर्द और देश की सुरक्षा पर मंडरा रहे खतरे को पीछे छोड़कर आरोपियों की ‘मानवीय कहानी’ को आगे ला रहा है। इसकी गंभीरता को भावनात्मक पहलू की आड़ में ढकने का प्रयास कर रहा है।

यही कारण है कि अब लोग इस लेख को ‘मीडिया नैरेटिव’ का पैटर्न बता रहे हैं। विरोधियों का तर्क है कि यह पहली बार नहीं है जब The Wire या ऐसे ही अन्य प्लेटफॉर्म्स ने आरोपियों को भावुकता का मुलम्मा चढ़ाकर पेश किया हो।
दरअसल ये रिपोर्टिंग का ऐसा तरीका है जिसमें राष्ट्रविरोधी हिंसा के पीछे खड़े लोगों को ‘सिस्टम का पीड़ित’, ‘सताए हुए लोग’ बता दिया जाता है, जबकि असल पीड़ित वे लोग होते हैं जिन्होंने अपने परिवार के लोगों को खोया है या जिनकी ज़िंदगियाँ आतंकवाद ने बर्बाद कर दी हैं।

सुरक्षा एजेंसियों और विशेषज्ञों का कहना है कि एक ऐसे माहौल में, जहाँ आतंकी मॉड्यूल उच्च शिक्षित और पेशेवर बैकग्राउंड से निकल रहे हों, मीडिया की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। रिपोर्टिंग तथ्य आधारित, संवेदनशील और स्पष्ट होनी चाहिए ताकि समाज में कोई भी भ्रम या सहानुभूति–आधारित नैरेटिव आतंक के असली खतरे को कमजोर न करे। आतंकवाद को ‘भावुक कहानी’ में बदल देना उन परिवारों के साथ अन्याय है जिनके प्रियजन इस धमाके में मारे गए।

आख़िरकार– आतंकवाद की बर्बरता को किसी भी भावुक नैरेटिव से ढंका नहीं जा सकता। आरोपी परिवारों की पीड़ा हो सकती है, लेकिन इससे बड़ा सच यह है कि आतंक किसी के संघर्ष या गरीबी से जन्म नहीं लेता, बल्कि एक खतरनाक विचारधारा से जन्म लेता है। और किसी भी लोकतंत्र में मीडिया की पहली जिम्मेदारी यह होनी चाहिए कि वह उस विचारधारा को चुनौती दे, न कि उसे मानवीय चेहरा देकर बच निकलने का मौका दे।

Tags: आतंकी नेटवर्कउमरजम्मूृ-कश्मीरजैश-ए-मोहम्मदडॉ. शाहीनद वायरदिल्ली धमाकादिल्ली हमलामीडिया नैरेटिववाइट कॉलर टेरर
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

मणिपुर को जल्द मिल सकता है नया मुख्यमंत्री, भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने टटोली प्रदेश में सरकार गठन की संभावनाएं

अगली पोस्ट

‘हसीना’ संकट के बीच NSA अजित डोभाल की बांग्लादेश के NSA से मुलाकात के मायने क्या हैं?

संबंधित पोस्ट

झारखंड-मिजोरम राज्यसभा चुनाव
चर्चित

झारखंड-मिजोरम राज्यसभा चुनाव: आज पड़ेगा वोट, किसके पक्ष में है संख्या बल?

18 June 2026

झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बैद्यनाथ राम, कांग्रेस ने प्रणव झा और भाजपा...

NEET-UG परीक्षा से संबंधित प्रतिनिधिक
चर्चित

NEET Scam: ₹10 लाख के पेपर लीक जाल का खुलासा, जानिए कैसे टेलीग्राम ठगों ने खड़ा किया धोखाधड़ी का पूरा नेटवर्क

17 June 2026

21 जून को होने वाली NEET-UG 2026 पुनर्परीक्षा (Re-Exam) से पहले अधिकारियों ने टेलीग्राम पर चल रहे एक संगठित ठगी नेटवर्क का खुलासा किया है।...

IPS का ड्रामा
चर्चित

फर्जी IPS का ड्रामा: “न सलामी मिली, न बचकर निकल पाए, 40 रुपये के बंद मक्खन फ्री में खाने की ज़िद ने पहुंचाया जेल

17 June 2026

लखनऊ में मात्र 40 रुपये के चाय-नाश्ते के बिल को लेकर शुरू हुआ एक मामूली विवाद उस समय बड़ा मामला बन गया, जब एक व्यक्ति...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Inside the Doklam Face-Off: How India Backed Bhutan and Held the Line During the 73 Day Standoff

Inside the Doklam Face-Off: How India Backed Bhutan and Held the Line During the 73 Day Standoff

00:03:11

Why the 2017 Doklam Standoff Became a Major Strategic Wake Up Call For India | Chicken Neck

00:03:11

MISSILE IN TANKER! How Indian Navy Pulled Off A Mission Impossible At Sea | Hormuz | Gulf of Oman

00:03:38

12 YEARS OF MODI GOVERNMENT: INDIA'S DEFENCE & DIPLOMATIC RESET | PM Modi | Armed Forces

00:04:43

AIRCRAFT CARRIERS: INDIA’S MOST POWERFUL TOOL OF MARITIME POWER PROJECTION | INS Vikrant |

00:03:22
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited