पिछले कुछ दिनों में अमेरिका ने ईरान के आसपास अपने सैन्य बलों की मौजूदगी में तेजी से इज़ाफा किया है। मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने युद्धपोतों, मिसाइल प्रणालियों और एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती कर अपनी सैन्य तैयारी को और मजबूत कर दिया है। इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा और संभावित संघर्ष के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन क्षेत्र में तैनात किया गया है। इसके साथ कई अत्याधुनिक वॉरशिप, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और सपोर्ट शिप भी मौजूद हैं। इन जहाजों पर लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और मिसाइल सिस्टम तैनात हैं, जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने में सक्षम हैं।
इसके अलावा अमेरिका ने क्षेत्र में अपने लड़ाकू विमानों और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की संख्या भी बढ़ा दी है। अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि यह तैनाती पूरी तरह रक्षात्मक है और इसका उद्देश्य अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम ईरान को कड़ा संदेश देने के लिए भी उठाया गया है।
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम, पश्चिम एशिया में उसके प्रभाव और उसके समर्थित समूहों की गतिविधियों को लेकर अमेरिका लगातार चिंता जताता रहा है। वहीं, ईरान अमेरिका पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने और प्रतिबंधों के जरिए दबाव बनाने का आरोप लगाता है।
हाल के दिनों में ईरान समर्थित समूहों द्वारा अमेरिकी हितों पर संभावित हमलों की आशंका भी जताई जा रही है। इसी वजह से अमेरिका ने अपनी सैन्य तैयारियों को और पुख्ता किया है। एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे बड़े सैन्य प्लेटफॉर्म की मौजूदगी यह संकेत देती है कि अमेरिका किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार है।
मध्य पूर्व के कई देशों में इस बढ़ती सैन्य गतिविधि को लेकर चिंता भी देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि हालात बिगड़ते हैं, तो इसका असर न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, अमेरिका द्वारा ईरान के करीब सैन्य मौजूदगी बढ़ाना आने वाले समय में भू-राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है और पूरी दुनिया की नजरें अब इस क्षेत्र पर टिकी हुई हैं।






























