पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकंद नरवणे ने अपनी आत्मकथा को लेकर चल रही चर्चाओं पर पहली बार प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रकाशक पेंगुइन इंडिया के बयान को साझा करते हुए कहा कि किताब की मौजूदा स्थिति को लेकर वही सही जानकारी है, जो प्रकाशक ने दी है। उनका यह बयान उस समय आया है, जब उनकी किताब को लेकर कई तरह की अटकलें और भ्रम सामने आए थे।
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इस मामले में स्पष्ट किया है कि जनरल नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के सभी प्रकाशन अधिकार उनके पास हैं। प्रकाशक के अनुसार, यह किताब अभी तक किसी भी रूप में प्रकाशित नहीं हुई है और न ही इसे बिक्री के लिए बाजार में उतारा गया है। पेंगुइन ने कहा कि हाल के दिनों में किताब को लेकर गलत जानकारी फैली है, जिसे दूर करना जरूरी था।
प्रकाशक ने यह भी समझाया कि पब्लिशिंग की प्रक्रिया में तीन अलग-अलग चरण होते हैं— किताब की घोषणा, प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध होना और किताब का वास्तव में प्रकाशित होना। पेंगुइन के मुताबिक, इन तीनों को एक जैसा मानना गलत है। किसी किताब की घोषणा या प्री-ऑर्डर शुरू होना यह नहीं दर्शाता कि किताब प्रकाशित हो चुकी है।
पेंगुइन ने बताया कि ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को भविष्य में प्रकाशित करने की योजना जरूर है, लेकिन फिलहाल यह किताब न तो छपी है और न ही दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए उपलब्ध है। अभी यह केवल प्री-ऑर्डर के लिए लिस्ट की गई है। प्री-ऑर्डर एक सामान्य और प्रचलित प्रकाशन प्रक्रिया है, जिसके तहत पाठक और रिटेलर्स किताब के रिलीज़ से पहले ही अपना ऑर्डर दर्ज करा सकते हैं।
प्रकाशक ने साफ शब्दों में कहा कि किसी किताब को तभी प्रकाशित माना जाता है, जब वह रिटेल चैनलों पर खरीदने के लिए उपलब्ध हो जाती है। केवल तय की गई प्रकाशन तारीख का मतलब यह नहीं होता कि किताब छप चुकी है, बल्कि इसका अर्थ सिर्फ इतना होता है कि उस तारीख तक किताब जारी करने की योजना बनाई गई है।
अंत में पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा कि वह अपने सभी प्रकाशनों में पारदर्शिता और स्पष्टता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रकाशक का कहना है कि पाठकों और लेखकों के बीच भरोसा बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और इसी वजह से उन्होंने इस मामले में स्थिति साफ करना जरूरी समझा।































