किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के हाथों में नहीं, बल्कि उसकी तैयारी में निहित होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बीते वर्षों में इसी तैयारी को शासन का केंद्रीय उद्देश्य बनाया है। आज भारत योजनाओं के शोर से नहीं, परिणामों की संस्कृति से पहचाना जा रहा है।
बजट 2026-27 इसी परिवर्तनशील दृष्टि का दस्तावेज़ है। यह बजट उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर उत्पादकता आधारित राष्ट्र निर्माण की ओर संकेत करता है। सरकार ने इसे स्पष्ट रूप से “युवा शक्ति को समर्पित बजट” के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसमें जन-केंद्रित विकास, संरचनात्मक सुधार और तकनीकी नवाचार का संतुलित समावेश दिखाई देता है
यह स्वीकार करना होगा कि मोदी सरकार ने युवाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सहभागी माना है।
मोदी युग की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है ,नीति और व्यवहार के बीच की दूरी को कम करना। बजट में “शिक्षा से रोजगार और उद्यम” को जोड़ने हेतु उच्चाधिकार प्राप्त स्थायी समिति, कौशल कार्यक्रम तथा बहु-कुशल प्रशिक्षण की व्यवस्था इसी सोच का प्रतिफल है
यह व्यवस्था यह मानकर चलती है कि 21वीं सदी में डिग्री पर्याप्त नहीं ,प्रासंगिक कौशल, अनुकूलन क्षमता और नवाचार ही वास्तविक पूंजी हैं। विद्यार्थियों को अब केवल पाठ्यक्रम नहीं, कार्य जगत की तैयारी दी जा रही है।
15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में AVGC (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट, गेमिंग, कॉमिक) कंटेंट क्रिएटर लैब, STEM आधारित उच्च शिक्षा संस्थान तथा विश्वविद्यालय टाउनशिप का विकास ये पहलें बताती हैं कि केंद्र सरकार शिक्षा को उद्योग, तकनीक और रचनात्मक अर्थव्यवस्था से जोड़ रही है। यह महज़ शैक्षणिक सुधार नहीं, बल्कि ज्ञान आधारित भारत की नींव है।
आत्मनिर्भर भारत और युवा उद्यमिता
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, टेक्सटाइल, केमिकल पार्क और खेल सामग्री निर्माण जैसे अग्रणी क्षेत्रों में निवेश, साथ ही MSME को “चैम्पियन्स” के रूप में विकसित करने हेतु विशेष फंड और सुलभ वित्त यह सब उस नीति को पुष्ट करता है जिसमें युवा केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजक बनें, यही आत्मनिर्भर भारत का व्यावहारिक रूप है।
हेल्थ-केयर, मेडिकल टूरिज्म, आईटी सेवाएँ, नए डिज़ाइन संस्थान और खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से एकीकृत प्रतिभा विकास ये सभी कदम दर्शाते हैं कि सरकार युवाओं की बौद्धिक, रचनात्मक और शारीरिक क्षमता को राष्ट्रीय संपदा मानती है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में नए संस्थान, सहयोगी स्वास्थ्य पेशेवरों (AHP) का उन्नयन तथा लगभग 1.5 लाख बहु-कुशल केयरगिवर्स का प्रशिक्षण मेडिकल व पैरामेडिकल विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खोलता है।
साथ ही आईटी, डेटा सेंटर और क्लाउड सेवाओं को प्रोत्साहन देकर भारत को वैश्विक डिजिटल सेवा केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा स्पष्ट दिखाई देती है।
विकास का विकेंद्रीकरण
मोदी सरकार की एक उल्लेखनीय विशेषता है विकास का विकेंद्रीकरण। इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ ऊर्जा और सार्वजनिक निवेश के माध्यम से टियर-2 और टियर-3 शहरों को केंद्र में लाया गया है, ताकि युवाओं को अवसर केवल महानगरों में नहीं, अपने ही जिलों और कस्बों में मिलें। यह आर्थिक ही नहीं, सामाजिक संतुलन की दिशा में भी निर्णायक कदम है।
बजट का दर्शन केवल वृद्धि तक सीमित नहीं है इसमें महिला, वंचित वर्ग, दिव्यांगजन और ग्रामीण युवाओं के लिए लक्षित कार्यक्रमों के माध्यम से समावेशन के साथ विकास को प्राथमिकता दी गई है। यही नरेंद्र मोदी के शासन मॉडल का नैतिक आधार है
बजट 2026–27 यह संकेत देता है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार भारत को “योजना प्रधान “राज्य से “क्षमता प्रधान” राष्ट्र में रूपांतरित कर रही है। यह बजट युवाओं को अनुदान नहीं, आत्मविश्वास देता है ,सहायता नहीं, साधन देता है और आश्वासन नहीं, अवसर प्रदान करता है।
अब उत्तरदायित्व युवा पीढ़ी का है। यदि आज का विद्यार्थी और युवा अनुशासन को आदत, कौशल को शक्ति और राष्ट्रभाव को संस्कार बना ले तो विकसित भारत कोई दूर का स्वप्न नहीं, निकट भविष्य की सशक्त वास्तविकता है। यही मोदी युग का संदेश है “सक्षम युवा, समर्थ भारत”





























