Chandra Shekhar Patel

Chandra Shekhar Patel

चंद्रशेखर पटेल सिविल इंजीनियर और कानून विशेषज्ञ हैं। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर की कार्यपरिषद के सदस्य के तौर पर शिक्षा, पर्यावरण और पॉलिसी के क्षेत्र में सामाजिक बदलाव के लिए प्रयासरत हैं
उनसे chandrashekhar.patel@gmail.com पर संपर्क साधा जा सकता है

बंदूक से आगे की लड़ाई  ‘दिमागी नक्सल’ और राष्ट्र को दिग्भ्रमित करने वाले नैरेटिव का खेल

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन केवल सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा नहीं होता। वह देश की दिशा, चुनौतियों और आने वाले भारत की प्राथमिकताओं का राजनीतिक एवं वैचारिक संकेत...

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: सामूहिक स्वराज, व्यक्तिगत स्वराज में परिवर्तित हो जाता है तो पाकिस्तान का निर्माण होता है

15 अगस्त का दिन कहता आजादी अभी अधूरी है  सपने सच होने बाकी है रावी की शपथ ना पूरी है भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई द्वारा 15 अगस्त 1947 के दिन लिखी गई यह कविता है जिसमें बताया गया है कि 31 दिसंबर 1929 को रावी नदी के तट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारतीय तिरंगा झंडा फहरा कर पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया था। एवं आगामी 26 जनवरी को देश भर मे  शपथ के कार्यक्रम का आयोजन का निर्णय किया था। उस समय अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू और इस प्रस्ताव का समर्थन महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने किया, लेकिन 15 अगस्त 1947 को देश दो टुकड़ों में विभाजित हो गया-...

छात्र शक्ति से राष्ट्र शक्ति तक : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की 77 वर्षीय वैचारिक यात्रा — चंद्रशेखर पटेल

भारत का इतिहास केवल राजसत्ताओं के उत्थान और पतन का इतिहास नहीं है।यह विचारों की विजय का इतिहास है।इस देश ने तलवार से अधिक कलम पर विश्वास किया है, सत्ता से अधिक संस्कार को महत्व दिया है...

बलिदान दिवस विशेष: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ऐतिहासिक भाषणों की प्रासंगिकता

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में कुछ भाषण ऐसे हैं जो केवल तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों की प्रतिक्रिया नहीं होते, बल्कि वे राष्ट्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाले वैचारिक दस्तावेज बन जाते हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी...

क्या ‘युवा संकल्प’ बदलेगा बंगाल का भविष्य ? असंतोष…संभावनाएँ और परिवर्तन की दस्तक !

बंगाल की माटी में बदलाव की चाह कोई अचानक उठी हुई लहर नहीं है, यह एक लंबे समय से संचित असंतोष, आकांक्षा और संभावनाओं का संगम है। मालदा से लेकर मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना से लेकर जंगलमहल...

जल जीवन मिशन: हर घर जल, हर घर सम्मान और हर घर विकास की दिशा में बड़ा कदम

भारत की सभ्यता में जल केवल जीवन का आधार नहीं बल्कि संस्कृति, आस्था और विकास का भी मूल तत्व रहा है। प्राचीन भारतीय समाज में जल संरक्षण और प्रबंधन की समृद्ध परंपरा थी। गांवों में तालाब, कुएँ...

युवा चेतना को लेकर क्या कहता है 2026–27 का यूनियन बजट ?

किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के हाथों में नहीं, बल्कि उसकी तैयारी में निहित होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बीते वर्षों में इसी तैयारी को शासन का केंद्रीय...

सभ्यता की आत्मा से आत्मनिर्भर भारत तक का रास्ता है “स्वदेशी”- लेकिन ‘ब्रांड प्रेमी’ हिंदुस्तानियों को स्वदेशी से जोड़ना चुनौती से कम नहीं

स्वदेशी केवल कोई आर्थिक विचार या व्यापारिक रणनीति नहीं है, बल्कि यह भारतीय सभ्यता की आत्मा है। यह हमारी सांस्कृतिक चेतना का वह सहज संस्कार है जो हमें बताता है कि सच्ची शक्ति बाहर से नहीं, बल्कि...

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस: ट्रम्प टैरिफ़ के बीच युवाओं पर क्यों हैं देश की नजर ?

राष्ट्र के भविष्य की हर सुबह, किसी युवा के आत्मविश्वास से ही जन्म लेती है। हर वह युवा, जो अपनी आँखों में सपना लिए चलता है कहीं न कहीं, उस सपने में राष्ट्र की तस्वीर भी होती...

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ‘छात्र शक्ति से राष्ट्र शक्ति तक’ 77 वर्षों की प्रेरणादायी यात्रा

“छात्र शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है” — यह कोई नारा मात्र नहीं, बल्कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की उस अखंड साधना का स्वर है, जो बीते 77 वर्षों से राष्ट्र निर्माण की भूमिका में युवाओं को...