भारत ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के साथ एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर औपचारिक बातचीत शुरू कर दी है। इस कदम से दोनों पक्षों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत होंगे, व्यापार के नए अवसर खुलेंगे और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने GCC के महासचिव जासेम मोहम्मद अल बुदैवी के साथ संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान दोनों पक्षों के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद थे। छह देशों वाले GCC समूह में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और GCC के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं और यह समझौता इन रिश्तों को नई गति देगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूत व्यापारिक व्यवस्था पर बातचीत शुरू करना सही समय है, जिससे दोनों पक्षों की क्षमताओं का बेहतर उपयोग हो सके।
यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, डिजिटल व्यापार, कस्टम प्रक्रिया, नई तकनीकों और निवेश को बढ़ाने जैसे क्षेत्रों को कवर करेगा।
यह संयुक्त बयान 5 फरवरी 2026 को तय किए गए नियमों के आधार पर आगे बढ़ाया गया है। वर्ष 2004 से लंबित इस समझौते पर अब फिर से औपचारिक रूप से बातचीत शुरू हो गई है। गोयल ने कहा कि इस साझेदारी से बुनियादी ढांचे और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ेगा और भारतीय कंपनियों को GCC देशों में काम करने के बेहतर अवसर मिलेंगे।
आर्थिक महत्व और व्यापार की स्थिति
पिछले पांच वर्षों में भारत और GCC के बीच व्यापार लगातार बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच कुल व्यापार 178.56 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात 56.87 अरब डॉलर और आयात 121.66 अरब डॉलर रहा। यह भारत के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 15.42% है।
संयुक्त अरब अमीरात के बाद सऊदी अरब, GCC में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। सितंबर 2025 तक GCC देशों से भारत में 31.14 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आ चुका है।
भारत GCC देशों को इंजीनियरिंग सामान, कपड़ा, चावल, मशीनरी, रत्न और आभूषण निर्यात करता है। वहीं भारत वहां से कच्चा तेल, एलएनजी, पेट्रोकेमिकल और सोना जैसे कीमती धातु आयात करता है। GCC देशों की कुल आबादी लगभग 6.15 करोड़ है और उनकी संयुक्त अर्थव्यवस्था 2.3 ट्रिलियन डॉलर की है, जो दुनिया में नौवें स्थान पर है।
GCC महासचिव ने कहा कि यह समझौता व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करेगा तथा कारोबारियों को स्थिरता और स्पष्टता देगा। अधिकारियों का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात को विविध बनाएगा और वैश्विक स्तर पर आर्थिक एकीकरण को बढ़ाएगा।
निर्यात बढ़ाने की चार रणनीतियां
पीयूष गोयल ने हाल ही में भारत के निर्यात को मजबूत करने के लिए चार मुख्य रणनीतियां बताईं:
छोटे और मध्यम उद्योगों को FTA के फायदों की जानकारी देना
गुणवत्ता से समझौता न करना
कच्चे माल की जगह तैयार उत्पादों का निर्यात बढ़ाना
स्थानीय स्तर पर निर्यात तंत्र को मजबूत करना
उन्होंने कहा कि मानक कोई बाधा नहीं, बल्कि बाजार में प्रवेश का माध्यम हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट’ विजन का भी उल्लेख किया।
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद GCC महासचिव ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने विश्वास जताया कि यह समझौता व्यापार और निवेश संबंधों को नई ऊंचाई देगा।
भारत और GCC के बीच संयुक्त कार्य योजना के तहत ऊर्जा, कृषि, सुरक्षा और लोगों के आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत पहले ही यूएई और ओमान के साथ FTA कर चुका है और कतर के साथ बातचीत कर रहा है। साथ ही चिली और कनाडा के साथ भी संभावित समझौतों पर विचार चल रहा है।






























