भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता तय हो गया है। इससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए हैं। इस समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि भारत के कृषि और डेयरी सेक्टर को सुरक्षित रखा गया है। यही इस समझौते का सबसे अहम और संवेदनशील पहलू माना जा रहा है।
समझौते के ऐलान के बाद केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि इस व्यापार समझौते में डेयरी, फल, सब्जियां, मसाले और प्रमुख अनाजों को पूरी तरह संरक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि इससे देश के किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे, भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे और यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है।
कृषि और डेयरी सिर्फ व्यापार के क्षेत्र नहीं हैं, बल्कि ये भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। करोड़ों छोटे और सीमांत किसान इन्हीं पर निर्भर हैं। अगर इन क्षेत्रों को बिना सुरक्षा के विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोल दिया जाता, तो किसानों को भारी नुकसान हो सकता था।
इस समझौते में भारत ने यह साफ कर दिया है कि डेयरी, फल, सब्जियां, मसाले और अनाज पर बड़े पैमाने पर टैरिफ छूट नहीं दी जाएगी। यह इसलिए भी जरूरी था क्योंकि अमेरिका जैसे देशों में कृषि उद्योग को भारी सब्सिडी मिलती है। अगर सस्ते विदेशी उत्पाद भारत में आते, तो देश के किसान उनसे मुकाबला नहीं कर पाते।
इस मुद्दे का राजनीतिक महत्व भी बहुत बड़ा है। भारत में किसानों की आय और उनका हित किसी भी सरकार के लिए बेहद अहम होता है। अगर किसी समझौते से किसानों की कमाई पर असर पड़ता, तो सामाजिक और राजनीतिक विरोध बढ़ सकता था। यही वजह थी कि भारत ने पहले RCEP जैसे बड़े व्यापार समझौते से खुद को अलग कर लिया था।
सरकार ने साफ कहा है कि उसने कृषि और डेयरी को लेकर अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है। इस समझौते में भारत ने अपने बाजार खोलने के बजाय भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच दिलाने पर जोर दिया है। इससे किसान और कृषि निर्यातक अमेरिका जैसे बड़े बाजार में बढ़ती मांग का फायदा उठा सकेंगे।
यह रणनीति सरकार की उस नीति के अनुरूप है जिसमें पहले देश के हित सुरक्षित करने और फिर वैश्विक बाजार से जुड़ने की बात कही जाती है। यानी पहले देश को मजबूत बनाना, फिर अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ाना।
आज के समय में जब दुनिया भर में सप्लाई चेन पर दबाव है और कई देश संरक्षणवादी नीतियां अपना रहे हैं, ऐसे में भारत का यह कदम संतुलित और समझदारी भरा माना जा रहा है। जल्दबाजी में बड़ा समझौता करने के बजाय, इस अंतरिम ढांचे से भारत ने अपने हितों को सुरक्षित रखते हुए अमेरिका के साथ भरोसा बढ़ाया है।
कृषि और डेयरी की सुरक्षा के साथ यह समझौता आत्मनिर्भर भारत को जमीन पर मजबूत करता है। संदेश साफ है—
पहले किसानों और घरेलू उद्योगों को मजबूत करना,
फिर वैश्विक बाजार से जुड़ना।
साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि भारतीय किसान और कृषि से जुड़े उद्योग वैश्विक व्यापार से पूरी तरह कटें नहीं, बल्कि धीरे और सुरक्षित तरीके से अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ें।
कुल मिलाकर, भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता यह दिखाता है कि भारत वैश्वीकरण के दौर में भी अपने किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से समझौता नहीं करेगा।






























