केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के स्वरूप को पूरी तरह बदलने के लिए कमर कस ली है। 30 अप्रैल, 2026 को हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने एक नया रोडमैप पेश किया, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक खरीद को पहले से अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और समावेशी बनाना है। सरकार अब GeM को केवल एक डिजिटल पोर्टल के रूप में नहीं, बल्कि भारत की खरीद प्रणाली के एक मजबूत स्तंभ के रूप में देख रही है। यह एक ऐसा ढांचा तैयार करने की कोशिश है जो यह परिभाषित करेगा कि भविष्य में सरकार सामान और सेवाओं की खरीदारी कैसे करेगी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल टूल्स: सुधारों का केंद्र
GeM के सुधारों की इस नई योजना में सबसे अधिक जोर तकनीक पर दिया गया है। सरकार अब खरीद प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करने जा रही है।
बेहतर मूल्य निर्धारण: AI टूल्स की मदद से सही कीमत का पता लगाना (Price Discovery) आसान होगा, जिससे सरकारी खजाने की बचत होगी।
पारदर्शिता और गति: डेटा-संचालित प्रणाली से मानवीय हस्तक्षेप कम होगा, जिससे खरीद में होने वाली देरी घटेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
दक्षता में सुधार: अधिकारियों का मानना है कि इन आधुनिक उपकरणों के प्रयोग से विभिन्न सरकारी विभागों के बीच काम करने की दक्षता में भारी सुधार आएगा।
बाजार में भागीदारी का विस्तार: एकाधिकार को खत्म करने की चुनौती
सुधारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा GeM पर विक्रेताओं (Vendors) की संख्या को बढ़ाना है। सरकार चाहती है कि सिस्टम में अधिक से अधिक विक्रेता जुड़ें ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े और सरकारी खरीद किसी एक वर्ग तक सीमित न रहे।
पीयूष गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि हर आकार के व्यवसाय को सीधे सरकारी खरीद में भाग लेने का अवसर मिलना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य पुराने खरीद पैटर्न को तोड़ना है, जहाँ कुछ चुनिंदा आपूर्तिकर्ताओं का वर्चस्व रहता था। अब छोटे से छोटे व्यापारी को भी बड़े टेंडर में हिस्सा लेने का समान अवसर मिलेगा।
समावेशी विकास: MSME, स्टार्टअप और महिला उद्यमी
इस नई रणनीति के केंद्र में देश के छोटे और मझोले उद्योग (MSME), स्टार्टअप्स और महिला उद्यमी हैं। सरकार का लक्ष्य इन समूहों को सार्वजनिक अनुबंधों (Public Contracts) तक आसान पहुँच प्रदान करना है।
व्यवसाय का विस्तार: आसान पहुँच से ये उद्यमी अपने परिचालन को बड़े पैमाने पर ले जा सकेंगे और बड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं का हिस्सा बन सकेंगे।
उद्यमिता को बढ़ावा: अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से भारत के समग्र उद्यमशीलता इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी और जमीनी स्तर पर आर्थिक विकास होगा।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश की नई दिशा
GeM में सुधारों के साथ-साथ सरकार अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी बड़े कदम उठा रही है। 28 अप्रैल को गोयल ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए एक महत्वपूर्ण समझौते पर प्रकाश डाला।
यह समझौता शिक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि, बौद्धिक संपदा और पारंपरिक चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को कवर करता है। विशेष रूप से, इसमें आयुर्वेद और माओरी परंपराओं के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, न्यूजीलैंड अगले 25 वर्षों में भारत में लगभग 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है, जो पिछले 25 वर्षों के मात्र 70 मिलियन रुपये के निवेश के मुकाबले एक ऐतिहासिक उछाल है।
बड़ा आर्थिक परिप्रेक्ष्य: ‘अमृत काल’ की ओर कदम
पीयूष गोयल ने इस बात पर गौर किया कि निवेश में यह बड़ा बदलाव रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास में सहायक होगा। उन्होंने इन प्रयासों को भारत के व्यापक “अमृत काल” विकास चरण से जोड़ा है।
अंततः, सरकार GeM को मात्र एक खरीद मंच के रूप में नहीं, बल्कि पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और समावेशी शासन के लिए एक डिजिटल रीढ़ (Digital Backbone) के रूप में विकसित कर रही है।




























