हिमालय की गोद में बसे ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ के धाम से एक बार फिर भक्ति की अविरल धारा बहने को तैयार है। वह घड़ी करीब आ गई है जिसका इंतजार दुनिया भर के शिव भक्तों को महीनों से था। मंगलवार की सुबह जैसे ही घड़ी की सुइयां 8:00 बजेंगी, वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच बाबा केदार के धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। लेकिन इस पावन पर्व के उत्साह के साथ-साथ जमीनी हकीकत कुछ ऐसी है जो प्रशासन के दावों और यात्रियों के धैर्य की परीक्षा ले रही है। केदारनाथ पैदल मार्ग पर उमड़ा जनसैलाब और वहां पसरी अव्यवस्थाएं आस्था के इस सफर को चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।
भक्ति का महासंगम: फूलों से सजी केदारपुरी और आर्मी बैंड की धुन
केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया एक उत्सव की तरह होती है। बाबा केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली जब अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ से रवाना हुई, तो माहौल पूरी तरह शिवमय हो गया। सोमवार को यह डोली फाटा से अपने अगले पड़ाव के लिए निकली। बड़ासू, शेरसी, रामपुर और सीतापुर होते हुए जब यह पालकी शाम 4 बजे गौरीकुण्ड पहुंची, तो भक्तों का उत्साह देखने लायक था। आर्मी बैंड की सुरीली धुनों ने पहाड़ों की शांति को एक नई ऊर्जा से भर दिया। केदारनाथ मंदिर को कई क्विंटल ताजे फूलों से किसी दुल्हन की तरह सजाया गया है, जिसकी खुशबू पूरी केदारपुरी में महक रही है।
गौरीकुण्ड से केदारनाथ: पैदल मार्ग पर आस्था का ‘ट्रैफिक जाम’
आस्था जब चरम पर होती है, तो रास्ते छोटे पड़ जाते हैं। सोमवार रात बाबा की डोली ने गौरी माई मंदिर में विश्राम किया और मंगलवार सुबह विशेष पूजा के बाद यह धाम के लिए रवाना हुई। लेकिन इस सफर की सबसे बड़ी चुनौती पैदल मार्ग पर खड़ी है। गौरीकुण्ड से केदारनाथ तक के संकरे रास्तों पर इस वक्त पैर रखने की जगह नहीं है। हजारों यात्रियों का हुजूम एक साथ बाबा की डोली के पीछे चल रहा है, जिससे कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया है। प्रशासन की तैयारियां भारी भीड़ के आगे बौनी साबित हो रही हैं।
घोड़े-खच्चरों का आतंक: बुजुर्गों और बच्चों के लिए बढ़ी मुश्किलें
पैदल मार्ग पर यात्रियों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बेतरतीब ढंग से चल रहे घोड़े-खच्चर बन गए हैं। संकरे रास्तों पर जब एक तरफ से हजारों लोग पैदल चल रहे हों और दूसरी तरफ से पशुओं का दबाव हो, तो स्थिति अनियंत्रित हो जाती है। यात्रियों की शिकायत है कि घोड़े-खच्चरों की वजह से पैदल चलने वालों को धक्का लग रहा है और कई जगहों पर भयंकर जाम की वजह से बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है। पशुओं के मल-मूत्र और फिसलन भरे रास्तों ने पैदल यात्रियों के सफर को और भी ज्यादा कष्टदायक बना दिया है।
कल सुबह होगा महा-अभिषेक: भक्तों की नजरें कपाट पर
तमाम दिक्कतों के बावजूद भक्तों का हौसला कम नहीं हुआ है। “बम-बम भोले” के जयकारों के साथ लोग हर बाधा को पार कर रहे हैं। आज शाम तक बाबा की डोली मंदिर परिसर में पहुंच जाएगी, जहां उसका भव्य स्वागत किया जाएगा। बुधवार (कल) सुबह 8 बजे मुख्य पुजारी द्वारा विशेष पूजा के बाद कपाट खोले जाएंगे, जिसके बाद पहली पूजा देश के नाम और जन-कल्याण के लिए की जाएगी। केदारघाटी में इस वक्त तापमान काफी कम है, लेकिन भक्तों की श्रद्धा की गर्माहट हर तरफ महसूस की जा सकती है।
श्रद्धा और सब्र का इम्तिहान
केदारनाथ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि खुद को पहचानने और प्रकृति के करीब जाने का एक माध्यम है। हालांकि, पहले ही दिन दिखी अव्यवस्थाओं ने शासन-प्रशासन के पुख्ता इंतजामों की पोल खोल दी है। यात्रियों से अपील की जा रही है कि वे धैर्य बनाए रखें और अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ें। बाबा केदार के द्वार सबके लिए खुल रहे हैं, बस जरूरत है तो थोड़े सब्र और अनुशासन की ताकि यह यात्रा सुरक्षित और मंगलमय बनी रहे, बेशक रास्ते कठिन हैं और जाम की चुनौती बड़ी है, लेकिन भक्तों का हौसला कम नहीं हुआ है. गुप्तकाशी से लेकर गौरीकुण्ड तक पूरा इलाका शिव के रंग में रंगा नजर आ रहा है.





























