क्या ‘जय श्री राम’ पर पेट्रोल टिप्पणी करके संजय राउत ने पार कर दी मर्यादा?

संजय राउत क नए विवाद में घिर गए हैं। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए “जय श्री राम” का व्यंग्यात्मक इस्तेमाल किया।

‘जय श्री राम

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देश में बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों के बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता Sanjay Raut एक नए विवाद में घिर गए हैं। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए “जय श्री राम” का व्यंग्यात्मक इस्तेमाल किया।

मीडिया से बातचीत के दौरान राउत ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कोई नई बात नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर आप बीजेपी समर्थक हैं तो ‘जय श्री राम’ बोलिए और पेट्रोल 10 रुपए सस्ता हो जाएगा। यही बीजेपी का मंत्र है। ‘जय श्री राम’ बोलिए और जो चाहो मिल जाएगा।”

राउत ने आगे कहा, “जिन लोगों ने बीजेपी को वोट दिया है, वे अब आराम से बैठें और बढ़ती कीमतों का सामना करें।”

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि राउत ने एक पवित्र धार्मिक नारे को राजनीतिक और आर्थिक बहस में घसीटा है। बीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “सरकार का विरोध कीजिए, भगवान श्रीराम का नहीं। पेट्रोल की कीमतों को भगवान श्रीराम से जोड़ना बेहद शर्मनाक है। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन भगवान श्रीराम के प्रति इतनी नफरत क्यों?”

इसी बीच देश के कई बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिर बढ़ गई हैं। पेट्रोल और डीजल करीब 90 पैसे प्रति लीटर महंगे हुए हैं। इससे पहले 15 मई को भी दोनों ईंधनों की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी।

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपए और डीजल 91.58 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। मुंबई में पेट्रोल 107.59 रुपए और डीजल 94.08 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता और चेन्नई में भी ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक कच्चे तेल बाजार में अस्थिरता की वजह से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंता का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ा है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने लोगों से ईंधन बचाने और जरूरत पड़ने पर कम यात्रा करने की अपील की है।

यह विवाद एक बार फिर भारत में धर्म और राजनीति के रिश्ते पर बहस को तेज कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि मुद्दा सिर्फ पेट्रोल की कीमतों का नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल का भी है।

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