शनिवार का दिन पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक युगांतकारी मोड़ के रूप में दर्ज हो गया। कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड, जिसने दशकों से वामपंथ और तृणमूल कांग्रेस की गर्जना सुनी थी, आज ‘जय श्री राम’ के उद्घोष और केसरिया लहर के बीच भाजपा की पहली सरकार का गवाह बना। इस समारोह में जहाँ सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, वहीं एक दृश्य ऐसा भी रहा जिसने करोड़ों भारतीयों की आँखों को नम कर दिया। जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर पहुँचे, उन्होंने पद और प्रतिष्ठा की गरिमा से ऊपर उठकर भारतीय संस्कृति का निर्वहन किया और 98 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा नेता माखनलाल सरकार के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
भावुक क्षण: जब प्रधानमंत्री ने छुए माखनलाल सरकार के पैर
कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह के लिए मंच सज चुका था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे ही मंच पर पहुँचे, उनकी नज़र सामने बैठे एक सफेद बालों वाले बुजुर्ग पर पड़ी। वे कोई और नहीं, बल्कि बंगाल में जनसंघ और भाजपा की नींव रखने वाले माखनलाल सरकार थे। प्रधानमंत्री ने बिना किसी देरी के झुककर उनके पैर छुए, उन्हें गले लगाया और काफी देर तक उनके दोनों हाथों को थामकर बातें करते रहे। यह केवल एक राजनीतिक सम्मान नहीं था, बल्कि उन तपस्वी कार्यकर्ताओं के प्रति कृतज्ञता थी जिन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर तय करने में अपना पूरा जीवन खपा दिया। पीएम मोदी ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया, जिसे देखकर वहां मौजूद हजारों समर्थक भावुक हो गए।
कौन हैं माखनलाल सरकार? श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ फहराया था तिरंगा
माखनलाल सरकार का नाम बंगाल की राजनीति में उस अटूट विश्वास का प्रतीक है, जो कभी डिगा नहीं। 98 वर्षीय माखनलाल सरकार पश्चिम बंगाल में भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। उनका राजनीतिक संघर्ष आज का नहीं, बल्कि आजाद भारत के शुरुआती वर्षों का है।
- लाल चौक पर तिरंगा: माखनलाल सरकार उन साहसी लोगों में शामिल थे जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के लाल चौक पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ तिरंगा फहराया था।
- 1952 की गिरफ्तारी: जब डॉ. मुखर्जी ने ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान’ के खिलाफ आंदोलन शुरू किया, तब 1952 में माखनलाल सरकार ने उनके साथ गिरफ्तारी दी थी।
- संगठन का आधार स्तंभ: 1980 में जब भाजपा का गठन हुआ, तब उन्हें पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर इलाके का कोऑर्डिनेटर बनाया गया। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने केवल एक साल के भीतर दार्जिलिंग और आसपास के इलाकों में 10 हजार से अधिक लोगों को भाजपा से जोड़ा। वे 1981 से लगातार पार्टी में जिलाध्यक्ष से लेकर राज्य स्तर के पदों पर रहे, लेकिन कभी सत्ता की लालसा नहीं रखी।
सुवेंदु अधिकारी: ‘सोनार बांग्ला’ के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ
भाजपा विधायक दल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल आर.एन. रवि ने उन्हें शपथ दिलाई। सुवेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। नंदीग्राम और भवानीपुर के चुनावी समर में अपनी ताकत दिखाने वाले सुवेंदु ने अब राज्य की कमान संभाल ली है। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का अभिवादन किया और राज्य के विकास के लिए ‘डबल इंजन सरकार’ के संकल्प को दोहराया।
सुवेंदु मंत्रिमंडल के पांच ‘रत्न’: नए मंत्रियों ने ली शपथ
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ पाँच अन्य महत्वपूर्ण नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। भाजपा ने अपने मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय संतुलन और अनुभवी चेहरों को प्राथमिकता दी है:
- दिलीप घोष: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और भाजपा को बंगाल के गाँवों तक पहुँचाने वाले नेता।
- अग्निमित्रा पॉल: आसनसोल दक्षिण से विधायक और महिलाओं की सशक्त आवाज़।
- अशोक कीर्तनिया: अनुसूचित जाति और मतुआ समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख चेहरा।
- निसिथ प्रमाणिक: युवा नेतृत्व और उत्तर बंगाल में भाजपा की पकड़ मजबूत करने वाले नेता।
- क्षुदीराम टुडू: जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधि, जो जंगलमहल इलाके से आते हैं।
इन मंत्रियों के चयन से साफ है कि भाजपा बंगाल के हर वर्ग और हर क्षेत्र को सरकार में सीधा हिस्सा देना चाहती है।
भगवामय हुआ कोलकाता: ब्रिगेड परेड ग्राउंड का अद्भुत दृश्य
शपथ ग्रहण समारोह के लिए कोलकाता को पूरी तरह से सजाया गया था। उत्तर बंगाल से लेकर जंगलमहल तक और यहाँ तक कि विदेशों से भी समर्थक इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने पहुँचे। ब्रिगेड परेड मैदान में जहाँ तक नज़र जा रही थी, केवल भाजपा के झंडे और भगवा बैनर ही दिख रहे थे। समर्थकों के बीच बंगाल का पारंपरिक नाश्ता ‘झालमुड़ी’ वितरित किया गया, जो इस उत्सव का हिस्सा बन गया।
कनाडा से आए एक प्रवासी भारतीय ने कहा, “हमने इस दिन के लिए दशकों इंतजार किया है। बंगाल की मिट्टी ने आज अपनी नई तकदीर लिखी है।” छऊ नृत्य और जनजातीय कलाओं की प्रस्तुतियों ने इस राजनीतिक कार्यक्रम को एक सांस्कृतिक महाकुंभ में बदल दिया।
पीएम मोदी का संदेश: बंगाल के विकास की नई दिशा
प्रधानमंत्री मोदी ने माखनलाल सरकार जैसे पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान देकर यह संदेश दिया कि भाजपा अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलती। उन्होंने मंच से हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन किया और नई सरकार को पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने इस समारोह को एक राष्ट्रीय गौरव का विषय बना दिया। एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति ने यह दिखाया कि पूरा भारत आज बंगाल के इस नवनिर्माण में साथ खड़ा है।
एक नए युग की आहट
पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली सरकार का गठन केवल एक राजनीतिक सत्ता परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह उन हजारों कार्यकर्ताओं के संघर्षों की जीत है जिन्होंने वामदल और टीएमसी के शासन में अपनी जान गँवाई या प्रताड़ित हुए। माखनलाल सरकार जैसे जीवित नायकों का प्रधानमंत्री द्वारा सम्मान किया जाना इस बात का प्रमाण है कि बंगाल अब अपनी पुरानी संस्कृति और गौरव को पुनः प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है। सुवेंदु अधिकारी की सरकार के सामने अब चुनौतियां भी बड़ी हैं, लेकिन जिस जनसमर्थन के साथ उन्होंने शुरुआत की है, वह ‘सोनार बांग्ला’ की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।





























