दिल्ली के जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन नहीं हो सकेंगे। दिल्ली पुलिस ने इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिश के बाद 11 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के तहत अब रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया है। नए स्थलों के संचालन के लिए अलग मानक प्रक्रिया भी तैयार की जानी है।
इस फैसले को केवल प्रदर्शन की जगह बदलने के रूप में नहीं, बल्कि राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है। दिल्ली देश की राजधानी है। यहां संसद, प्रमुख सरकारी कार्यालयों, संवेदनशील प्रतिष्ठानों और व्यस्त सड़कों के आसपास होने वाली गतिविधियों का असर केवल प्रदर्शनकारियों तक सीमित नहीं रहता। ऐसे में सुरक्षा, यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन क्यों? प्रशासन के सामने कई चुनौतियां
जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। संसद और केंद्रीय सरकारी प्रतिष्ठानों के नजदीक होने के कारण यहां होने वाले प्रदर्शन आसानी से राजनीतिक और मीडिया का ध्यान आकर्षित करते हैं। लेकिन इसी भौगोलिक स्थिति के कारण सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की चुनौतियां भी पैदा हो सकती हैं।
किसी भी प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने, जुलूस निकलने, सड़क पर दबाव बढ़ने या संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत पड़ सकती है। राजधानी में एक साथ कई गतिविधियां होने पर पुलिस के सामने संसाधनों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त दबाव बनता है।
ऐसे में प्रशासन के पास यह तय करने का अधिकार और जिम्मेदारी है कि किस स्थान पर, किन शर्तों के साथ और किस प्रक्रिया के तहत प्रदर्शन किया जा सकता है। निर्धारित स्थलों की व्यवस्था इसी दिशा में एक प्रशासनिक उपाय हो सकती है।
रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड: अब यहां होंगे प्रदर्शन
दिल्ली पुलिस के नए आदेश के मुताबिक, जंतर-मंतर की जगह अब तीन अन्य स्थान निर्धारित किए गए हैं।
रामलीला मैदान: दिल्ली में बड़े राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों के लिए जाना जाता है। यहां प्रदर्शन आयोजित करने की व्यवस्था को स्पष्ट नियमों के तहत संचालित किया जा सकता है।
बुराड़ी मैदान: राजधानी के बाहरी हिस्से में स्थित यह मैदान बड़े जमावड़ों के लिए एक विकल्प उपलब्ध कराता है।
CBD ग्राउंड, पूर्वी दिल्ली: पूर्वी दिल्ली में निर्धारित यह स्थल प्रदर्शन आयोजित करने के लिए एक अन्य विकल्प होगा।
इन स्थानों के लिए स्पष्ट अनुमति प्रक्रिया, भीड़ प्रबंधन, प्रवेश और निकास की व्यवस्था तथा सुरक्षा संबंधी निर्देश तय किए जाना महत्वपूर्ण होगा। इससे आयोजकों और पुलिस—दोनों को पहले से अपनी जिम्मेदारियों का अंदाजा रहेगा।
विरोध के नाम पर व्यवस्था को चुनौती देने की छूट नहीं
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि किसी भी स्थान पर, किसी भी समय और किसी भी तरीके से प्रदर्शन किया जा सकता है। सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल करते समय कानून, यातायात और दूसरे नागरिकों के अधिकारों का ध्यान रखना भी जरूरी है।
अगर किसी प्रदर्शन के कारण सड़कें बाधित होती हैं, आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है या संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं, तो प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। यह सिद्धांत किसी एक राजनीतिक दल या संगठन तक सीमित नहीं होना चाहिए। नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला इसी व्यापक प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखा जा सकता है। इसका उद्देश्य और वास्तविक प्रभाव इस बात से स्पष्ट होगा कि नए स्थलों पर प्रदर्शन की अनुमति किस प्रक्रिया से मिलती है और नियम कितनी समानता से लागू किए जाते हैं।
CJP के प्रदर्शन का संदर्भ, लेकिन फैसला केवल उसी तक सीमित नहीं
हाल के दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की योजना को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं और पुलिस के बीच विवाद चर्चा में रहा। इस घटनाक्रम ने राजधानी में विरोध प्रदर्शनों की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए।
हालांकि, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का आदेश गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिश के बाद जारी हुआ है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि पूरा फैसला केवल CJP के प्रदर्शन को रोकने के लिए लिया गया। इसके पीछे प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी कारणों का आकलन भी जरूरी है।
लेकिन इस घटनाक्रम से एक व्यापक सवाल जरूर सामने आता है: क्या किसी भी राजनीतिक या सामाजिक संगठन को केवल इसलिए किसी संवेदनशील स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति मिलनी चाहिए कि वहां से उसका संदेश अधिक प्रभावी ढंग से प्रसारित होगा? प्रशासन के लिए प्रदर्शन की राजनीतिक लोकप्रियता से ज्यादा महत्वपूर्ण सुरक्षा, अनुमति की शर्तें और सार्वजनिक व्यवस्था होनी चाहिए।
सरकार और पुलिस के सामने चुनौती केवल प्रदर्शन का स्थान बदलने की नहीं है। नए स्थलों पर ऐसी व्यवस्था बनाना भी जरूरी है, जिसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को उचित अवसर मिले और आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी अनावश्यक रूप से बाधित न हो।
