TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    यूसीसी ने विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाया

    यूसीसी का एक साल ,ऑनलाइन प्रक्रिया से आसान हुआ विवाह पंजीकरण

    नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे

    बूथ स्तर तक होगा भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नबीन का स्वागत, पार्टी आलाकमान ने बनाई संगठन तक पहुँच बढ़ाने की रणनीतिs

    पाकिस्तान बंग्लादेश विवाद

    बांग्लादेश विवाद : पाकिस्तान ने 2026 T20 वर्ल्ड कप से पीछे हटने की चेतावनी

    नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे

    बिहार से पहली बार भाजपा को राष्ट्रीय अध्यक्ष, नितिन नवीन आज करेंगे नामांकन

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है

    अमेरिकी दबाव के बीच भारत चाबहार बंदरगाह पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने पर विचार कर रहा

    भारतीय नौसेना पानी और ज़मीन दोनों से उड़ान भर सकने वाले उभयचर विमानों को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है।

    भारतीय नौसेना का नया प्लान, पानी पर नए रनवे बनाने की तैयारी

    भारत के लिए राफेल की डील होनी बड़ी सफलता है।

    भारत–फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों पर बड़ी सहमति, नागपुर में बनेगी असेंबली लाइन

    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ईरान से लौटें भारतीय नागरिकों के आंखों में साफ दिखा डर

    ईरान से लौटे भारतीय नागरिकों ने जताया अभार ,आंखों में दिखा डर और चिंता

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस विवादित कदम को बेझिझक अपनाया

    माचाडो ने ट्रंप को ‘वापस जीतने’ के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया , अमेरिकी राष्ट्रपति ने बेझिझक अपनाया

    ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिका का 25% टैरिफ

    ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिका का 25% टैरिफ , भारत पर क्या पड़ेगा असर?

    चीन में 10 जनवरी 2026 को छठा पुलिस दिवस

    10 जनवरी छठा चीनी पुलिस दिवस: विदेशों तक फैल रहा चीन का दमन, तिब्बत के बाद ताइवान पर नया निशाना

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    यूसीसी ने विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाया

    यूसीसी का एक साल ,ऑनलाइन प्रक्रिया से आसान हुआ विवाह पंजीकरण

    नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे

    बूथ स्तर तक होगा भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नबीन का स्वागत, पार्टी आलाकमान ने बनाई संगठन तक पहुँच बढ़ाने की रणनीतिs

    पाकिस्तान बंग्लादेश विवाद

    बांग्लादेश विवाद : पाकिस्तान ने 2026 T20 वर्ल्ड कप से पीछे हटने की चेतावनी

    नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे

    बिहार से पहली बार भाजपा को राष्ट्रीय अध्यक्ष, नितिन नवीन आज करेंगे नामांकन

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है

    अमेरिकी दबाव के बीच भारत चाबहार बंदरगाह पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने पर विचार कर रहा

    भारतीय नौसेना पानी और ज़मीन दोनों से उड़ान भर सकने वाले उभयचर विमानों को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है।

    भारतीय नौसेना का नया प्लान, पानी पर नए रनवे बनाने की तैयारी

    भारत के लिए राफेल की डील होनी बड़ी सफलता है।

    भारत–फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों पर बड़ी सहमति, नागपुर में बनेगी असेंबली लाइन

    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ईरान से लौटें भारतीय नागरिकों के आंखों में साफ दिखा डर

    ईरान से लौटे भारतीय नागरिकों ने जताया अभार ,आंखों में दिखा डर और चिंता

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस विवादित कदम को बेझिझक अपनाया

    माचाडो ने ट्रंप को ‘वापस जीतने’ के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया , अमेरिकी राष्ट्रपति ने बेझिझक अपनाया

    ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिका का 25% टैरिफ

    ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिका का 25% टैरिफ , भारत पर क्या पड़ेगा असर?

    चीन में 10 जनवरी 2026 को छठा पुलिस दिवस

    10 जनवरी छठा चीनी पुलिस दिवस: विदेशों तक फैल रहा चीन का दमन, तिब्बत के बाद ताइवान पर नया निशाना

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

खुशहाली, विवाद, राज हत्या और प्रेत आत्माएं: ‘शनिवार वाड़ा’ का इतिहास

शनिवार वाड़ा की रहस्यमय कहानी को यहां विस्तार से समझिए!

Animesh Pandey द्वारा Animesh Pandey
29 August 2022
in प्रीमियम
शनिवार वाड़ा

Source- TFI

Share on FacebookShare on X

“काका, म्हाला वाचवा!” एक बालक प्रांगण में इधर से उधर दौड़ते हुए चिल्ला रहा था पर उसकी पुकार एक व्यक्ति देखकर भी अनसुनी कर रहा था। सत्ता की लालसा में वह इतना अंधा हो चुका था कि उस युवा बालक का संहार करने को भी उद्यत था और हुआ भी कुछ वैसा ही। उस बालक की दर्दनाक मृत्यु के साथ ही एक साम्राज्य के गौरव का अंत हुआ और साथ ही स्थापित हुई एक वंश के विनाश की नींव, जिसका साक्षी बना एक परिसर, जिसमें यह सब कुछ हुआ। यदि आपको लगता है कि यह किसी फिल्म या बाहुबली राजनीति के किस्से का छंद है, तो क्षमा करें, आप भारतीय इतिहास से परिचित नहीं हैं। यह भारतीय इतिहास का वो भाग है, जिसे कोई पढ़ ले तो गेम ऑफ थ्रोन्स भी उसके लिए पानी कम चाय समान लगे। अंतर बस इतना है कि सारी लड़ाई बस एक कुर्सी के लिए होती है और यहां सारी लड़ाई पुणे में एक भवन के लिए होती थी और वह था- शनिवार वाड़ा।

शनिवार वाड़ा? यह नाम कुछ सुना सुना सा नहीं लग रहा? यह वही भवन है, जहां हिंदवी स्वराज्य के प्रधानमंत्री यानी मराठा पेशवा निवास करते थे। पुणे में स्थित इस भग्नावशेष की भव्यता आज भी अनेकों को अपनी ओर खींच लाती है, ठीक उसी प्रकार जैसे अनंतनाग में स्थित मार्तंड सूर्य मंदिर परिसर से लोग अभिभूत हो जाते हैं, जबकि उसे छिन्न भिन्न करने में इस्लामिक आक्रान्ताओं ने कोई प्रयास अधूरा नहीं छोड़ा था।

संबंधितपोस्ट

शनिवार वाड़ा की मर्यादा भंग: मराठा गौरव के प्रतीक स्थल पर नमाज, हिंदू अस्मिता के अपमान की कहानीू

“जिस शख्स ने पेशवाई का गौरव चरम पर पहुंचाया”, मराठा साम्राज्य के महान पेशवा बालाजी विश्वनाथ की कहानी

और लोड करें

और पढ़ें: इन 5 साम्राज्यों की शौर्य गाथा सिल्वर स्क्रीन पर लाना आवश्यक है और बॉलीवुड के हाथों तो बिल्कुल नहीं

इस शनिवार वाड़ा का निर्माण 1730 में प्रारंभ हुआ, जब अखंड भारत को पुनर्स्थापित करने हेतु मराठा साम्राज्य के सबसे वीर योद्धा पेशवा बाजीराव बल्लाड़ एक लंबे यात्रा पर निकल पड़े थे और इसमें उनके अनुज चिमाजीराव अप्पा का बहुमूल्य योगदान था। कहते हैं कि शनिवार वाड़ा को सूर्यवंशी राजपूतों की शैली में एक अति भव्य भवन के रूप में निर्मित किया जाना था, जिसे देखकर लोग कह सके कि हां, केवल मुगल ही शिल्पकारी में निपुण नहीं थे और वास्तव में शनिवार वाड़ा के कई अवशेष आज भी इस बात का प्रमाण देते हैं। परंतु न जाने शनिवार वाड़ा को किसकी कुदृष्टि लगी। प्रारंभ के कुछ समृद्ध वर्षों के पश्चात इस भव्य परिसर में जो भी रहा, वह कभी भी सुख और वैभव से परिपूर्ण जीवन नहीं जी सका। उदाहरण के लिए पेशवा बाजीराव को युद्ध के साथ अपने आंतरिक कलह से भी दो चार होना पड़ा क्योंकि उन्होंने बुंदेलखंड के पराक्रमी राजा छत्रसाल की मुस्लिम पुत्री मस्तानी के साथ विवाह करने का निर्णय लिया था और इसे अधिकतम लोग स्वीकार करने को तैयार नहीं थे।

बाजीराव के असामयिक मृत्यु के पश्चात पेशवा बालाजी बाजीराव ने शनिवार वाड़ा का शासन संभाला। उनके प्रशासन में वैभव भी आया, साम्राज्य भी बढ़ा और ‘कटक से अटक’ तक भारत की राजनीतिक सीमाएं पुनर्स्थापित हुई। परंतु इसे शनिवार वाड़ा की रीति कहिए या फिर उनका दुर्भाग्य, बालाजी बाजीराव का प्रताप अधिक समय तक टिक नहीं सका। अपने भांजे सदाशिवराव भाऊ के प्रति उनका मोह रघुनाथ राव को खटकने लगा, जिन्होंने हिंदुओं और सिखों समेत अनेकों प्रांतों एवं समुदायों को एकत्रित करने का दुष्कर कार्य किया था और उन्होंने अफगानों के विरुद्ध मोर्चा संभालने से ही मना कर दिया। परिणामस्वरूप अनुभवहीन सदाशिवराव भाऊ को उत्तर भारत में अफगानों के आक्रमण को रोकने का भार सौंपा गया और पानीपत के तीसरे युद्ध में मराठा साम्राज्य को भारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। न सदाशिवराव भाऊ बचे, न बालाजी बाजीराव के प्रिय पुत्र और उत्तराधिकारी विश्वास राव और स्वयं बालाजी बाजीराव भी शीघ्र ही उनके वियोग में भगवान को प्यारे हो गए।

परंतु न मराठा साम्राज्य, न पेशवा पीढ़ी के लिए और न ही शनिवार वाड़ा के लिए यह कठिन समय खत्म हुआ था। कनिष्ठ पुत्र माधवराव, जो तब मात्र 16 वर्ष के थे, वो हिंदवी स्वराज्य के नए पेशवा थे परंतु केवल अफ़गान और रूहेल उनके शत्रु थे। उनके सबसे बड़े शत्रु शनिवार वाड़ा में थे, उनके अपने काका – रघुनाथ राव। किसी को पता नहीं चला लेकिन आक्रोश अब कुंठा और कुंठा ने कब कुटिलता का रूप ले लिया था। माधवराव अपने पूर्वज पेशवा बाजीराव बल्लाड़ की भांति परिपक्व एवं कुशल नेतृत्व से परिपूर्ण थे। वो भली-भांति परिचित थे कि योग्य नेतृत्व ही हिंदवी स्वराज्य को उसका खोया हुआ सम्मान पुनः दिला सकता है। उनके नेतृत्व में सर्वप्रथम यह अधिनियम स्थापित किया गया कि जो भी अपने कार्यों में भ्रष्ट सिद्ध हुआ या जिसने भी राष्ट्रद्रोह किया, उसे सार्वजनिक दंड दिया जाएगा चाहे वह कितना भी प्रभावशाली और शक्तिशाली क्यों न हो। इसका उदाहरण उन्होंने अपने ही परिवार के माध्यम से दिया जब उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर अपने ही काका रघुनाथ राव को कारावास में डालने का निर्णय लिया था।

और पढ़ें: पेशवा माधवराव भट्ट– भारतवर्ष का आधुनिक स्कंदगुप्त जिसने मराठा साम्राज्य को खंडित होने से बचाने का प्रयास किया

पेशवा माधवराव भट्ट के नेतृत्व में नाना फडणवीस जैसे कूटनीतिज्ञ, राम शास्त्री प्रभुणे जैसे न्यायाधीश एवं महड़जी शिंदे जैसे सेनापति को खूब शक्तियां दी गई, जिनके कारण कुछ ही वर्षों में माराठाओं ने फिर से अपना परचम लहराया। जितनी भूमि मराठा साम्राज्य ने खोई थी, पेशवा माधवराव भट्ट के शासनकाल में उन्होंने उससे ज्यादा पुन: प्राप्त कर ली। परंतु देश का दुर्भाग्य देखिए। जैसे अल्पायु में स्कंदगुप्त का निधन हुआ, वैसे ही क्षयरोग से पेशवा माधवराव भट्ट का भी निधन हो गया। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दिन ठेऊर के गणेश चिंतामणी मंदिर में भगवान गणपति की स्तुति करते हुए बिताए और मात्र 27 वर्ष की आयु में 18 नवंबर 1772 को उनका स्वर्गवास हो गया। रमाबाई उनके वियोग को नहीं सह पाई और उन्हीं के संग सती हो गईं, जबकि मराठा समुदाय में ऐसा कोई रीति-रिवाज नहीं था।

फिर वो अनर्थ हुआ, जिसने मराठा साम्राज्य के विनाश की नींव स्थापित कर दी। युवा पेशवा नारायणराव मात्र 18 वर्ष के थे, जब उन्हें पेशवा के रूप में चुना गया था। वो कोई बहुत हृष्ट पुष्ट पुरुष नहीं थे परंतु मराठा समुदाय को पूर्ण विश्वास था कि वो अपने भ्राता माधवराव की भांति सभी को अपने व्यक्तित्व से चकित कर देंगे। कुछ ऐसा ही हो भी रहा था परंतु नारायणराव के प्रभाव से सबसे अधिक यदि किसी को जलन होती थी तो वो थे- रघुनाथ राव।

कारागार से बाहर निकलने के पश्चात उन्होंने नारायण राव का शोषण करना शुरू कर दिया, जिससे नारायण बहुत परेशान हो गए और उन्होंने रघुनाथ राव को अपने सहायक के पद से हटा दिया। जिसके बाद रघुनाथ राव ने सुमेर सिंह नामक द्वारपाल समेत कुछ और लोगों के साथ में मिलकर गणेश चतुर्थी वाले दिन नारायण राव को मारने की साजिश रची और उन्होंने 30 अगस्त सन् 1773 को नारायण राव का वध करवा दिया।

इसी दिन नारायण राव के लगभग समस्त रक्षक गार्ड्स भी मारे गए और रात को ही रघुनाथ राव और उनकी पत्नी आनंदी बाई ने मिलकर उनके शव को नदी में फेंक दिया उनके मरने के बाद अब राधोबा को गद्दी मिल गई परंतु नाना फडणवीस और महादजी सिंधिया के प्रभाव के कारण नारायण राव के एकमात्र पुत्र माधव राव को गद्दी पर बैठा दिया और रघुनाथ राव को पैशवा की गद्दी से हटा दिया, जिसके कारण प्रथम आंग्ल मराठा युद्ध छिड़ गया। महड़जी सिंधिया ने अंग्रेजों को मराठा युद्ध में पराजित कर दिया और माधवराव को पेशवा के रूप में अंग्रेजों से साबित करवा दिया।

लेकिन उस जघन्य हत्या का श्राप कहें या फिर प्रभु की माया, आज भी शनिवार वाड़ा में काका म्हाला वाचवा की आवाज आती है। यहां तक कि रघुनाथ राव के पुत्र बाजीराव द्वितीय को भी रघुनाथ राव के भूत होने का एहसास होता था, जिसके कारण उसने कई सारे आम के पेड़ों को ब्राह्मणों में दान किए परंतु तब भी उस भूत ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और बिठूर में भी वह भूत उनके पीछे रहा।

कहते हैं कि इसी महल में 30 अगस्त 1773 की रात 18 वर्षीय नारायण राव की षडयंत्र करके हत्या कर दी गई थी, जो मराठा साम्राज्य के नौवें पेशवा बने थे। कहा जाता है कि उनके चाचा ने ही उनकी हत्या करवाई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज भी अमावस्या की रात महल से किसी की दर्द भरी आवाज सुनाई देती है, जो बचाओ-बचाओ चिल्लाती है। ये आवाज नारायण राव की ही है। इस भवन की भव्यता अंत में एक रहस्यमयी अग्नि में 1828 में नष्ट हुई। वर्ष 1828 में इस महल में भयंकर आग लगी थी, जो सात दिनों तक जलती रही थी। इसकी वजह से महल का बड़ा हिस्सा जल गया था। अब यह आग कैसे लगी थी, ये आज भी एक सवाल ही बना हुआ है। इसके बारे में कोई नहीं जानता।

और पढ़ें: कांग्रेस के गुंडों द्वारा 5000 ब्राह्मणों के नरसंहार की अनसुनी कहानी

TFI का समर्थन करें:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ‘राइट’ विचारधारा को मजबूती देने के लिए TFI-STORE.COM से बेहतरीन गुणवत्ता के वस्त्र क्रय कर हमारा समर्थन करें।

Tags: पेशवा बाजीरावमराठा पेशवाशनिवार वाड़ा
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

IPL का Hulk के एल राहुल international matches में क्यों बन जाता है ‘फैयाज टक्कर’

अगली पोस्ट

जो मुकेश अंबानी और जैक मा नहीं कर पाए वो अडानी ने कर दिखाया, बने दुनिया के तीसरे बड़े अमीर

संबंधित पोस्ट

भारत का अंतरिक्ष धमाका 2026: ISRO के गगनयान मिशन से टूटेगा अमेरिका का घमंड, पाकिस्तान और चीन रहेंगे स्तब्ध
चर्चित

भारत का अंतरिक्ष धमाका 2026: ISRO के गगनयान मिशन से टूटेगा अमेरिका का घमंड, पाकिस्तान और चीन रहेंगे स्तब्ध

3 November 2025

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, ISRO, ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विज्ञान और तकनीक में भारत किसी से पीछे नहीं है। मार्च 2026...

क्या नेताजी सचमुच 1945 में मारे गए थे? मुथुरामलिंगा थेवर और गुमनामी बाबा ने खोला रहस्य
इतिहास

क्या नेताजी का निधन सचमुच 1945 विमान हादसे में हुआ था? मुथुरामलिंगा थेवर और गुमनामी बाबा ने खोला रहस्य

31 October 2025

रहस्य जो आज भी जीवित है जब इतिहास की किताबों में लिखा गया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस 1945 में विमान हादसे में मरे, तो...

कांग्रेस की संघ से डर नीति पर अदालत की चोट: जनता के अधिकार कुचलने की कोशिश पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने लगाया ब्रेक
चर्चित

कांग्रेस की संघ से डर नीति पर अदालत की चोट: जनता के अधिकार कुचलने की कोशिश पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने लगाया ब्रेक

29 October 2025

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार के लिए यह क्षण किसी राजनीतिक झटके से कम नहीं है। राज्य की धारवाड़ बेंच ने सरकार के उस विवादास्पद सरकारी...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

French Media Exposes Pakistan and China on the Rafale lost

French Media Exposes Pakistan and China on the Rafale lost

00:04:36

An Quiet Dialogue Between Nature and the City|Ft. Shashi Tripathi | Art| Indian Navy

00:03:24

Ramjet-Powered Shell: A Potential Game Changer for Indian Artillery| IIT Madra

00:06:25

Trump makes false apache deal claims, runs down India US relations

00:05:44

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

00:00:58
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited