भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 23,622 करोड़ रुपये (करीब 2.76 अरब डॉलर) तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष 2024 के 21,083 करोड़ रुपये की तुलना में 12.04% की वृद्धि को दर्शाता है। यह आंकड़ा बताता है कि भारत अब न केवल अपनी रक्षा आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक मजबूत रक्षा निर्यातक के रूप में भी उभर रहा है।
डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSU) ने इस साल 42.85% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है, जो यह साबित करता है कि भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ रही है। यह उपलब्धि भारत के रक्षा उद्योग की ताकत को दर्शाती है, जो अब ग्लोबल सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
इस साल निजी क्षेत्र और DPSU का योगदान भी उल्लेखनीय रहा। वित्त वर्ष 2025 में निजी क्षेत्र ने 15,233 करोड़ रुपये और DPSU ने 8,389 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात किया, जबकि वित्त वर्ष 2024 में ये आंकड़े क्रमशः 15,209 करोड़ रुपये और 5,874 करोड़ रुपये थे। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक रक्षा आपूर्ति में एक अहम भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक ले जाने के लक्ष्य पर अग्रसर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह लक्ष्य भारत को एक वैश्विक रक्षा आपूर्ति केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पहले जहां भारत रक्षा उपकरणों के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी आयात पर निर्भर था, वहीं अब आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता दी जा रही है। हाल ही में समाप्त हुए वित्त वर्ष में गोला-बारूद, हथियार, सब-सिस्टम, सिस्टम, पार्ट्स और अन्य रक्षा उपकरणों का निर्यात लगभग 80 देशों को किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रक्षा उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रक्षा उत्पादन विभाग ने निर्यात से जुड़े ऑथोराइजेशन की प्रोसेसिंग को सुगम बनाने के लिए एक समर्पित पोर्टल विकसित किया है। वित्त वर्ष 2024-25 में 1,762 निर्यात ऑथोराइजेशन जारी किए गए, जो पिछले वर्ष के 1,507 की तुलना में 16.92% की वृद्धि को दर्शाता है। इसी अवधि में निर्यातकों की संख्या में भी 17.4% की बढ़ोतरी देखी गई, जो भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताओं का प्रमाण है।
सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक ले जाना है, जिससे भारत न केवल अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करेगा बल्कि वैश्विक रक्षा विनिर्माण हब के रूप में भी स्थापित होगा। वर्तमान में भारत के 65% से अधिक रक्षा उपकरण स्वदेशी रूप से निर्मित हो रहे हैं, जो पहले 65-70% आयात निर्भरता से एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत का रक्षा औद्योगिक आधार लगातार मजबूत हो रहा है, जिसमें 16 रक्षा सार्वजनिक उपक्रम (DPSU), 430 से अधिक लाइसेंस प्राप्त कंपनियां और लगभग 16,000 MSME शामिल हैं। ये सभी भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमताओं को और अधिक सशक्त बना रहे हैं, जिससे देश की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी भारतीय उत्पादों की मजबूत उपस्थिति दर्ज की जा रही है।