बुधवार देर रात लोकसभा में वक़्फ़ बिल पारित होने के बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जो करीब दो घंटे चली। इसके बाद सदन ने इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी। हालांकि, इस अहम बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद नहीं थे, क्योंकि गुरुवार (3 अप्रैल) को वे BIMSTEC शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दो दिवसीय दौरे पर बैंकॉक पहुंचे। वहाँ भारतीय समुदाय ने पीएम मोदी का शानदार स्वागत किया, और उन्होंने थाईलैंड में रामायण पर आधारित ‘रामाकियेन’ नृत्य नाटक का आनंद लिया, जहाँ वे बेहद उत्साहित नजर आए।
लेकिन प्रधानमंत्री की यह यात्रा कांग्रेस को नागवार गुज़री। पार्टी के नेता जयराम रमेश ने तंज कसते हुए ट्वीट किया, “बार-बार उड़ने वाले फिर से उड़ गए। इस बार बैंकॉक के लिए। पूरब की ओर देखो, लेकिन मणिपुर की अनदेखी क्यों जारी रखी जा रही है?” हालांकि, यह वही कांग्रेस है जो मणिपुर पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन से पहले ही वॉकआउट कर गई थी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या कांग्रेस इस दौरे की कूटनीतिक अहमियत को समझती भी है, या यह सिर्फ पीएम मोदी पर निशाना साधने का एक और राजनीतिक हथकंडा है?
बैंकॉक दौरे के असल मायने क्या?
सबसे पहले, कांग्रेस नेता जयराम रमेश का यह ट्वीट देखिए:

“बार-बार उड़ने वाले फिर से उड़ गए। इस बार बैंकॉक के लिए। पूरब की ओर देखो, लेकिन मणिपुर की अनदेखी क्यों जारी रखी जा रही है?
और मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को आज तड़के 2 बजे लोकसभा में क्यों जबरन पारित किया गया, जिससे बहस और चर्चा के लिए केवल एक घंटा मिला, लेकिन गृह मंत्री के झूठ, तोड़-मरोड़ और विकृतियों के लिए पर्याप्त समय रहा? यह घाव पर नमक छिड़कने जैसा है।”
अब सवाल यह है कि कांग्रेस प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को लेकर सवाल उठा रही है, लेकिन क्या वह इस दौरे की कूटनीतिक अहमियत को समझती भी है?
देश को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ घरेलू राजनीति ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंचों पर प्रभावी कूटनीति भी जरूरी होती है। BIMSTEC केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत करने का एक अहम् रणनीतिक कदम है।
दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव ने एशिया में अस्थिरता को जन्म दिया है। चीन लगातार अपनी समुद्री और सैन्य ताकत को बढ़ा रहा है, जिससे बंगाल की खाड़ी एक नया विवादित क्षेत्र बनता जा रहा है। इस चुनौती का सामना करने के लिए BIMSTEC भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
वहीं, अगर क्षेत्रीय संगठनों की बात करें, तो SAARC पहले ही पाकिस्तान की नीतियों की वजह से निष्क्रिय हो चुका है। दूसरी ओर, श्रीलंका चीन के कर्ज़ के बोझ से निकलने की कोशिश कर रहा है, जबकि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार चीन के प्रभाव में दिख रही है। ऐसे हालात में BIMSTEC भारत के लिए दक्षिण एशिया में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने का एक सशक्त मंच है। कांग्रेस इस यात्रा को लेकर सवाल तो उठा रही है, लेकिन क्या उसे सच में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति की समझ है, या यह सिर्फ पीएम मोदी पर निशाना साधने का एक और राजनीतिक हथकंडा है?