TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    बलिदानी हेमू कालानी: एक किशोर क्रांतिकारी के अदम्य साहस और बलिदान की कथा

    बलिदानी हेमू कालानी: एक किशोर क्रांतिकारी के अदम्य साहस और बलिदान की कथा

    वैश्विक ‘जरासंध’ का छल-बल और ‘केशव’ का संघ

    वैश्विक ‘जरासंध’ का छल-बल और ‘केशव’ का संघ

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    BRICS VS G7

    BRICS बनाम G7: क्या दुनिया की आर्थिक ताकत का संतुलन बदल चुका है?

    BRICS 2026 VS 2016

    2016 से 2026 तक BRICS में कितना बदलाव आया? 5 देशों के समूह से 11 देशों की ताकत

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    SU 57 India Russia

    भारत को Su-57 की जरूरत कितनी? क्या रूस का 5th Gen Fighter भर पाएगा AMCA का गैप?

    Exercise Pitch Black 2026 in Australia and Exercise Udara Shakti 2026 in Malaysia

    पिच ब्लैक से उदारा शक्ति तक: इंडो पैसेफिक में भारतीय वायु सेना का दम

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत; जांच में जुटी पुलिस

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    स्त्री भारतीय स्त्री-विमर्श को पश्चिमी प्रतिमानों के अनुकरण से आगे ले जाकर भारतीय ज्ञान परंपरा के भीतर स्त्री की अवधारणा को पुनः देखने का अवसर प्रदान करती है।

    स्त्री: भारतीय स्त्री-विमर्श और नारीत्व की पुनर्परिभाषा

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    Anil Kakodar Uranium, Thorium, Nuclear energy

    दुनिया में बढ़ेगा यूरेनियम संकट, भारत के लिए थोरियम क्यों जरूरी? अनिल काकोदकर का बड़ा बयान

    भारत पाकिस्तान का विभाजन

    15 अगस्त के बाद…80 वर्ष पहले भारत विभाजित होकर स्वतंत्र तो हो गया.. परन्तु अब आगे क्या..?

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    बलिदानी हेमू कालानी: एक किशोर क्रांतिकारी के अदम्य साहस और बलिदान की कथा

    बलिदानी हेमू कालानी: एक किशोर क्रांतिकारी के अदम्य साहस और बलिदान की कथा

    वैश्विक ‘जरासंध’ का छल-बल और ‘केशव’ का संघ

    वैश्विक ‘जरासंध’ का छल-बल और ‘केशव’ का संघ

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    BRICS VS G7

    BRICS बनाम G7: क्या दुनिया की आर्थिक ताकत का संतुलन बदल चुका है?

    BRICS 2026 VS 2016

    2016 से 2026 तक BRICS में कितना बदलाव आया? 5 देशों के समूह से 11 देशों की ताकत

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    SU 57 India Russia

    भारत को Su-57 की जरूरत कितनी? क्या रूस का 5th Gen Fighter भर पाएगा AMCA का गैप?

    Exercise Pitch Black 2026 in Australia and Exercise Udara Shakti 2026 in Malaysia

    पिच ब्लैक से उदारा शक्ति तक: इंडो पैसेफिक में भारतीय वायु सेना का दम

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत; जांच में जुटी पुलिस

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    स्त्री भारतीय स्त्री-विमर्श को पश्चिमी प्रतिमानों के अनुकरण से आगे ले जाकर भारतीय ज्ञान परंपरा के भीतर स्त्री की अवधारणा को पुनः देखने का अवसर प्रदान करती है।

    स्त्री: भारतीय स्त्री-विमर्श और नारीत्व की पुनर्परिभाषा

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    Anil Kakodar Uranium, Thorium, Nuclear energy

    दुनिया में बढ़ेगा यूरेनियम संकट, भारत के लिए थोरियम क्यों जरूरी? अनिल काकोदकर का बड़ा बयान

    भारत पाकिस्तान का विभाजन

    15 अगस्त के बाद…80 वर्ष पहले भारत विभाजित होकर स्वतंत्र तो हो गया.. परन्तु अब आगे क्या..?

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

धन्यवाद, मिस्टर ट्रम्प – ‘कूटनीति’ का ये सबक याद दिलाने के लिए कि स्थायी सिर्फ़ स्वार्थ होता है, और अब भारत वही कर रहा है

अगर तस्वीरें कुछ कह सकतीं, तो तियानजिन में नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुस्कान के साथ हैंडशेक वाली तस्वीर पर कैप्शन होता: “धन्यवाद, मिस्टर ट्रंप – सप्रेम, एशिया

Sambhrant Mishra द्वारा Sambhrant Mishra
31 August 2025
in एशिया पैसिफिक, भू-राजनीति, रणनीति, विश्व, समीक्षा
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग हाथ मिलाते हुए

राष्ट्रपति जिनपिंग ने गर्मजोशी के साथ पीएम मोदी का स्वागत किया

Share on FacebookShare on X

चीन के तियानजिन में जब राष्ट्रपति जिनपिंग,  प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते नज़र आए तो दोनों नेताओं की ये तस्वीरें सिर्फ उनके देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया या यूं कहें कि बदलते वर्ल्डऑर्डर के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण बन गईं। चीन से आई इन तस्वीरों को न्यूयॉर्क टाइम्स की हाल में ही आई रिपोर्ट के आलोक में भी ज़रूर देखना होगा। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत–अमेरिका के बीच जारी तनाव की असली वजह रूसी तेल की ख़रीद नहीं बल्कि पीएम मोदी के द्वारा ट्रम्प को नोबल पुरस्कार के लिए नामित नहीं किया जाना था।

दरअसल इस रिपोर्ट पर भरोसा करने की कई वजहें हैं, खासकर तब जबकि ट्रम्प रूस से कहीं ज्यादा तेल और गैस खरीदने वाले चीन और यूरोपीय देशों के प्रति नरम रूख अपना रहे हैं, वहीं भारत के प्रति उनका व्यवहार शत्रुतापूर्ण न सही तो कटुतापूर्ण तो कहा ही जा सकता है। तो क्या मोदी–जिनपिंग की इन तस्वीरों के लिए हम सबको डोनाल्ड ट्रम्प को भी शुक्रिया बोलना चाहिए, क्योंकि उन्होने भारत–पाकिस्तान के बीच शांति करवाई हो या नहीं, लेकिन कम से कम उनकी वजह से भारत और चीन ज़रूर पास आते दिख रहे हैं।

हिंद–प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे का सामना करने के लिए लिहाज़ से अमेरिका, भारत को एक स्वाभाविक रणनीतिक सहयोगी के तौर पर देखता था। बल्कि दोनों देशों के रिश्ते इसी बुनियाद पर तेजी से आगे भी बढ़ रहे थे।
QUAD से लेकर अमेरिकी कंपनियों के भारत में शिफ्ट होने तक की खबरें इसी तर्ज पर देखी गईं। लेकिन अब जब ड्रैगन और हाथी एक साथ आने और इस क्षेत्र में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जता रहे हैं, तो ‘क्वॉड’ जैसे गठबंधन की प्रासंगकिता ही नहीं, चीन को इस क्षेत्र में घेरने की अमेरिकी रणनीति भी सवालों में है। शायद इसीलिए डोनाल्ड ट्रम्प ने QUAD Summit के लिए भारत आने से भी इनकार कर दिया है।

संबंधितपोस्ट

BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

शी जिनपिंग की कार को दिल्ली में काले कवर से क्यों ढका गया? जानिए Hongqi N701 की पूरी कहानी

पुतिन ने जताया भारत पर भरोसा, मोदी पर पश्चिमी दबाव को किया खारिज; भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का किया समर्थन

और लोड करें

तो क्या ये मान लिया जाए कि मौजूदा world Order के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण और परस्पर भरोसे पर आधारित एक साझेदारी सिर्फ इसलिए पटरी से उतरती दिख रही है, क्योंकि दुनिया के सबसे ताक़तवर शख्स यानी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने पूर्ववर्ती बराक ओबामा की तरह शांति का नोबल पुरस्कार प्राप्त करने के लिए ललायित हैं, फिर चाहे इसकी क़ीमत उन्हें दुनिया के सबसे बड़े जनतंत्र और अपने दोस्त देश के रूप में ही क्यों न चुकानी पड़े?
डोनाल्ड ट्रंप, टैरिफ़ को सबसे ख़ूबसूरत चीज़ बताते हैं, लेकिन लेकिन विडंबना देखिए, उनके ताज़ा टैरिफ ने शायद भारत और चीन को 2020 के गलवान संघर्ष के बाद पहली बार सुलह की दिशा में बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।

कूटनीति में रिश्ते नहीं, सिर्फ हित स्थाई होते हैं

सात साल बाद मोदी का चीन की धरती पर कदम रखना बताता है कि कूटनीति जैसे जटिल संदर्भ में आपसी रिश्ते नहीं सिर्फ हित ही स्थाई होते हैं।ट्रम्प के मौजूदा रुख़ की वजह से चीन और भारत एक बार फिर परस्पर साझेदारी में अपने हित देख रहे हैं। जून 2020 को गलवान में हुई खूनी झड़प, आपसी रिश्तों को बीते कई दशकों में सबसे निचले स्तर पर ले गई थी। उस घटना के बाद न सिर्फ लीडरशिप बल्कि दोनों देशों की जनता में अविश्वास को गहरा कर दिया था। लेकिन 2025 में तियानजिन में ये तस्वीर बदली है। मोदी और जिनपिंग करीब एक घंटे लंबी बैठक में आमने–सामने बैठे तो चर्चा सिर्फ सीधी उड़ानें शुरू करने, या फिर कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने जैसे सामान्य मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि  रणनीतिक तालमेल तक भी हुईं। दोनों नेताओं ने “पारस्परिक विश्वास और संवेदनशीलता” जैसे शब्द इस्तेमाल किए, जो हाल के वर्षों में सीन से गायब थे। जिनपिंग ने दीर्घकालिक दृष्टिकोण की बात की, तो मोदी ने 2.8 अरब लोगों (भारत चीन की आबादी दुनिया की कुल आबादी के एक तिहाई से भी ज्यादा है ) का हवाला देते हुए याद दिलाया कि बेवजह की ‘अना’ अब दोनों के लिए महँगी साबित हो सकती है।

भारत–रूस को अलग करने की जगह भारत–चीन–रूस को साथ तो नहीं ला रहे हैं ट्रम्प ?
यह सिर्फ कूटनीति नहीं है। ये दुनिया के सामने एक उभरते हुए नए वर्ल्ड ऑर्डर की झलक भी है, लेकिन इस कहानी की पटकथा भी दरअसल डोनाल्ड ट्रम्प ने ही लिखी है। भारतीय सामान पर 50% टैरिफ़ लगा कर वो भले ही मोदी और भारत को अप्रासंगिक और कमतर साबित करना चाहते हैं, लेकिन अभी तक इसका उल्टा ही हुआ है।

धीमी आर्थिक गति से जूझ रहे चीन के लिए भी भारत के साथ रिश्ते सुधारने का इससे अच्छा मौक़ा शायद ही मिलता लिहाजा उसने भी मौक़ा भुनाने में देर नहीं लगाई। वैसे भी जब दरवाज़े पर कोई बाहरी मुसीबत आ खड़ी हो तो पड़ोसी से दोस्ती जल्दी हो जाती है। चीन ने भारत के खिलाफ लगे इन टैरिफ का तीखा विरोध किया और अमेरिका को ‘बुली’ बता दिया। चीन ने ये वादा भी किया कि वो इस ट्रेड की दादागीरी में भारत के साथ मज़बूती से खड़ा रहेगा।
जरा सोचिए:  वही चीन जो अक्सर भारत को अपने विस्तारवाद में सबसे बड़ी क्षेत्रीय बाधा के रूप मे देखता है, अब खुद हाथी–ड्रैगन की जुगलबंदी की बात कर रहा है।
इतने यू टर्न और मोड़ तो शायद किसी क्लासिक थ्रिलर–सस्पेंस फिल्म में भी न होते हों, जितने इस वक्त वैश्विक राजनीति में दिख रहे हैं– लेकिन यही तो कूटनीति का सबसे क्लासिक उदाहरण है–

कभी वेस्ट के लिए सिर्फ ‘गपशप क्लब’ रहा SCO अचानक से प्रभावी क्यों दिखने लगा है-  वजह ट्रम्प हैं या वक्त ? 

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का तियानजिन शिखर सम्मेलन इस अनोखी नज़दीकी के लिए परफेक्ट मंच बन गया। पश्चिमी राजधानियों में अक्सर “गपशप क्लब” कहा जाने वाला SCO अचानक से प्रभावी संगठन जैसा लगने लगा है। चीन, रूस, भारत, ईरान, मध्य एशिया – और सऊदी अरब, यूएई, तुर्की जैसे साझेदार देशों के साथ – यह संगठन अब दुनिया की 40% आबादी और ऊर्जा संसाधनों के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
ज़ाहिर है शी जिनपिंग के लिए ये समिट एक सुनहरा मौका है, जहां वो चीन को एक वैकल्पिक विश्व व्यवस्था के ध्रुव के रूप में पेश कर सकते हैं और मोदी– पुतिन के साथ खड़े होकर वो इसे भुना भी कर रहे हैं।

वहीं प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी ट्रम्प को मैसेज देने के लिए इससे अच्छा समय शायद ही मिलता। टैरिफ़ पर जवाबी प्रतिक्रिया देने की जगह उन्होने SEO शिखर सम्मेलन में शामिल होकर प्रतिक्रियावादी नेता की जगह व्यावहारिक और दृढ़ नेता की अपनी छवि और गहरी की है। उन्होने वॉशिंगटन को साफ़ मैसेज दिया है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और सबसे ज्यादा आबादी वाली देश पाकिस्तान की तरह उनकी बिसात का मोहरा नहीं है, जिसे जब मर्जी कहीं भी इस्तेमाल किया जाए।

आने वाले वर्षों में अमेरिका इस तस्वीर को कैसे देखेगा?

जरा सोचिए, वर्षों से अमेरिकी रणनीतिकार भारत को एशिया में चीन का विकल्प मानते आए हैं – एक ऐसा लोकतांत्रिक देश जो कम्युनिस्ट और विस्तारवादी चीन के प्रभाव को न सिर्फ बैलेंस कर सकता है, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर काउंटर भी कर सकता है।
अरबों डॉलर के रक्षा सौदों, “इंडो–पैसिफिक” की विस्तृत चर्चाओं और क्वॉड की बैठकों के कई दौर के बाद अमेरिका को यकीन था कि भारत उसके खेमे में मजबूती से खड़ा है।
लेकिन अब अचानक ही कुछ हफ्तों में सब बदला–बदला दिख रहा है। एक तरफ़ ट्रम्प का इसी साल के अंत में होने वाली क्वॉड समिट के लिए भारत आना रद्द हो चुका है तो वहीं पीएम मोदी चीन में जिनपिंग और पुतिन के साथ मुलाक़ात कर रहे हैं।
ज़ाहिर है वॉशिंगटन इस तस्वीर को आसानी से नहीं पचा सकेगा ।

दशकों से भारत और चीन के नेता “हाथी और ड्रैगन की एक साथ जुगलबंदी” की उपमाएँ देते रहे हैं। हकीकत में यह कदम–ताल भले ही अक्सर देर रात शोर मचाने वाले झगड़ालू पड़ोसियों जैसा ही रहा, लेकिन तियानजिन में, एक बार फिर ये उपमाएँ लौटीं हैं। दोनों पक्षों ने दीर्घकालिक दृष्टिकोण, एशियाई शांति और मल्टीपोलर ऑर्डर की बातें कीं। संवाद की भाषा चाहे कितनी भी औपचारिक रही हो, इनकी प्रतीकात्मकता महत्वपूर्ण है।
क्योंकि सच भी यही है: अगर भारत और चीन कभी अपनी प्रतिद्वंद्विता को संभालना सीख गए (दीर्घकालीन हल भले ही न मिले, सिर्फ प्रबंधन भी कर सके)- तो ये मौजूदा वर्ल्ड ऑर्डर को हिलाने के लिए काफी होगा। तब अमेरिका के पास दोनों एशियाई दिग्गजों को आपस में उलझाए रखने का रास्ता नहीं बचेगा। यही नहीं रूस–भारत–चीन (RIC) के गठजोड़ की जिस संभावना को सालों से भुला दिया गया था, वो फिर से अँगड़ाई लेने लगी है और अगर ये उठ खड़ी होती है– तो यह गठजोड़ वर्ल्ड ऑर्डर को नए सिरे से लिखने की क्षमता रखता है।

वैसे भारत और चीन अब भी प्रतिद्वंद्वी हैं। सीमा से तनाव के बादल पूरी तरह अभी भी छंटे नही हैं। अविश्वास गहरा है, लेकिन हर लंबी यात्रा की शुरुआत पहले कदम से ही होती है – या इस मामले में, तियानजिन में मोदी–जिनपिंग की मुस्कान और ‘हैंडशेक’ से।  देखना होगा कि दोनों के रिश्ते कितने आगे जाते हैं और क्या भारत चीन द्वारा बार–बार दिए गए जख्म भुला सकेगा। लेकिन अगर ऐसा होता है तो आने वाले वक्त में जब भी इस नए घटनाक्रम का जिक्र किया जाएगा तो इतिहासकार यही कहेंगे कि इस नए एशियाई समीकरण की राह न बीजिंग से निकली, न दिल्ली से, बल्कि ये वॉशिंगटन से शुरू हुई – नोबल शांति पुरस्कार के लिए उतावले एक अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ़ आदेशों के साथ।

Tags: #नरेंद्रमोदीअमेरिका चीनएससीओ समिटपुतिनरूसशी जिनपिंग
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

जापान की गोपनीय फाइलें और अधूरा सच: क्या अब खत्म होगा नेताजी सुभाष चंद्र बोस का रहस्य?

अगली पोस्ट

बांग्लादेश: हिंदुओं के लिए नर्क, दुनिया की चुप्पी और भारत की जिम्मेदारी

संबंधित पोस्ट

The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है
विश्व

The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

21 September 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिन पहले को Truth Social पर चांद की तस्वीर के साथ लिखा—“The Moon Is Ours”। तस्वीर में चांद की...

बलिदानी हेमू कालानी: एक किशोर क्रांतिकारी के अदम्य साहस और बलिदान की कथा
समीक्षा

बलिदानी हेमू कालानी: एक किशोर क्रांतिकारी के अदम्य साहस और बलिदान की कथा

18 September 2026

पुस्तक का नाम: कथा रूप: बलिदानी हेमू कालानी लेखक: किशोर कान्त प्रकाशक: सुरुचि प्रकाशन, नई दिल्ली पृष्ठ: 99 मूल्य: 149 प्रिंट भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का...

India China Modi XI Talks BRICS 2026
भू-राजनीति

गलवान के बाद पहली बार आमने-सामने बैठे मोदी-शी, सीमा पर शांति को बताया रिश्तों की नींव, अब आगे क्या ?

12 September 2026

नई दिल्ली के भारत मंडपम में शनिवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई। यह दोनों नेताओं की 2020...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

The Su-57 Question: Is India Taking a Huge Risk by Waiting for AMCA only ? IAF | Stealth fighter

The Su-57 Question: Is India Taking a Huge Risk by Waiting for AMCA only ? IAF | Stealth fighter

00:05:37

Beginning Of Saudi Arabia's End ? A Case Study...

00:16:00

₹2 Crore Film, ₹143 Crore Hit: The ‘Hanuman Ansh’ Box Office Shock

00:02:46

Who Is Major Rishabh Sambhyal? The Army Officer Who Became a Social Media Sensation

00:03:34

The Missing 54: What Happened to India’s Soldiers After the 1965 & 1971 Wars | POW | Indo-Pak

00:04:43
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited