भारतीय क्रिकेट के दो उभरते सितारे, यशस्वी जायसवाल और शेफाली वर्मा, इस समय एक अनचाहे विवाद में फंस गए हैं। नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) ने इन दोनों युवा खिलाड़ियों को ‘मिस्ड टेस्ट’ (Missed Test) के लिए नोटिस जारी किया है। यह नोटिस तब दिया गया जब ये खिलाड़ी डोप टेस्ट के लिए अपने दिए गए निर्धारित स्थान पर मौजूद नहीं पाए गए। इस खबर ने क्रिकेट गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि डोपिंग नियमों की अनदेखी किसी भी एथलीट के करियर के लिए घातक साबित हो सकती है।
क्या है पूरा मामला? क्यों मिला नोटिस?
नाडा (NADA) के नियमों के अनुसार, जो खिलाड़ी ‘रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल’ (RTP) का हिस्सा होते हैं, उन्हें अपनी ‘लोकेशन’ या ‘वेयरअबाउट्स’ (Whereabouts) की जानकारी पहले से देनी होती है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि एजेंसी बिना किसी पूर्व सूचना के खिलाड़ियों का रैंडम डोप टेस्ट कर सके।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यशस्वी जायसवाल पिछले साल 17 दिसंबर को और शेफाली वर्मा 7 नवंबर को अपने बताए गए स्थान पर नहीं मिले थे। जब नाडा की टीम टेस्ट के लिए पहुँची, तो खिलाड़ी वहां मौजूद नहीं थे। फरवरी में इस संबंध में उनसे जवाब मांगा गया था, लेकिन संतोषजनक जवाब या प्रतिक्रिया न मिलने के कारण इसे उनका ‘पहला मिस्ड टेस्ट’ मान लिया गया है।
क्या खिलाड़ियों पर लग सकता है बैन?
क्रिकेट प्रेमियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यशस्वी और शेफाली पर प्रतिबंध लगेगा? नाडा के नियमों के तहत:
एक बार की गलती: यदि कोई खिलाड़ी पहली बार टेस्ट मिस करता है, तो उस पर तत्काल कोई बैन नहीं लगाया जाता, लेकिन इसे एक आधिकारिक चेतावनी माना जाता है।
तीन बार की गलती: अगर कोई खिलाड़ी 12 महीने के भीतर तीन बार टेस्ट मिस करता है या अपनी लोकेशन की जानकारी देने में विफल रहता है, तो इसे डोपिंग रोधी नियम का उल्लंघन माना जाता है। ऐसी स्थिति में खिलाड़ी पर 2 साल तक का प्रतिबंध लग सकता है। वर्तमान में, यह इन दोनों खिलाड़ियों का पहला नोटिस है, इसलिए फिलहाल उनके खेलने पर कोई खतरा नहीं है, लेकिन भविष्य में उन्हें अत्यधिक सावधान रहना होगा।
बीसीसीआई (BCCI) को किया गया सूचित
इस पूरे घटनाक्रम के बारे में नाडा ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को भी आधिकारिक तौर पर सूचित कर दिया है। यशस्वी जायसवाल फिलहाल आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं शेफाली वर्मा 12 जून से शुरू होने वाले महिला टी20 वर्ल्ड कप की तैयारी में जुटी हैं। ऐसे महत्वपूर्ण समय पर नोटिस मिलना खिलाड़ियों के मानसिक दबाव को बढ़ा सकता है। दोनों खिलाड़ियों को अब अपनी सफाई देने का एक मौका दिया गया है।
पृथ्वी शॉ के पुराने मामले की यादें हुई ताजा
यह घटना 2019 के उस मामले की याद दिलाती है जब भारतीय बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को डोपिंग के कारण 8 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, शॉ का मामला अलग था; उन्होंने अनजाने में खांसी की दवाई (Cough Syrup) पी ली थी, जिसमें प्रतिबंधित पदार्थ ‘टेरबुटालिन’ मौजूद था। यशस्वी और शेफाली का मामला ‘सेवन’ का नहीं बल्कि ‘उपलब्धता’ (Availability) का है। फिर भी, यह दर्शाता है कि नाडा अब क्रिकेटरों पर भी उतनी ही पैनी नजर रख रहा है जितनी अन्य खेलों के एथलीटों पर।
नाडा के सख्त नियम और खिलाड़ियों की जिम्मेदारी
एक प्रोफेशनल एथलीट के रूप में, खिलाड़ियों की यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी होती है कि वे डोपिंग रोधी नियमों का पालन करें। नाडा और वाडा (WADA) के कड़े प्रावधानों का उद्देश्य खेल को स्वच्छ और पारदर्शी बनाना है। क्रिकेट के वैश्विक होते स्वरूप और ओलंपिक में शामिल होने की चर्चाओं के बीच, भारतीय क्रिकेटरों को इन प्रक्रियाओं को और अधिक गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।
फिलहाल, यशस्वी जायसवाल और शेफाली वर्मा के लिए घबराने की बात नहीं है क्योंकि यह केवल पहला नोटिस है। हालांकि, यह उनके लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ की तरह है। आईपीएल और वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट्स के बीच, इन खिलाड़ियों को अपने खेल के साथ-साथ इन तकनीकी और अनुशासनात्मक पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा ताकि उनके शानदार करियर पर कोई आंच न आए।































