मत

वामपंथी इतिहासकार इरफ़ान हबीब का बाबा साहेब अंबेडकर पर वार: ‘राष्ट्रवाद नहीं, ब्रिटिश हुकूमत का समर्थन किया’

भारत के जटिल राजनीतिक परिदृश्य में डॉ. भीमराव अंबेडकर दलितों के लिए एक प्रमुख व्यक्ति राष्ट्र के लिए एक संवैधानिक निर्माता और दलित...

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस: ट्रम्प टैरिफ़ के बीच युवाओं पर क्यों हैं देश की नजर ?

राष्ट्र के भविष्य की हर सुबह, किसी युवा के आत्मविश्वास से ही जन्म लेती है। हर वह युवा, जो अपनी आँखों में सपना...

15 अगस्त को धर्म के कारण मारे गए हिंदुओं का ‘श्राद्ध संकल्प’ लेना क्यों आवश्यक है?

“महावतार नरसिंह” फिल्म धूम मचाती जा रही है । भक्त प्रहलाद की अटल भक्ति के पीछे आखिर क्या था? विचार करेंगे तो ध्यान...

यात्राएं जो बनीं बदलाव का रास्ता: बीजेपी के उदय और राष्ट्रवाद के पुनर्जागरण की कहानी

स्वतंत्रता के बाद से देश में कई आंदोलन हुए। इसी कड़ी में तीन ऐसी यात्राएं हैं, जिन्होंने देश की तस्वीर तो बदली ही,...

युवाओं के परिप्रेक्ष्य में ‘अनुच्छेद 370’ का निरस्तीकरण: तर्क, आवश्यकता और इतिहास

आज 5 अगस्त है और 5 अगस्त भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखी जाने वाली तिथि है। ऐसा इसलिए क्योंकि 5...

मालेगांव ब्लास्ट मामले के निर्णय से सिद्ध हुआ “न हिंदू पतितो भवेत्”

17 वर्ष की प्रतीक्षा, 6200 से अधिक दिन और 1 अनकहा नैरेटिव—जिसे सत्ता, मीडिया और राजनीति ने मिलकर गढ़ा था। मालेगांव विस्फोट मामले...

“एक विचारधारा, दो पीढ़ियां: मोदी के बाद भाजपा की उम्मीद तेजस्वी सूर्या”

जैसे-जैसे संसद का मानसून सत्र आगे बढ़ रहा है और राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो रही हैं, बेंगलुरु दक्षिण से सांसद और भारतीय जनता...

“गांधी परिवार की प्राथमिकताएं सवालों के घेरे में, गाजा पर आवाज़, हिंदुओं पर चुप्पी?”

मानवीय वकालत के क्षेत्र में, निरंतरता न केवल नैतिक विश्वसनीयता के लिए, बल्कि लोकतांत्रिक संदर्भ में नेतृत्व की वैधता के लिए भी मायने...

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