“भारत आज से नहीं, युगों-युगों से है”, यह वाक्य केवल एक भाव नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक चेतना का प्रतीक है, जो भारत को...
भारत के जटिल राजनीतिक परिदृश्य में डॉ. भीमराव अंबेडकर दलितों के लिए एक प्रमुख व्यक्ति राष्ट्र के लिए एक संवैधानिक निर्माता और दलित...
राष्ट्र के भविष्य की हर सुबह, किसी युवा के आत्मविश्वास से ही जन्म लेती है। हर वह युवा, जो अपनी आँखों में सपना...
“महावतार नरसिंह” फिल्म धूम मचाती जा रही है । भक्त प्रहलाद की अटल भक्ति के पीछे आखिर क्या था? विचार करेंगे तो ध्यान...
आज घटित हुई एक छोटी सी घटना इस लेख का कारण बनी। कई दिनों की लंबी यात्रा के बाद पिछले कल गाज़ियाबाद पहुंचा...
अगले कल अर्थात शनिवार 9 अगस्त को 'विश्व मूलनिवासी दिवस', विश्व के कुछ हिस्सों मे मनाया जाएगा। वामपंथियों ने, 'फॉल्ट लाईन चौडी करने'...
स्वतंत्रता के बाद से देश में कई आंदोलन हुए। इसी कड़ी में तीन ऐसी यात्राएं हैं, जिन्होंने देश की तस्वीर तो बदली ही,...
आज 5 अगस्त है और 5 अगस्त भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखी जाने वाली तिथि है। ऐसा इसलिए क्योंकि 5...
17 वर्ष की प्रतीक्षा, 6200 से अधिक दिन और 1 अनकहा नैरेटिव—जिसे सत्ता, मीडिया और राजनीति ने मिलकर गढ़ा था। मालेगांव विस्फोट मामले...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपना शताब्दी वर्ष मनाने जा रहा है। निश्चित है चर्चा तो होगी ही। ऐसे में एक प्रश्न उठता है कि...
जैसे-जैसे संसद का मानसून सत्र आगे बढ़ रहा है और राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो रही हैं, बेंगलुरु दक्षिण से सांसद और भारतीय जनता...
मानवीय वकालत के क्षेत्र में, निरंतरता न केवल नैतिक विश्वसनीयता के लिए, बल्कि लोकतांत्रिक संदर्भ में नेतृत्व की वैधता के लिए भी मायने...
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