मत

भले ही धरती फट जाए, आसमान नीचे गिर पड़े लेकिन ‘शहजादे’ के विरुद्ध कोई कुछ नहीं बोल सकता

देश बर्बाद हो जाए हम कुछ नहीं बोलेंगे. लोग एक दूसरे का खून कर दे हम चुप बैठेंगे. आंधी, तूफ़ान, बाढ़ कुछ भी...

कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को दिखाती फिल्म को ‘अश्लील’ बताने वाले के नाम एक चिट्ठी

प्रिय नदव लापिड उम्मीद करता हूं कि आप इज़रायल में चैन से रह रहे होंगे। आप कुछ दिन पहले ही तो हमारे देश में...

केजरीवाल ‘फ्री पॉलिटिक्स’ के लिए प्रसिद्ध हैं लेकिन योगी ने तो आतंक के मुद्दे पर धागा खोल दिया

गुजरात विधानसभा चुनाव और दिल्ली में नगर निगम के चुनाव को लेकर सियासी पारा चढा हुआ है। राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर जुबानी...

सोशल मीडिया पर आश्रित हो चुके इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को ट्रेंडिंग के पीछे भागना बंद करना चाहिए

मीडिया को देश का चौथा स्तम्भ कहा जाता है, मीडिया देश की विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के क्रियाकलापों पर नजर रखता है। इसके...

वीर दास के “दो भारत” और “आर्यन आक्रमण सिद्धांत”, बस यहीं तक सीमित है राहुल गांधी की राजनीति

अगर रेडियो पर एक ही गाना बार-बार बजता है तो उसे सुनकर किसी का भी मन ऊब जाता है। ऐसे ही कुछ विचार...

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