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“ब्राह्मणों भारत छोड़ो, यहां ख़ून बहेगा” JNU में हदें पार, तुरंत हो कार्रवाई नहीं तो..

JNU में सवर्णों को बेहद खतरनाक मंसूबों के साथ भयावह चेतावनी दी गई है। विश्वविद्यालय की दीवारों को वामपंथियों ने सवर्ण विरोधी नारों से पोत दिया हैं।

Yogesh Sharma द्वारा Yogesh Sharma
2 December 2022
in चर्चित, मत
Anti Brahmin slogans on JNU walls

SOURCE TFI

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Anti Brahmin slogans on JNU walls: भारत तेरे टुकड़े होगें, अफजल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल अभी जिंदा हैं, ऐसे नारों से अपनी एक अलग पहचान बनाने वाला JNU यानी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय देश का एक अग्रणी शिक्षण संस्थान है। लेकिन यह एक ऐसी संस्थान है जो शिक्षा के लिए कम और विवादों के लिए अधिक चर्चा में रहता है। इसे वामपंथियों और इस्लामिस्टों का गढ़ कहा जाए तो कतई गलत नहीं होगा। JNU पर हिंदू विरोधी और देश विरोधी होने के आरोप आए दिन लगते रहते हैं सो अलग। लेकिन अब इस संस्थान के सवर्ण विरोधी होने की बात भी सामने आई है। जिससे JNU में डर का माहौल है।

इस लेख में जानेंगे कि कैसे इस विश्वविद्यालय में सवर्णों की सुरक्षा पर भी प्रश्न उठने लगा है।

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Anti Brahmin slogans on JNU walls – भयावह चेतावनी

दरअसल, JNU में सवर्णों को बेहद खतरनाक मंसूबों के साथ भयावह चेतावनी दी गई है। विश्वविद्यालय की दीवारों को वामपंथियों ने सवर्ण विरोधी नारों से पोत दी हैं। JNU से सवर्ण विरोधी एंजेडे को हवा देने की कोशिश की गई है। विश्वविद्यालय की दीवारों पर ‘ब्राह्मणों-बनियाओं…हम आ रहे हैं बदला लेने’, ‘यहां खून बहेगा’, ‘ब्राह्मणों कैंपस छोड़ो’ और तुम्हें बख्शा नहीं जाएगा’ जैसे नारे, जहरीले नारे लिखे गए हैं। साथ ही JNU की महिला प्रोफेसर वंदना मिश्रा के ऑफिस के दरवाजे पर वामपंथियों ने ‘शाखा लौट जाओ’ का नारा लिखा है। ध्यान देना होगा कि वंदना मिश्रा को वामपंथियों ने वर्ष 2019 में तीन दिन तक बंधक बनाया था।

इन नारों और घटनाओं के बाद फिर से यह विश्वविद्यालय विवादों में आ गया है। अब यदि इस विश्वविद्यालय द्वारा फैलाए जा रहे ऐसे विष का प्रभाव अन्य शिक्षण संस्थानों पर भी देखने को मिल जाए तो आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि JNU की गिनती देश के अग्रणी शिक्षण संस्थानों में होती है और यह विश्वविद्यालय देश की राजधानी दिल्ली में स्थित है। भारत विरोधी और हिंदू विरोधी होने का तमगा लेकर घूमने वाला JNU अब अपने सवर्ण विरोधी एंजेडे को हवा दे रहा है। आतंकी अफजल गुरु की मौत का मातम मनाने वाले JNU में आज सवर्णों का खून बहाने की धमकी दी जा रही है। जय भीम नारे का इस्तेमाल वामपंथियों के द्वारा सवर्णों के खिलाफ जहर उगलने में किया जा रहा है।

इस विश्वविद्यालय में विचरण करने वाले, कुत्सित भाव से भरे वामपंथी एक जाति विशेष के विरुद्ध जहरीली बातें लिखकर विश्वविद्यालय की दीवारों को पोत रहे हैं। सवर्ण विरोधी बातों से पुती JNU की दीवारों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

और पढ़ें- ‘गंगा ढाबा’ अब नहीं बनेगा अड्डा, JNU के ‘वामपंथी मुफ्तखोरों’ के सीधे पेट पर लात पड़ी है

वामपंथी छात्रों पर आरोप

वहीं JNU में हुई ऐसी गतिविधियों का आरोप वामपंथी छात्रों पर लग रहा है। अब सवाल विश्वविद्यालय में पढ़ रहे सवर्ण छात्रों की सुरक्षा का है क्योंकि इस बार धर्म, विचारों और व्यक्ति विशेष को पीठे छोड़ते हुए सीधे-सीधे एक विशेष वर्ग को निशाने पर लिया गया है। इस मामले के सामने आने के बाद JNU के वीसी ने कहा है कि दोबारा ऐसी किसी घटना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, JNU प्रशासन की ओर से इस घटना की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। घटना के तूल पकड़ने के बाद JNU की कुलपति ने स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के डीन और शिकायत कमेटी को जल्द से जल्द पूछताछ करने और वाइस चांसलर को एक रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा है।

वहीं इस घटना के सामने आने के बाद सियासत भी तेज हो गई है, विश्वविद्यालय की वायरल हो रही तस्वीरों पर लोगों की तीखीं प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस पूरे मामले पर हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने घोर आपत्ति जताते हुए कहा है कि JNU की दीवारों पर ब्राह्मण और बनिया विरोधी नारे (Anti Brahmin slogans on JNU walls) बहुत ही घातक है। नारे लिखने वाले ने देश की संस्कृति पर प्रहार किया है।

और पढ़ें- भारत तेरे टुकड़े होंगे पर मौन, भारत माता की जय पर आतंक फैल रहा, मनमोहन का असली चेहरा

पलायन करने की धमकी

JNU ने हमारे देश को कई ऐसी हस्तियां दी हैं जिन्होंने देश समेत विदेश में भी भारत का नाम रोशन किया है और कुछ ऐसे वामपंथी भी दिए हैं जिन पर देश के विरुद्ध जहर उगलने के आरोप लगे हैं। लेकिन इसी JNU में सवर्ण विरोधी जहर इतना फैल गया है कि आज यहां सवर्णों से बदला लेने और उनका खून बहाने जैसी बातें की जा रही हैं, उन्हें पलायन करने की धमकी तक दी जा रही है। अब तक यहां हिंदू विरोधी और देश विरोधी बातें होती आ रही थीं लेकिन अब यहां सवर्णों के प्रति जहर उगला जा रहा है। जिस कारण विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले सवर्ण छात्र खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। इस तरह की बातें दीवारों पर लिखने वालों को छात्र की संज्ञा देना सही नहीं होगा। इस तरह की सोच रखने वालों पर सख्त से सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

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