ये सब लम्बे समय से होता आ रहा है, इसलिए आज ऐसी अखबारों की ख़बरों के आधार पर रिपोर्ट बनाकर कहा जा सकता है कि सवर्ण भारत में दलितों पर अत्याचारों के दोषी हैं। सच्चाई का इससे कोई लेना देना नहीं। वर्षों में अपनी सम्पादकीय नीति के कारण बढ़ रहे इस छद्म नैरेटिव पर समाचार पत्रों का ध्यान न गया हो, ऐसा नही हो सकता।
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    पीएम मोदी बोले– विध्वंस नहीं, यह भारत की आत्मा का पुनर्जागरण

    सोमनाथ 1000 वर्ष: मोदी ने कहा– आस्था को नष्ट नहीं किया जा सकता

    बांग्लादेश में खोकोन चंद्र दास की निर्मम हत्या

    असहिष्णुता की हिंसा: बांग्लादेश में खोकोन चंद्र दास की निर्मम हत्या

    भारत के मौलिक अधिकारों की जड़ें

    मौलिक अधिकार: पश्चिमी नहीं, भारतीय ज्ञान परंपरा की देन

    राजनीतिक संकट और हिंसा के बीच बांग्लादेश की सड़कें तनावपूर्ण

    1971 कोई विकल्प नहीं: राष्ट्र की स्थापना की स्मृति और इतिहास के कमजोर पड़ने का खतरा

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है

    वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

    डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस एयरोस्पेस का महानिदेशक नियुक्त किया था

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के DG & CEO की नियुक्ति रद्द,  ट्रिब्यूनल ने DRDO की चयन प्रक्रिया को बताया मनमाना

    16 दिसंबर को पाकिस्तान के पूर्वी मोर्चे के कमांडर जनरल ए के नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर किया था

    ढाका सरेंडर: जब पाकिस्तान ने अपने लोगों की अनदेखी की और अपने देश का आधा हिस्सा गंवा दिया

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है

    वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

    अमेरिका में कानून का राज कमजोर पड़ रहा

    क्या अमेरिका में कानून का राज कमजोर पड़ रहा है? मिनियापोलिस ICE गोलीबारी से उठते सवाल

    लश्कर शिविर में दिखा हमास का नाजी ज़हीर

    पाकिस्तान में आतंकी नेटवर्क का खुलासा: लश्कर शिविर में दिखा हमास का नाजी ज़हीर

    ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है

    वेनेज़ुएला जैसा प्रयोग ईरान में? अमेरिका की रणनीति पर सवाल

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    पीएम मोदी बोले– विध्वंस नहीं, यह भारत की आत्मा का पुनर्जागरण

    सोमनाथ 1000 वर्ष: मोदी ने कहा– आस्था को नष्ट नहीं किया जा सकता

    बांग्लादेश में खोकोन चंद्र दास की निर्मम हत्या

    असहिष्णुता की हिंसा: बांग्लादेश में खोकोन चंद्र दास की निर्मम हत्या

    भारत के मौलिक अधिकारों की जड़ें

    मौलिक अधिकार: पश्चिमी नहीं, भारतीय ज्ञान परंपरा की देन

    राजनीतिक संकट और हिंसा के बीच बांग्लादेश की सड़कें तनावपूर्ण

    1971 कोई विकल्प नहीं: राष्ट्र की स्थापना की स्मृति और इतिहास के कमजोर पड़ने का खतरा

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है

    वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

    डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस एयरोस्पेस का महानिदेशक नियुक्त किया था

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के DG & CEO की नियुक्ति रद्द,  ट्रिब्यूनल ने DRDO की चयन प्रक्रिया को बताया मनमाना

    16 दिसंबर को पाकिस्तान के पूर्वी मोर्चे के कमांडर जनरल ए के नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर किया था

    ढाका सरेंडर: जब पाकिस्तान ने अपने लोगों की अनदेखी की और अपने देश का आधा हिस्सा गंवा दिया

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है

    वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

    अमेरिका में कानून का राज कमजोर पड़ रहा

    क्या अमेरिका में कानून का राज कमजोर पड़ रहा है? मिनियापोलिस ICE गोलीबारी से उठते सवाल

    लश्कर शिविर में दिखा हमास का नाजी ज़हीर

    पाकिस्तान में आतंकी नेटवर्क का खुलासा: लश्कर शिविर में दिखा हमास का नाजी ज़हीर

    ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है

    वेनेज़ुएला जैसा प्रयोग ईरान में? अमेरिका की रणनीति पर सवाल

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

‘दलित उत्पीड़न’ की कहानी गढ़ने में एडिटोरियल पॉलिसी भूलती मीडिया, पहले ही घोषित कर देते हैं विलेन कौन

अकारण ही 'जनरल कास्ट' या सोशल मीडिया की भाषा में 'सवर्ण' या 'ब्राह्मणवाद' को कोसने का भरपूर अवसर मिल जाता है। जबकि जमीनी सच्चाई बिलकुल अलग होती है।

Anand Kumar द्वारा Anand Kumar
15 November 2024
in क्राइम
दलित, मीडिया

अधिकतर बार दलितों पर अत्याचार करने वाले सामान्य वर्ग के नहीं होते, फिर भी उन्हें ही विलेन बनाती है मीडिया (प्रतीकात्मक चित्र)

Share on FacebookShare on X

हाल के समय में भारत के सोशल मीडिया (विशेषकर हिंदी एक्स पर) पर दो घटनाएँ विशेष रूप से चर्चा में रहीं। पहली घटना थी जिसमें वाल्मीकि समुदाय का एक व्यक्ति अपनी पुत्री की शादी के लिए मैरिज हॉल तय करने गया। सोशल मीडिया पर प्रचारित किया गया कि पूरी बातचीत के बाद जब उसकी जाति का पता चला तो मैरिज हॉल वालों ने मैरिज हॉल किराये पर देने से मना कर दिया। इस दौर में चूँकि भाजपा का “बंटोगे तो कटोगे” का नारा खासा चर्चा में है, इसलिए जातिवादियों को बदायूँ (उत्तर प्रदेश) में हुई इस घटना को भुनाने का मौका मिल गया। मामले में शिकायतकर्ता की जब जांच हुई तो पाया गया कि शिकायत सही नहीं थी।

संबंधितपोस्ट

यूपी की दलित लड़की को आतंकी बनाना चाहते थे कट्टरपंथी, केरल ले जाकर दी जिहाद की ट्रेनिंग; फिर ऐसे बची जान

‘हिन्दू ‘ह*मी’ होते हैं…तुम्हें जान से मारेंगे देखते हैं राम, बुद्ध या आम्बेडकर में से कौन बचाता है’: दलित युवक पर सद्दाम, इमरान, जीशान, इदरीश ने किया जानलेवा हमला

जयंती विशेष: कभी आपतकाल के समर्थक रहे जगजीवन राम को कैसे हुआ इंदिरा से बैर?

और लोड करें

इनके बीच जो समय लगा, वो अफवाहबाजों के लिए पर्याप्त था। वो मामले को ले उड़े, यानी सच जबतक जूते पहनता, झूठ आधी दुनिया का चक्कर लगा चुका था।

इस मामले में अगर दोषी माना जाए तो केवल अफवाहबाज जातिवादी ही दोषी नही थे। ऐसी खबरें जब मीडिया में आती हैं, तो इनको दर्शाने का भारतीय मीडिया का एक विशेष तरीका भी दोषी है। ऐसे मामलों में हमेशा पीड़ित पक्ष को दलित बताकर उसकी जाति तो निश्चित कर दी जाती है, मगर आरोपितों को ‘ऊँची जातियाँ’ बताकर छोड़ दिया जाता है। इसके कारण राजनैतिक रोटियां सेंकने वालों को ‘ठाकुर का कुआँ’ जैसी कविताएँ सुनाने का मौका मिलता है।

अकारण ही ‘जनरल कास्ट’ या सोशल मीडिया की भाषा में ‘सवर्ण’ या ‘ब्राह्मणवाद’ को कोसने का भरपूर अवसर मिल जाता है। जबकि जमीनी सच्चाई बिलकुल अलग होती है। हाल ही में आरक्षण के वर्गीकरण सम्बन्धी जो फैसला सर्वोच्च न्यायालय ने दिया, उस मामले में पेश सर्वेक्षणों के मुताबिक करीब 80 प्रतिशत मामलों में एससी/एसटी एक्ट का आरोपी ओबीसी समुदाय का होता है।

अक्टूबर 2024 में झाँसी से एक ऐसा ही मामला प्रचारित प्रसारित क्या जा रहा था जिसमें एक दलित मजदूर का जबरन सर मूंड दिया गया, ऐसा बताया गया। पुलिस जांच में इस मामले में भी पता चला कि आरोपित भी सभी उसी समुदाय के थे जिसका पीड़ित था। गौरतलब है कि केवल आम आदमी जिसके पास किसी खबर की जांच के लिए संसाधन नहीं हैं, वो ऎसी भ्रामक खबरों के झांसे में नहीं आता। कई बड़े नेता भी ऐसी भ्रामक खबरों को प्रचारित-प्रसारित करते रहे हैं, जिससे समाज में ‘जनरल कास्ट’ यानी सवर्णों के विरुद्ध विद्वेष भड़के। फिर पुलिस बार-बार ऐसे मामलों में सफाई देती हुई पाई जाती है। भ्रामक खबरों की इस WhatsApp यूनिवर्सिटी से तथाकथित प्रगतिशील जमातें बुरी तरह पीड़ित हैं। ऐसी खबरें फैलाने के बाद उन्होंने कभी अपनी गलती स्वीकारी हो या लोगों को बरगलाने के लिए क्षमा मांगी हो, ऐसा कोई मामला याद नहीं आता।

ऐसा माना जाता है कि अखबारों और मीडिया चैनल्स के पास एक सम्पादकीय नीति (एडिटोरियल पालिसी) होती है, जिसके अनुसार खबरों में प्रयुक्त भाषा, मौजूदा कानूनों इत्यादि का पालन, सुनिश्चित होता है। अगर ऐसी कोई सम्पादकीय नीति होती है तो या तो उसका प्रयोग नहीं हो रहा, केवल सजावट की वस्तु की तरह रख दी गयी है, या फिर समय और तकनीकों में बदलाव के साथ इस नीति को उत्क्रमित (अपडेट) नही किया गया। और क्या वजह हो सकती ही कि पीड़ित पक्ष की जाति तो पता चल जाए, लेकिन आरोपितों का धर्म, उनकी जाति पता ही न चले? उसे केवल ‘अगड़ी जातियाँ’ लिखकर काम क्यों चलाना पड़ेगा? जमीनी स्तर से खबरें जुटाने वाला संवाददाता इतना आलसी तो नहीं होता कि थाने की रिपोर्ट में उसे आरोपी की जाति/धर्म न दिखे, केवल पीड़ित की नजर आये।

बदायूं के मैरिज हॉल में जैसे मैरिज हॉल के नाम में ही इकबाल, सबा आदि पर चुप्पी साधकर ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ पर निशाना साधा गया, वैसा ही दूसरा मामला कर्नाटक के मंड्या में दिखाई दिया। इस मामले में मंदिर में दलितों के प्रवेश को लेकर खींचतान हुई थी। गाँव वोक्कालिगा समुदाय बहुल है जो कि ओबीसी श्रेणी में आता है। वोक्कालिगा समुदाय के लोग दलितों के मंदिर में प्रवेश के विरुद्ध थे और वो मंदिर से मूर्ति ही उठा ले गए। केवल हिंदी ही नहीं, अंग्रेजी समाचार पत्रों ने भी हर बार की तरह इस मामले में आरोपितों की जातीय श्रेणी छुपा ली और केवल ‘अगड़ी जातियां’ लिखकर छोड़ दिया जैसे ब्राह्मणवाद या सवर्ण दलितों को मंदिर में प्रवेश न देने के दोषी हों।

ये सब लम्बे समय से होता आ रहा है, इसलिए आज ऐसी अखबारों की ख़बरों के आधार पर रिपोर्ट बनाकर कहा जा सकता है कि सवर्ण भारत में दलितों पर अत्याचारों के दोषी हैं। सच्चाई का इससे कोई लेना देना नहीं। वर्षों में अपनी सम्पादकीय नीति के कारण बढ़ रहे इस छद्म नैरेटिव पर समाचार पत्रों का ध्यान न गया हो, ऐसा नही हो सकता। अगर ध्यान नहीं गया तो संपादकों के शैक्षणिक और बौद्धिक स्तर पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लग जायेगा। ध्यान देने के बाद भी अगर सम्पादकीय नीति बदली नहीं गयी, सुधारी नहीं गयी तो संभवतः इसमें आलस्य कारण होगा। जान बूझकर गोएबेल्स की तरह कोई एजेंडा, मीडिया के जरिये चला रहे होंगे, ऐसा तो हुआ नही होगा। दूसरा कारण ये हो सकता ही कि सम्पादकीय नीति केवल नाम मात्र के लिए बनती है और फिर सजाकर रख दी जाती है। उसका उपयोग नहीं होता, कहीं तहखाने में खो गई है।

अगर ऐसी स्थिति है तो मीडिया को अपनी सम्पादकीय नीति को बदलते समय के हिसाब से दुरुस्त करने की जरुरत है। सोशल मीडिया के दौर में जहाँ मीडिया में भी काफी हद तक लोकतंत्र आ गया है, वहाँ जनता जो कि मालिक है, वो चौथे खम्भे की तानाशाही ज्यादा समय टिकने तो नहीं देगी!

स्रोत: दलित उत्पीड़न, Dalit Oppression, Media, मीडिया, सवर्ण, General Caste, SC/ST, एससी-एसटी
Tags: DalitEditorial Policyदलितसंपादकीय नीति
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

‘महाराष्ट्र के मुखिया’: कभी ढाबों का बचा खाना खाने को थे मजबूर, फिर बने महाराष्ट्र के पहले दलित CM; कहानी सुशील शिंदे की

अगली पोस्ट

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का ‘जनजातीय गौरव दिवस’ और बिरसा मुंडा के 150वें जयंती वर्ष पर संदेश

संबंधित पोस्ट

sajid akram
क्राइम

सिडनी हमलावर साजिद अकरम का इंडिया लिंक, तेलंगाना पुलिस ने किया खुलासा

18 December 2025

सिडनी के बॉन्डी बीच पर हुई घटना ने सबका दिल दहला दिया है ,इस घटना के आरोपी का भारतीय पासपोर्ट वाले कनेक्शन पर तेलंगाना पुलिस...

shamli murder
क्राइम

बुर्का न पहनने पर पति बना हैवान, पत्नी और दो मासूम बेटियों की हत्या कर शव गड्ढे में दबाए

18 December 2025

उत्तर प्रदेश के शामली से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक शख्स ने बुर्का न पहनने की वजह से अपनी...

बाबरी विध्वंस
क्राइम

6 दिसंबर के दिन राजधानी को दहलाने की थी तैयारी, पहले हो गया धमाका! ‘बाबरी विध्वंस’ के दिन 6 बड़े हमलों की तैयारी में थे आतंकी

13 November 2025

जांच एजेंसियों के मुताबिक, 6 दिसंबर को दिल्ली-NCR में छह धमाके करने की साजिश रची गई थी। यह वही दिन है जब अयोध्या में विवादित...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Trump makes false apache deal claims, runs down India US relations

Trump makes false apache deal claims, runs down India US relations

00:05:44

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

00:00:58

A War Won From Above: The Air Campaign That Changed South Asia Forever

00:07:37

‘Mad Dog’ The EX CIA Who Took Down Pakistan’s A.Q. Khan Nuclear Mafia Reveals Shocking Details

00:06:59

Dhurandar: When a Film’s Reality Shakes the Left’s Comfortable Myths

00:06:56
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited