भारत में एकबार फिर समुद्री सुरक्षा पर संकट मंडराता नजर आ रहा है, यहीं संकट ठीक 18 साल बाद सामने आता नजर आ रहा है, जब 2008 में मुंबई में 26/11 के आतंकवादी हमले हुए थे। उस समय लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के 10 आतंकवादी अरब सागर के रास्ते नाव से मुंबई पहुंचे थे और शहर के कई स्थानों पर एक साथ हमले किए थे।
इन हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। यह घटना आज भी देश की यादों में एक गहरा घाव छोड़ गई है। हमले के बाद 9 आतंकवादियों को मार दिया गया, जबकि अजमल कसाब नाम का एक आतंकवादी जिंदा पकड़ा गया। बाद में उस पर मुकदमा चला, उसे दोषी ठहराया गया और उसे फांसी दे दी गई।
अब नई खुफिया रिपोर्टों से पता चला है कि लश्कर-ए-तैयबा फिर से समुद्र के रास्ते हमले की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि संगठन नए युवाओं को पानी के रास्ते होने वाले हमलों के लिए प्रशिक्षण दे रहा है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की चिंता है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न सिर्फ मौजूद हैं, बल्कि उन्हें काफी आत्मविश्वास के साथ चलाया भी जा रहा है।
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में कथित तौर पर लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ सदस्य हारिस दार पानी में होने वाले प्रशिक्षण अभ्यास की निगरानी करते दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो में एक कथित लश्कर कमांडर यह भी कहता है कि संगठन ने एक “समुद्री बल (Maritime Force)” बनाया है। उसका कहना है कि यह कार्यक्रम लश्कर-ए-तैयबा और उससे जुड़े संगठनों द्वारा चलाया जा रहा है। भारतीय अधिकारियों के अनुसार यह इस बात का संकेत है कि संगठन युवाओं की भर्ती, वैचारिक प्रशिक्षण और हमले की तैयारी व्यवस्थित तरीके से कर रहा है।
समुद्री नेटवर्क का विस्तार
रिपोर्टों के अनुसार लश्कर-ए-तैयबा की समुद्री इकाई पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई इलाकों में सक्रिय है।
बताया जा रहा है कि प्रशिक्षण शिविर इस्लामाबाद, लाहौर और कराची जैसे शहरों में चल रहे हैं। इसके अलावा मंगला डैम और मीरपुर जैसे जल क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे पता चलता है कि संगठन अपने रंगरूटों को अलग-अलग तरह के पानी के वातावरण में प्रशिक्षण देना चाहता है।
रिपोर्टों के अनुसार इस कार्यक्रम की निगरानी लश्कर के वरिष्ठ कमांडर रिजवान हनीफ और आमिर जिया कर रहे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि लगभग 5000 युवाओं को पानी से जुड़े प्रशिक्षण दिए गए हैं। इनमें से करीब 300 युवाओं को आगे वैचारिक और हथियारों का प्रशिक्षण देकर संगठन में शामिल किया गया है। इस तरह संगठन अपने पास समुद्री प्रशिक्षण प्राप्त लड़ाकों का एक बड़ा समूह तैयार कर रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके।
हमलों के लिए विशेष प्रशिक्षण
रिपोर्टों के अनुसार इन युवाओं को तैराकी, स्कूबा डाइविंग, पानी के अंदर संचालन, तेज मोटरबोट चलाना और समन्वित हमला करने की रणनीति सिखाई जा रही है। इसका उद्देश्य छोटी और तेज टीमों को तैयार करना है, जो चुपचाप समुद्र के रास्ते किसी शहर में घुस सकें और कई जगहों पर एक साथ हमला कर सकें।
यह तरीका 26/11 के हमलों से मिलता-जुलता है, जब आतंकवादियों ने एक मछली पकड़ने वाली नाव को कब्जे में लेकर मुंबई पहुंचकर हमला किया था।
भारत के लिए चुनौती
समुद्र के रास्ते बढ़ती गतिविधियां भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन सकती हैं। पाकिस्तान के पश्चिमी क्षेत्रों में बढ़ती अस्थिरता और आतंकवादी गतिविधियों के कारण कुछ आतंकी समूह समुद्र को हमलों के लिए नया रास्ता मान सकते हैं।
हालांकि लाइन ऑफ कंट्रोल पर घुसपैठ रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा है, लेकिन भारत की 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा और वहां चलने वाले भारी समुद्री यातायात की निगरानी करना अभी भी मुश्किल काम है। हालांकि 26/11 के बाद भारत ने तटीय सुरक्षा, रडार सिस्टम और समुद्री निगरानी को काफी मजबूत किया है, फिर भी लश्कर-ए-तैयबा की समुद्री इकाई की खबर यह याद दिलाती है कि समुद्र के रास्ते आतंकी हमलों का खतरा अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

































