राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर के Baisaran Valley (पहलगाम) में हुए भीषण आतंकी हमले की जांच पूरी करते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में एनआईए ने वैज्ञानिक और डिजिटल सबूतों के आधार पर यह साबित किया है कि साल 2025 में हुआ यह नरसंहार, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी, पूरी तरह से पाकिस्तान से नियंत्रित और संचालित किया जा रहा था। इस हमले के पीछे प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके प्रॉक्सी विंग ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) का सीधा हाथ था।
लाहौर में बैठा मास्टरमाइंड सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट ‘लंगड़ा’ दे रहा था लाइव निर्देश
एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक, इस पूरे हमले का मुख्य मास्टरमाइंड लश्कर का टॉप कमांडर सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ “लंगड़ा” है। वह पाकिस्तान के लाहौर शहर में सुरक्षित बैठकर इस हमले को रियल-टाइम (लाइव) कंट्रोल कर रहा था। जब घाटी में निर्दोष नागरिकों पर गोलियां बरसाई जा रही थीं, तब सैफुल्लाह एन्क्रिप्टेड (सुरक्षित) कम्युनिकेशन चैनलों के जरिए लगातार आतंकियों के संपर्क में था। वह सैटेलाइट और डिजिटल माध्यमों से आतंकियों को सुरक्षा बलों की पोजीशन, लाइव कोऑर्डिनेट्स और हमले के बाद भागने के रास्ते (Escape Routes) गाइड कर रहा था।
तीन आतंकियों ने की थी टोह (Reconnaissance), ऑपरेशन महादेव में हुए ढेर
एजेंसी ने हमले को अंजाम देने वाले तीन पाकिस्तानी आतंकियों की पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी के रूप में की है। जांच के अनुसार, ये तीनों आतंकी 15 और 16 अप्रैल 2025 को ही बैसारन घाटी में घुस आए थे। उन्होंने 22 अप्रैल को हुए मुख्य हमले से ठीक पहले कई दिनों तक इलाके में पर्यटकों की आवाजाही और सुरक्षा बलों की तैनाती की गहन रेकी (सर्वे) की थी। बाद में भारतीय सुरक्षा बलों ने ‘ऑपरेशन महादेव’ (Operation Mahadev) के तहत इन तीनों खूंखार आतंकियों को मार गिराया था।
मोबाइल और आईपी एड्रेस (IP Address) से खुला पाकिस्तान का डिजिटल कनेक्शन
पाकिस्तान के दावों की हवा निकालते हुए एनआईए ने चार्जशीट में मजबूत तकनीकी और डिजिटल साक्ष्य शामिल किए हैं। मारे गए आतंकियों के शवों से बरामद मोबाइल फोन और उनके इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) एड्रेस सीधे तौर पर पाकिस्तान के नेटवर्क से जुड़े पाए गए।
लाहौर और कराची लिंक: बरामद किए गए फोन में से एक डिवाइस का ओरिजिन लाहौर के ‘क्वैद-ए-आजम इंडस्ट्रियल एस्टेट’ से ट्रेस हुआ, जबकि दूसरा मोबाइल कराची के ‘शाहरा’ इलाके से एक्टिवेट किया गया था। यह तकनीकी सबूत साबित करता है कि आतंकियों को लॉजिस्टिक और तकनीकी सपोर्ट सीधे पाकिस्तान से मिल रहा था।
टीआरएफ (TRF) का प्रोपेगैंडा नेटवर्क और टेलीग्राम चैनल्स बेनकाब
एनआईए ने टीआरएफ के सोशल मीडिया और टेलीग्राम प्रोपेगैंडा नेटवर्क की भी गहराई से जांच की है। चार्जशीट के अनुसार, ‘कश्मीर फाइट’ (Kashmir Fight) और ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट ऑफिशियल’ जैसे टेलीग्राम चैनल पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और रावलपिंडी से संचालित हो रहे थे। इन चैनलों ने शुरुआत में गर्व से इस हमले की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन जब वैश्विक स्तर पर इस नरसंहार की भारी थू-थू हुई और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा, तो वे अपनी बात से पलट गए और दावा किया कि उनके अकाउंट्स हैक हो गए थे। एनआईए ने इस हैकिंग के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
कश्मीर में लोकल सपोर्ट और ड्रोन से हथियारों की तस्करी
इस सीमा पार की साजिश को अंजाम देने में घाटी के भीतर मौजूद दो स्थानीय मददगारों (Facilitators) परवेज और बशीर अहमद के नाम भी चार्जशीट में दर्ज हैं, जिन्होंने आतंकियों को पनाह और रसद दी थी। एनआईए के मुताबिक, मास्टरमाइंड सैफुल्लाह ने दक्षिण कश्मीर में ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा किया था। साल 2019 में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जब सुरक्षा कड़ी हुई, तो उसने भारत विरोधी गतिविधियों को जारी रखने के लिए ड्रोन के जरिए सीमा पार से हथियारों और नशीले पदार्थों (Narcotics) की तस्करी का नया नेटवर्क शुरू किया था।
इतिहास खंगालने पर पता चला कि सैफुल्लाह साल 2005 में खुद जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कर चुका था और कुलगाम में करीब दो साल छिपा रहा था, जहां उसने शब्बीरा नाम की स्थानीय महिला से शादी भी की थी। बाद में वह पाकिस्तान लौट गया, लेकिन उसका बेटा यहीं कश्मीर में रह रहा था, जिसका इस्तेमाल वह नेटवर्क बनाए रखने के लिए करता था।
भारत का मुंहतोड़ जवाब ‘ऑपरेशन सिंदूर’
पाकिस्तान भले ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस हमले में अपना हाथ होने से इनकार करता रहा हो, लेकिन एनआईए की यह चार्जशीट तकनीकी, डिजिटल और ह्यूमइंट (Human Intelligence) साक्ष्यों के साथ सीमा पार की इस पूरी साजिश का अचूक कानूनी दस्तावेज है। ज्ञात हो कि इसी भयानक नरसंहार के जवाब में भारतीय सेना ने सीमा पार आतंकी लॉन्चपैड्स और उनके बुनियादी ढांचे को तबाह करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) नामक एक बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया था। एनआईए की चार्जशीट यह साफ करती है कि पहलगाम हमला कोई स्थानीय घटना नहीं बल्कि पाकिस्तान प्रायोजित एक सुव्यवस्थित डिजिटल और लॉजिस्टिक वॉरफेयर का हिस्सा था।































