प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पेपर लीक कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी गई। सरकार का कहना है कि नए संशोधन का उद्देश्य पेपर लीक पर पूरी तरह रोक लगाना और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट को कानूनी मान्यता दी जाएगी। इन अदालतों को निर्देश होगा कि वे तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाएं, ताकि छात्रों को जल्द न्याय मिल सके।
सरकार ने पेपर लीक के दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान करने का फैसला किया है। इस संशोधन विधेयक को अगले सप्ताह संसद में पेश किए जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, इसे सोमवार को लोकसभा में पेश किया जा सकता है।
पीएम मोदी ने दिया था वीडियो संदेश
इससे पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मुद्दे पर एक वीडियो संदेश जारी किया था। उन्होंने कहा कि पेपर लीक लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई महीनों में सरकार ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और छात्रों का एक साल खराब न हो, इसके लिए कम समय में 22 लाख छात्रों की परीक्षा कराई गई, जिसका परिणाम 19 जुलाई को घोषित किया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पेपर लीक के मामलों में तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था भी करेगी।
संसद में जल्द पेश होगा विधेयक
सरकार का कहना है कि नया कानून लागू होने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का रास्ता साफ होगा और सभी पेपर लीक मामलों की सुनवाई तय समय सीमा में पूरी की जाएगी। यह विधेयक संसद के मौजूदा सत्र में पेश किया जाएगा।
इस बीच केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में भी बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। 1994 बैच के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया है। उन्होंने विनीत जोशी का स्थान लिया है।
पेपर लीक को लेकर पिछले कुछ समय से देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इसी मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन का अनशन किया था, जिसे उन्होंने गुरुवार को समाप्त कर दिया। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी पिछले एक महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों की मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रही है। सरकार का कहना है कि नए कानून के जरिए परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाएगा।


































