कॉकरोच जनता पार्टी और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित बातचीत आखिरकार हुई। करीब 10 मिनट तक चली इस बैठक में छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीन प्रमुख मांगों में से दो पर सहमति बनती नजर आई, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई सहमति नहीं बन सकी।
बैठक में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में हुई कथित अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। पार्टी का कहना है कि जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, सरकार ने इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में सरकार ने उन परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई जिनके बच्चों ने कथित तौर पर पेपर लीक और परीक्षा संबंधी तनाव के कारण आत्महत्या की। सरकार ने ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को एक करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता देने के प्रस्ताव पर सकारात्मक संकेत दिए। हालांकि, इस संबंध में अंतिम फैसला और आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
इसके अलावा, सरकार ने छात्रों के हित में कई सुधारात्मक कदमों पर भी चर्चा की। इनमें पेपर लीक के मामलों की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा मजबूत करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाए जाएंगे।
बैठक के बाद दोनों पक्षों ने बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन यह भी माना कि सभी मुद्दों पर अंतिम सहमति अभी नहीं बनी है। कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से वह पीछे नहीं हटेगी, जबकि सरकार का कहना है कि संवाद के जरिए समाधान निकालने की कोशिश जारी रहेगी।
अब सभी की नजर अगली दौर की बातचीत पर है। माना जा रहा है कि यदि शेष मुद्दों पर भी सहमति बन जाती है तो छात्र आंदोलन को लेकर जारी गतिरोध खत्म हो सकता है। फिलहाल सरकार और आंदोलनकारी दोनों ने बातचीत का रास्ता खुला रखने पर सहमति जताई है।


































