क्रांति की अपनी एक अलग परिभाषा थी भगत सिंह की
लिख रहा हूँ मैं अंजाम जिसका कल आग़ाज आयेगा, मेरे लहू का हर एक कतरा इंक़लाब लायेगा। मैं रहूँ या न रहूँ पर यह ...
लिख रहा हूँ मैं अंजाम जिसका कल आग़ाज आयेगा, मेरे लहू का हर एक कतरा इंक़लाब लायेगा। मैं रहूँ या न रहूँ पर यह ...
लाहौर सेंट्रल जेल में दिनांक 23 मार्च 1931 के दिन का आरम्भ बड़ा ही सामान्य था लेकिन यह दिन तब तक ही सामान्य ...
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों की चर्चा भगत सिंह का नाम लिए बगैर हमेशा अधूरी ही मानी जाएगी। भगत सिंह का योगदान ...
सन् 1928 का भारत आज़ादी की ज्वाला से जल रहा था। एक ओर देशभक्त भारत माता की परतंत्रता की बेड़ियाँ काटने के लिए ...
'शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।' भारत के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में ...
देश की आज़ादी की लड़ाई का इतिहास नायकों की गाथाओं से भरा पड़ा है। ना जाने कितने ही वीरों ने भारत को अंग्रेज़ों ...
भारत की इस धरती पर एक से बढ़कर एक वीर पैदा हुए। इन्हीं में से एक सरदार उधम सिंह थे। सरदार उधम सिंह ...
8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह ने अंग्रेजों के मन में खौफ पैदा करने के लिए दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में बम फेंका ...
इस बात से किसे आपत्ति होगी कि वीर सावरकर ने “भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस” जैसे असंख्य क्रांतिकारियों को प्रेरित किया? कोई देशभक्त ...
“सिर्फ गांधी ही एक रास्ता नहीं है। अवाम अपने आप में इतनी ताकतवर है कि यदि उसे सही दिशा दी जाए, तो वह ...
“इतिहास में कोई भी परिवर्तन केवल वार्तालाप से कभी प्राप्त नहीं हुआ” कलकत्ता अधिवेशन: इस बात में कितनी सत्यता है इसे प्रमाणित करने ...
कभी-कभी कुछ कहने से बेहतर होता है चुप रहना लेकिन आम आदमी पार्टी और उसके इकलौते चश्मोचिराग अरविंद केजरीवाल को ये बात न ...


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