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लालू यादव को गिरिराज सिंह का करारा जवाब

Atul Kumar Mishra द्वारा Atul Kumar Mishra
24 July 2016
in मत
गिरिराज सिंह लालू
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आदरणीय लालू जी,

आपकी जाति के आधार पर समाज को बांटने की राजनीति, भ्रष्टाचार के हाथों बिहार को 15 वर्षों में पूरी तरह से बर्बाद कर देने की राजनीति और आपकी गरीब एवं विकास विरोधी राजनीति से पूरा देश भलीभांति वाकिफ है. अतः आपके अनर्गल प्रवचन पर लोग ध्यान भी नहीं देते. आपने हमेशा से समाज में जहर घोलकर कुत्सित मानसिकता की राजनीति की है, साथ ही मौकापरस्त राजनीति का आपसे बड़ा उदाहरण हो भी नहीं सकता.

आपने दलितों,पिछड़ों व गरीबों का वोट बैंक की तरह उपयोग किया – गिरिराज सिंह

आपने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिये जो अनर्गल और मिथ्या प्रलाप किया है, उसका जवाब देने के लिए गिरिराज सिंह ही काफी है. लालू जी, आपकी राजनीति अगड़ों-पिछड़ों की राजनीति से ही शुरू होती है और इसी पर आकर ख़त्म भी हो जाती है. याद कीजिये, जाति की राजनीति को बिहार में परवान चढाते हुए आपने ही ‘हमको परवल बहुत पसंद है, भूरा बाल साफ करो’ जैसे जुमले गढ़े थे. आपने अपने शासनकाल में बिहार को जातीय हिंसा की आग में झुलसा दिया था. आपने समाज के भाईचारे को एक झटके में तबाह करके रख दिया था. याद कीजिये आपने पिछड़ों के आरक्षण को भी ख़त्म करने की कोशिश की थी. आप कब से लोगों की भलाई के मुद्दे उठाने लगे? आपने तो दलितों,पिछड़ों व गरीबों का वोट बैंक की तरह उपयोग किया और काम निकलने के बाद उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया. आपके राज्य में दलितों के ऊपर जो अत्याचार हुए, वह किसी से छुपा हुआ नहीं है. अभी कल ही मुजफ्फरपुर में कुछ दलित युवकों की जिस तरह से पिटाई हुई और उन्हें पेशाब तक पीने को मजबूर किया गया, आपके कानों पर तो जूं तक नहीं रेंगी, आपके पास तो उन पीड़ित दलितों के पक्ष में बोलने को शब्द तक नहीं थे, इस घिनौनी घटना के बावजूद आप सोते रहे तो फिर आप किस मुंह से दलितों और पिछड़ों की आवाज होने का दंभ भर रहे हैं.

लालू जी, आप नीरो की भांति बांसुरी बजाते रहे जबकि पूरा बिहार झुलस रहा था – गिरिराज सिंह

लालू जी, याद कीजिये पटना उच्च न्यायालय की टिप्पणी को जब आपकी शासन व्यवस्था से तंग आकर कोर्ट ने आपके राज को ‘जंगलराज’ की संज्ञा दी थी, आपको तो तब भी शर्म नहीं आई, आपके 15 वर्षों के शासनकाल में 50,000 से अधिक लोग बिहार में मारे गए, आपको तब भी शर्म नहीं आई,किडनैपिंग को आपने बिहार की इंडस्ट्री बना डाला,आपको तब भी शर्म नहीं आई, फिर आप किस मुंह से मिथ्या प्रलाप कर रहे हैं? आदरणीय लालू जी,यह कोई शब्दों का जाल नहीं है, बल्कि एक सच्चाई है कि किस तरह से अपने बिहार की गौरवमयी अतीत को दागदार करने का पाप किया था. बिहार पुलिस की वेबसाइट के मुताबिक, साल 2000 से 2005 के बीच केवल पांच साल की अवधि में 18,189 हत्याएं हुईं। द टाइम्स ऑफ इंडिया की ओर से तब करवाए गए एक सर्वे से पता चला कि साल 1992 से 2004 तक बिहार में किडनैपिंग के 32,085 मामले सामने आए। कई मामलों में तो फिरौती की रकम लेकर भी बंधकों को मार दिया गया. यह सब आपके मंत्री, विधायक और खुद आपकी शह पर होता रहा और आप नीरो की भांति बांसुरी बजाते रहे जबकि पूरा बिहार झुलस रहा था. लालू जी, आपने राजनीति का अपराधीकरण कर दिया. शहाबुद्दीन, रीतलाल यादव जैसों का आतंक बिहार कैसे भूल सकता है? ये आज भी आपके ख़ास हैं और आज फिर जैसे ही आप बिहार की सत्ता में वापस आये हैं, इनके आतंक का नंगा नाच बिहार में शुरू हो गया है.

लालू जी आपके चरवाहा विद्यालयों का मकसद क्या था? – गिरिराज सिंह

आदरणीय लालू जी, अब आपके शासनकाल में बिहार के विकास की भी थोड़ी बात कर लेते हैं. बिहार के एक जन-प्रतिनिधि होने के नाते आज फिर से मैं बिहार को जंगलराज की ओर वापस जाते देख दुखी और शर्मसार महसूस कर रहा हूँ. आपके ‘जंगलराज’ के दौरान बिहार विकास के मामले में कोसों पीछे चला गया, विकास दर लगातार ऋणात्मक रहा. नए उद्योग-धंधे लगने की बात तो दूर, पहले से चल रहे उद्योग भी बंद हो गए। रोजगार के लिए लोगों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ा। शिक्षा की हालत ऐसी कर दी गई कि आज भी बिहार इससे पूरी तरह से उबर नहीं पा रहा है। आप तो यह कहते थे कि ‘डॉक्टर, इंजिनियर तो अमीर लोग के बेटा-बेटी बनता है, गरीब तो चरवाहा बनता है’. इसके लिए आपने चरवाहा विद्यालय खोल दिया लेकिन इन चरवाहा विद्यालयों का मकसद क्या था, इनमें कौन सी पढ़ाई पढ़ाई जानी थी, इसका अंदाजा आज भी नहीं लगाया जा सका। हां, इन स्कूलों के नाम पर जारी फंड में भरपूर भ्रष्टाचार हुआ। शिक्षा की बदतर हालत ने बिहार के युवाओं को राज्य से बाहर जाने को मजबूर कर दिया। यही हालत सड़कों की थी। तब एक कहावत मशहूर हो गई कि बिहार की सड़कों में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़कें, ये पता नहीं चल पाता।

आप पर कोई भी चुनाव लड़ने की पाबंदी है,आखिर आपने कौन सा गुनाह किया था? – गिरिराज सिंह

लालू जी, यूं तो आपने खुद को ‘गुदड़ी का लाल’ के रूप में पेश किया ओर स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों में इसी शीर्षक से एक अध्याय भी जुड़वाया जिसमें आपने अपने आप को गरीबों के मसीहा के तौर पर पेश किया. लेकिन हकीकत यह है कि सत्ता मिलते ही आपने उन्हीं गरीबों की हकमारी करके अनगिनत घोटाले किये, गरीबों की कल्याणकारी योजनाओं के पैसे डकार गए, यहाँ तक कि निरीह पशुओं के चारे तक को नहीं बख्शा. तब केंद्र में सत्तारुढ़ पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मदद से, नेताओं और नौकरशाही की मिली भगत स जो आपने 950 करोड़ रुपये का घोटाला किया, आपको तो याद भी नहीं होगा कि सरकारी खजाने की इस चोरी की गूँज न सिर्फ़ भारत में बल्कि सात समुन्दर पार अमेरिका और ब्रिटेन में भी सुनायी दी थी जिससे भारत की राजनीति बदनाम हुई थी। लेकिन आपको देश की बदनामी से क्या, आपको तो अपना घर भरने से मतलब था. कहते हैं न कि पाप का घड़ा जब भर जाता है तो फूट जाता है. ज़रा अपनी गिरेबाँ में झांककर देखिये लालू जी कि आखिर क्यों आप पर कोई भी चुनाव लड़ने की पाबंदी है,आखिर आपने कौन सा गुनाह किया था? आपके कहानियों का तो कोई अंत नहीं है. आपके समय में तो कई प्रोफेसरों ने यह तक कहना शुरू कर दिया था कि ‘लगता है, पढ़-लिख कर गुनाह कर दिया’.आपने पिछले बिहार विधान सभा चुनावों में भी यह अगड़ों-पिछड़ों का बिगुल बजाया था. आपने दलितों, पिछड़ों, गरीबों का तो कुछ भला किया नहीं, हाँ, अपने परिवार का भला जरूर किया आपने. परिवारवाद की जिस ओछी राजनीति को आपने अंजाम दिया है, बिहार की जनता इस त्रासदी को भूलेगी नहीं. आज आपके दोनों बेटों की नासमझी और करतूतों से बिहार की जनता भी त्रस्त है. आपकी कहानी को काली स्याही तो पूरी तरह लिख भी नहीं सकती जितने स्याह काम आपने किये हैं.

सत्ता के दंभ में आपके गुर्गों द्वारा सड़कों पर बच्चों को कुचला जा रहा है – गिरिराज सिंह

लालू जी, आज एक बार फिर से बिहार में जंगलराज-2 ने दस्तक दे दी है. आज बिहार में दिन दहाड़े हत्या, दंगा-फसाद, बलात्कार, किडनैपिंग,लूटमार की असंख्य घटनाएं घटित हो रही है,राजनीतिक हत्याओं का खुला तांडव मचा हुआ है,पाकिस्तानी झंडे लहराए जा रहे हैं, दलितों पर जुल्म और अत्याचार हो रहा है, प्रशासनिक पदाधिकारियों को सरेआम धमकियां दी जा रही है, सत्ता के दंभ में आपके गुर्गों द्वारा सड़कों पर बच्चों को कुचला जा रहा है, आपके विधायकों द्वारा स्कूली छात्राओं को हवस का शिकार बनाया जा रहा है और इस सबके बावजूद आप बेशर्म होकर राजनीति करने में व्यस्त हैं! लालू जी, राजद, जद(यू) और कांग्रेस की आपकी सरकार बिहार में बनने के तीन महीनों के भीतर ही 578 हत्याएं हुईं. आज बिहारवासी दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं और आप अपनी राजनीति की रोटी सेंकने में व्यस्त हैं. जनता में भय का माहौल है और वह कहीं न कहीं एक बार फिर से खुद को ठगा महसूस कर रही है. वह नीतीश और लालू की जोड़ी को कोसने पर मजबूर है कि वह इन्हें सत्ता में क्यों लेकर आई?

लालू जी, आप तो नैतिकता के सारे आधार खो चुके हैं – गिरिराज सिंह

लालू जी, आप तो नैतिकता के सारे आधार खो चुके हैं, नैतिकता के सारे मापदंड को आपने खोखला कर दिया है फिर एक ऐसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री, जिसने अपनी पूरी जिंदगी देश और देश की जनता की भलाई के लिए समर्पित कर दिया है, के खिलाफ इन ओछी शब्दों का सहारा लेकर पत्र लिखने का साहस आपने कैसे किया?
लालू जी, पहल मेरे द्वारा उठाये गये इन प्रश्नों का उत्तर अपने आप से पूछिए, आपने बिहार से जो धोखा किया है,पहले उसका पश्चाताप कीजिये, पहले अपने द्वारा पूर्व में किये गए असंख्य जघन्य पापों का प्रायश्चित कीजिये, फिर पत्र लिखने का साहस कीजिए

धन्यवाद,
गिरिराज सिंह

Source: https://www.facebook.com/girirajsinghpage/posts/590667681095012

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