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कांग्रेस के ‘स्लीपर सेल’ अपने बिलों से निकलकर बाहर आ रहे हैं

भले ही रघुराम राजन आधिकारिक तौर पर कांग्रेसी न हों लेकिन कई वर्षों तक कांग्रेस पार्टी को पिछले दरवाजे से समर्थन देने वाले रघुराम राजन आखिरकार अब सामने से पार्टी के समर्थन में खड़े हो गए हैं।

Vaishali Shukla द्वारा Vaishali Shukla
15 December 2022
in मत, राजनीति
भारत जोड़ो यात्रा रघुराम राजन

Source- TFI

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हर किसी की अपनी एक विचारधारा होती है जिस पर वे व्यक्ति चलता है। परंतु तब क्या जब आप अपनी इसी विचारधारा के कारण प्रतिष्ठित होने के बाद भी लोगों के बीच अपनी विश्वसनीयता खो बैठे? तो भला ऐसी विचारधारा किस काम की है? आप सोच रहे होंगे हम यहां किस प्रतिष्ठित व्यक्ति की बात कर रहे हैं? हम बात कर रहे हैं आरबीआई के पूर्व गवर्नर एवं हाल ही में भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए रघुराम राजन की। इन्हें RBI के पूर्व गर्वनर से अधिक यदि हमें कांग्रेस का ‘गुप्त समर्थक’ या फिर मोदी सरकार की नीतियों के आलोचक कहें तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा।

वैसे तो राहुल गांधी के बेतुके तर्कों का समर्थन करने और उनको सही ठहराने में कई लोग अपनी लंका लगा चुके हैं। हम अगर उन सभी की एक लिस्ट बनाई जाए तो एक नाम रघुराम राजन का भी आएगा। भले ही रघुराम राजन आधिकारिक तौर पर कांग्रेसी न हो लेकिन फिर भी कई बार उनको कांग्रेस पार्टी का महिमामंडन करते हुए पाया गया है। कई वर्षों तक कांग्रेस पार्टी को पिछले दरवाजे से समर्थन करने वाले रघुराम राजन आखिरकार अब सामने से पार्टी के समर्थन में उतर आए हैं, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो एक-एक कांग्रेस के ‘स्लीपर सेल’ अपने बिलों से निकलकर बाहर आ रहे हैं।

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भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए रघुराम राजन

दरअसल, हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान के सवाई माधोपुर के भदोती से आरम्भ हुई है। कांग्रेस पार्टी की भारत जोड़ो यात्रा के आरम्भ होते ही आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन इसमें शामिल हुए। वो राहुल गांधी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हुए देखे गए। देखा जाए तो रघुराम राजन ने नियमित रूप से पिछले कुछ वर्षों में एक पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया है। हर बात में सरकार की नीतियों के विरोध का झंडा उठा लेना ये भला कौन से विशेषज्ञ और निपूर्ण अर्थशास्त्री की पहचान है?

मोदी सरकार की नीतियों की करते हैं आलोचना

एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री के तौर पर कम गांधी परिवार के वफादार होने के नाते आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की खूब आलोचना की है। RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन कभी आर्थिक मंदी तो कभी नोटबंदी तो कभी आत्मनिर्भर भारत तक विभिन्न मुद्दों पर मोदी सरकार को नसीहत देते हुए नज़र आ चुके हैं। लेकिन यहां सोचने वाली बात ये है कि स्वयं आर्थिक मंदी की नींव डालने वाला क्या सरकार को कोसने का अधिकार रखता है? रघुराम राजन साल 2013 से सितंबर 2016 तक RBI के गवर्नर के पद पर रह चुके हैं और उनकी नीतियों ने देश के आर्थिक विकास को बड़ा धक्का पहुंचाने का काम बखूबी किया था। उनके द्वारा बढ़ाए गए ब्याज दरों के कारण लोन महंगे हो गए और छोटी कंपनियों को पैसे की कमी से जूझना पड़ गया था। अर्थशास्त्री भी ये मानते हैं कि राजन के समय ब्याज के दर काफी बढ़ गयी थी लेकिन उसके बाद भी रघुराम राजन की हिम्मत तो देखिये जो सरकार से सवाल पूछते नजर आते रहते हैं।

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वहीं रघुराम ने सरकार के आत्मनिर्भर भारत पहल के अंतर्गत आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा देने को लेकर भी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था– “लोगों, आलोचकों, विपक्षी दलों के पास कुछ बेहतर सुझाव हो सकते हैं आप अगर उनमें अधिक सहमति बनाएंगे तो आपके सुधार अधिक प्रभावी ढंग से लागू हो पाएंगे। मैं ये नहीं कर रहा हूं कि मुद्दों पर लंबे वक्त तक चर्चा होनी चाहिए लेकिन लोकतंत्र में यह महत्वपूर्ण है कि आम सहमति बनाई जाए।” शायद यहां पर रघुराम विपक्षी दल और आलोचकों की संज्ञा राहुल गांधी को दे रहे होंगे क्योंकि उनके अनुसार देश को एक बेहतर सलाह और सुझाव राहुल गांधी ही दे सकते हैं न।

गुप्त समर्थक अब सामने आ रहे हैं

रघुराम राजन एक अकेले महानुभाव नहीं है जो कांग्रेस और भारत जोड़ो यात्रा में अपना अटूट समर्थन दिखाने और राहुल की न समझ आने वाली बातों को डिकोड करने का काम करते आए हो। इस तरह के और भी गुप्त कांग्रेसी समर्थक मौजूद हैं जो भारत जोड़ो यात्रा के समय अपने बिलों से बाहर आते हुए दिखाई दिए है। इसमें सुशांत सिंह, मेधा पाटकर जैसे नाम भी शामिल हैं। सुशांत सिंह उन अवसरवादियों में से आते हैं, जिन्हें केवल भारत तोड़ों ब्रिगेड के घड़ियाली आंसू दिखाई देते हैं और जिन मुद्दों पर भारतीयों को वास्तव में समस्या होती है, वे उसपर चुप्पी साध लेते हैं।

और पढ़ें: “मोदी की हत्या करो”, बयानवीर गैंग के साथ खड़ी है कांग्रेस? 

वहीं अगर मोहतरमा मेधा पाटकर की बात करें तो वैसे तो ये स्वयं को गरीब और विशेषकर आदिवासियों के “हित” के समर्थन में काम करने वाली कहती हैं लेकिन फिर इनके लिए मिलने वाले पैसों को डकारने का आरोप इन पर लग जाता है। इन सभी को देखकर ऐसा लगता है मानो कांग्रेस पार्टी ने अपने समथकों के रूप में ऐसे लोगों की टोली जमाकर रखी है जो स्वयं ही पहले से डूबे हुए हैं। अगर इसी तरह से उच्च कोटि की बुद्धि वाले लोग राहुल गांधी की ओर अपना समर्थन दिखायेगी तो पार्टी का पतन और भी निकट आ जाएगा।

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