अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने भारत को “मृत अर्थव्यवस्था” बताया और यहां तक कह दिया कि “भारत और रूस मिलकर अपनी मृत अर्थव्यवस्थाओं को नीचे खींच रहे हैं।” लेकिन वास्तविक आंकड़े कुछ और ही तस्वीर पेश करते हैं। वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8% दर्ज की गई है, जो पिछले पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है। यह न केवल सभी अनुमानों से ऊपर है, बल्कि चीन (5.2%) और अमेरिका (3.3%) दोनों से बेहतर प्रदर्शन है।
यह आंकड़ा भारत के मजबूत आर्थिक आधार, लचीलापन और नीतिगत दिशा को दर्शाता है। जीएसटी संग्रह, विदेशी मुद्रा भंडार, विनिर्माण पीएमआई और शेयर बाजार के रिकॉर्ड स्तर इस बात का सबूत हैं कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है।
आंकड़ों की हकीकत: बढ़ती रफ्तार
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुसार, अप्रैल-जून 2025 में जीडीपी 7.8% की दर से बढ़ी, जबकि बाजार का अनुमान 6.7% था। पिछली तिमाही की 7.4% वृद्धि से यह अधिक है। इससे भारत ने एक बार फिर साबित किया कि वह वैश्विक अनिश्चितताओं और चुनौतियों के बीच भी लगातार विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। यह वृद्धि केवल संयोग नहीं है, बल्कि सरकारी पूंजीगत व्यय, मजबूत सेवा क्षेत्र, कृषि उत्पादन और घरेलू उपभोग की वजह से संभव हुई।
सरकारी निवेश: विकास का इंजन
पहली तिमाही के बेहतर प्रदर्शन का एक बड़ा कारण सरकार द्वारा पूंजीगत खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, केंद्र का सकल पूंजीगत व्यय अप्रैल-जून 2025 में 52% बढ़कर ₹2.8 लाख करोड़ हो गया। यह इसलिए और भी अहम है क्योंकि 2024 की इसी अवधि में आम चुनावों की वजह से 35% की गिरावट दर्ज की गई थी।
नई परियोजनाओं की घोषणाएं लगभग दोगुनी होकर ₹5.8 लाख करोड़ तक पहुंच गईं। वहीं, परियोजनाओं के पूरा होने का स्तर एक साल पहले ₹70,000 करोड़ से बढ़कर ₹2.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया। इससे न केवल बुनियादी ढांचे और रोजगार को बल मिला, बल्कि जीडीपी की वृद्धि दर पर भी सीधा असर पड़ा।
निर्यात में उछाल: अमेरिकी टैरिफ से पहले फायदा
अमेरिका द्वारा 27 अगस्त से 50% टैरिफ लगाए जाने से पहले भारत के निर्यातकों ने रिकॉर्ड निर्यात किया। केवल अप्रैल 2025 में वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में 5.9% की बढ़ोतरी हुई। एचडीएफसी बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, यह “अमेरिका जैसे देशों की अग्रिम मांग” का नतीजा था। हालांकि आने वाली तिमाहियों में टैरिफ का असर दिख सकता है, लेकिन पहली तिमाही में यह उछाल जीडीपी को अतिरिक्त बल देने वाला साबित हुआ।
सेवा क्षेत्र: भारत की मजबूत रीढ़
भारत का सबसे बड़ा ताकतवर क्षेत्र, सेवा क्षेत्र, एक बार फिर विकास का इंजन बना। अप्रैल-जून 2025 में सेवाओं का जीवीए 8.3% बढ़ा। इसमें वित्तीय सेवाओं (9.5% की वृद्धि) और लोक प्रशासन (9.7% की वृद्धि) की बड़ी भूमिका रही। इस मजबूती ने उद्योग और कृषि की कुछ कमजोरियों को संतुलित किया।
कृषि क्षेत्र: पिछली तिमाही के 5.4% की तुलना में 3.7% की वृद्धि।
विनिर्माण क्षेत्र: 4.8% से बढ़कर 7.7%।
निर्माण क्षेत्र: 10.8% से घटकर 7.6%।
खनन क्षेत्र: -3.1% की गिरावट।
ग्रामीण मांग और मुद्रास्फीति में गिरावट: सकारात्मक माहौल
अनुकूल मानसून और ग्रामीण आय में वृद्धि ने खपत को बल दिया। ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों में उपभोग बढ़ा, जिससे अर्थव्यवस्था की गति व्यापक हुई। इसके साथ ही, खुदरा मुद्रास्फीति आठ साल के निचले स्तर पर रही। इससे उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ी और वास्तविक जीडीपी पर सकारात्मक असर पड़ा।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि 7.8% की वृद्धि दर ऐतिहासिक है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाली तिमाहियों में यह गति थोड़ी धीमी हो सकती है। सरकारी अग्रिम खर्च का असर धीरे-धीरे कम हो सकता है। अमेरिकी टैरिफ से निर्यात पर दबाव बढ़ेगा। वैश्विक मांग में कमजोरी भारत को प्रभावित कर सकती है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 6.5% जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है। दूसरी तिमाही में 6.7%, तीसरी में 6.6% और चौथी तिमाही में 6.3% वृद्धि का अनुमान है।
“मृत अर्थव्यवस्था” नहीं, बल्कि “लचीली अर्थव्यवस्था”
ट्रंप द्वारा भारत को “मृत अर्थव्यवस्था” कहना तथ्यों से मेल नहीं खाता। आंकड़े बताते हैं कि:
अब तक का सबसे ज़्यादा जीएसटी संग्रह: $270 बिलियन
अब तक की सबसे ज़्यादा वाहन बिक्री: 2.5 करोड़
अब तक का सबसे ज़्यादा मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई: 59.8
अब तक का सबसे ज़्यादा विदेशी मुद्रा भंडार: $704 बिलियन
अब तक का सबसे ज़्यादा सेंसेक्स: 85,900
और अब, पांच तिमाहियों में सबसे तेज़ 7.8% जीडीपी वृद्धि।
ये आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि भारत न केवल जीवित है, बल्कि मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
भारत आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला प्रमुख खिलाड़ी है। सरकारी निवेश, सेवा क्षेत्र की मजबूती, ग्रामीण खपत और नियंत्रित मुद्रास्फीति ने मिलकर पहली तिमाही को ऐतिहासिक बना दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप का “मृत अर्थव्यवस्था” वाला बयान केवल राजनीतिक व्यंग्य हो सकता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि भारत दुनिया की सबसे लचीली और अवसरों से भरी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है। अगर यही “मृत अर्थव्यवस्था” है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को जीवन की परिभाषा दोबारा लिखनी होगी।