अरब सागर में तनाव बढ़ने के बीच ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने दावा किया है कि उसने ओमान के तट के पास तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत समूह USS Abraham Lincoln पर चार एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
हालांकि, अमेरिका के रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि जहाज़ को कोई नुकसान हुआ। United States Central Command (CENTCOM) ने कहा है कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों को किसी तरह की जान-माल की बड़ी हानि नहीं हुई और नुकसान बहुत मामूली रहा।
इसका महत्व क्या है?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस घटना का रणनीतिक महत्व बहुत बड़ा है। आधुनिक नौसैनिक इतिहास में पहली बार किसी देश ने खुलकर यह दावा किया है कि उसने समुद्र में तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी।
यह खतरा नया नहीं है
पिछले 20 सालों से अमेरिका इस तरह के खतरे की तैयारी कर रहा था। जब चीन ने DF-21D नाम की “कैरियर किलर” मिसाइल विकसित की, तब से यह चिंता बढ़ी। 2009 में U.S. Naval Institute ने कहा था कि अगर ऐसी मिसाइल सही तरीके से काम करे, तो उससे बचाव करना बहुत मुश्किल हो सकता है।
इसके बाद अमेरिका ने अपनी नौसैनिक रणनीति बदली।
Aegis सिस्टम वाले युद्धपोत तैनात किए
SM-3 और SM-6 जैसी इंटरसेप्टर मिसाइलों की खरीद बढ़ाई
मिसाइल रक्षा और रडार तकनीक पर अरबों डॉलर खर्च किए
लेकिन अब तक यह सिर्फ अभ्यास और सिमुलेशन तक ही सीमित था।
USS Abraham Lincoln की ताकत
USS Abraham Lincoln एक परमाणु ऊर्जा से चलने वाला 100,000 टन वजनी विशाल विमानवाहक पोत है।
लगभग 80 लड़ाकू विमान ले जा सकता है
करीब 5,000 सैनिक तैनात रहते हैं
इसकी कीमत लगभग 13 अरब डॉलर मानी जाती है
इसके साथ चलने वाला “कैरियर स्ट्राइक ग्रुप” कई परतों वाली सुरक्षा देता है:
Aegis डिफेंस सिस्टम
SM-3 और SM-6 इंटरसेप्टर
F-35C स्टील्थ फाइटर
E-2D निगरानी विमान
EA-18G इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विमान
अगर ईरान की मिसाइलें सच में रोक दी गईं, तो यह अमेरिकी रक्षा प्रणाली की बड़ी सफलता मानी जाएगी।
अगर मिसाइल बचाव तोड़ देती?
अगर कोई मिसाइल सुरक्षा घेरा पार कर जाती, तो यह बड़ी चिंता की बात होती।
2024 में यमन के हूती विद्रोहियों ने USS Dwight D. Eisenhower के पास एक मिसाइल दागी थी, जो लगभग 200 मीटर दूर गिरी थी। लेकिन उस समय हमला एक गैर-सरकारी समूह ने किया था। अभी की स्थिति में खुद ईरान सरकार शामिल है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिका ने ईरान के दावे को खारिज किया है। पेंटागन ने कहा कि मिसाइलें जहाज़ के पास भी नहीं आईं और USS Abraham Lincoln सामान्य रूप से अपने अभियान जारी रखे हुए है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी जानकारी आने में समय लग सकता है। हो सकता है मिसाइलें दूर ही रोक दी गई हों या समुद्र में गिर गई हों। यह भी संभव है कि ईरान का बयान सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर) का हिस्सा हो।
चाहे मिसाइलें सफल रहीं या नहीं, लेकिन पहली बार किसी देश ने खुलकर अमेरिकी विमानवाहक पोत पर बैलिस्टिक मिसाइल चलाने का दावा किया है।
यह घटना समुद्री युद्ध के भविष्य को लेकर दुनिया भर में नई चिंता और नई रणनीति बनाने की शुरुआत हो सकती है। 1945 के बाद से अमेरिकी विमानवाहक पोत समुद्र में उसकी ताकत का प्रतीक रहे हैं। अब मिसाइल युग में उनकी सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।































