पंजाब की राजनीति और शिक्षा जगत में उस समय हलचल मच गई जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल और उनके परिवार से जुड़े कई परिसरों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी FEMA के तहत कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में की गई।
अधिकारियों के अनुसार, यह छापेमारी सिर्फ एक सामान्य जांच नहीं थी बल्कि एक समन्वित ऑपरेशन था जिसमें पंजाब और हरियाणा के कई ठिकानों को एक साथ खंगाला गया। सुबह करीब 7 बजे शुरू हुई यह कार्रवाई देर शाम तक जारी रही और जांच एजेंसी की कई टीमें दस्तावेज़, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्य जुटाने में लगी रहीं।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ा दी बल्कि आने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सियासत को भी गरमा दिया है।
किन-किन ठिकानों पर हुई कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार ईडी की टीमों ने पंजाब के जालंधर, फगवाड़ा और आसपास के इलाकों में स्थित कुल 10 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इन जगहों में शैक्षणिक संस्थान, व्यापारिक प्रतिष्ठान और निजी आवास शामिल थे।
सबसे प्रमुख कार्रवाई लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के परिसर में हुई, जो उत्तर भारत की सबसे बड़ी निजी यूनिवर्सिटियों में गिनी जाती है। विश्वविद्यालय के अलावा जालंधर कैंट क्षेत्र में मित्तल परिवार के आवासों और लवली ग्रुप से जुड़े अन्य कारोबारी परिसरों की भी तलाशी ली गई।
अधिकारियों ने बताया कि जिन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की गई उनमें Lovely Autos, Lovely Sweets और Lovely Distance Education Centre भी शामिल हैं। इन सभी संस्थानों को लवली ग्रुप के कारोबारी नेटवर्क का हिस्सा माना जाता है।
क्या है FEMA उल्लंघन का मामला
ईडी की यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत कथित उल्लंघनों की जांच से जुड़ी बताई जा रही है। एजेंसी को संदेह है कि कुछ वित्तीय लेन-देन विदेशी निवेश, फंड ट्रांसफर और कारोबारी साझेदारियों के नियमों के विपरीत किए गए हो सकते हैं।
हालांकि अभी तक एजेंसी की ओर से आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जांच किस विशेष लेन-देन या संस्था से संबंधित है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि विदेशी फंडिंग और उससे जुड़े दस्तावेज एजेंसी की प्राथमिक जांच के केंद्र में हैं।
जांच एजेंसी के अधिकारियों ने परिसर से कई कंप्यूटर हार्ड ड्राइव, बैंक रिकॉर्ड और संपत्ति दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। इन दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि कथित अनियमितताओं की प्रकृति क्या है।
गुरुग्राम तक फैली जांच
यह कार्रवाई केवल पंजाब तक सीमित नहीं रही। हरियाणा के गुरुग्राम में भी ईडी की टीमों ने दो प्रमुख शैक्षणिक परिसरों की जांच की। इनमें Tetr College of Business और Master’s Union College of Business से जुड़े परिसरों को शामिल किया गया।
अधिकारियों का मानना है कि इन संस्थानों और लवली ग्रुप के बीच कुछ वित्तीय संबंध हो सकते हैं, जिनकी जांच की जा रही है। हालांकि इन संस्थानों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जांच एजेंसी ने स्थानीय पुलिस की मदद लिए बिना यह कार्रवाई की, जिससे यह संकेत मिलता है कि ऑपरेशन बेहद गोपनीय तरीके से संचालित किया गया।
कौन हैं अशोक कुमार मित्तल
अशोक कुमार मित्तल पंजाब के जाने-माने उद्योगपति और शिक्षाविद हैं। उन्होंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी और वर्तमान में इसके चांसलर हैं।
उनका परिवार Lovely Group का संचालन करता है, जिसमें शिक्षा, ऑटोमोबाइल, मिठाई कारोबार और अन्य कई व्यवसाय शामिल हैं।
राजनीति में आने के बाद मित्तल आम आदमी पार्टी के महत्वपूर्ण चेहरों में शामिल हुए और हाल ही में उन्हें राज्यसभा में पार्टी का उपनेता बनाया गया। इस नियुक्ति के कुछ ही दिनों बाद हुई ईडी की कार्रवाई ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है।
राजनीतिक नियुक्ति के बाद बढ़ी हलचल
3 अप्रैल को आम आदमी पार्टी ने अशोक मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का डिप्टी लीडर नियुक्त किया था। उन्होंने इस पद पर राघव चड्ढा की जगह ली।
इस नियुक्ति को पार्टी के भीतर उनके बढ़ते कद के रूप में देखा गया था। लेकिन नियुक्ति के कुछ ही दिनों बाद ईडी की कार्रवाई ने विपक्ष और सत्ताधारी दलों के बीच नई बहस छेड़ दी।
पार्टी नेताओं का आरोप है कि यह छापेमारी राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और पंजाब चुनाव से पहले पार्टी को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
AAP का आरोप: एजेंसियों का दुरुपयोग
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए कर रही है।
पार्टी का कहना है कि जैसे-जैसे पंजाब चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे विपक्षी नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों का दबाव बढ़ाया जा रहा है।
AAP नेताओं ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब पार्टी नेताओं को इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ा हो। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग का उदाहरण बताया।
केंद्र सरकार का जवाब
केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि एजेंसियां अपना काम कानून के अनुसार कर रही हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई किसी भी व्यक्ति की राजनीतिक पहचान देखकर नहीं रोकी जा सकती।
उन्होंने कहा कि पंजाब में लोगों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं और सरकार का उद्देश्य देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करना है।
उनके बयान के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया।
पंजाब में AAP नेताओं पर दूसरी बड़ी कार्रवाई
अशोक मित्तल पंजाब से दूसरे ऐसे आम आदमी पार्टी नेता हैं जिन पर ईडी ने कार्रवाई की है।
इससे पहले नवंबर 2023 में जसवंत सिंह गज्जनमाजरा को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। वह मामला लगभग ₹40.92 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी से जुड़ा था।
उस दौरान जांच एजेंसियों ने बड़ी मात्रा में नकदी, विदेशी मुद्रा और दस्तावेज भी बरामद किए थे।
अब अशोक मित्तल पर हुई कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि एजेंसी पंजाब में अपनी जांच और तेज कर सकती है।
पंजाब चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तनाव
पंजाब विधानसभा चुनाव अगले वर्ष होने वाले हैं। ऐसे में यह छापेमारी राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
एक तरफ आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के रूप में पेश कर रही है।
इस वजह से आने वाले समय में यह मामला सिर्फ कानूनी ही नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी काफी अहम हो सकता है, इस मामले में फिलहाल ईडी ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। लेकिन जांच में मिले दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के बाद एजेंसी आगे की कार्रवाई कर सकती है।
अगर वित्तीय अनियमितताओं के ठोस प्रमाण मिलते हैं तो पूछताछ, समन या गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई भी संभव है।
अशोक मित्तल और उनके परिवार की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। उनके फोन भी छापेमारी के दौरान बंद बताए गए।
पंजाब और गुरुग्राम में हुई यह छापेमारी केवल एक कारोबारी जांच नहीं बल्कि एक ऐसा मामला बन चुकी है जिसने शिक्षा, व्यापार और राजनीति तीनों क्षेत्रों को एक साथ प्रभावित किया है।
प्रवर्तन निदेशालय की इस कार्रवाई ने आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति को और अधिक गर्माने के संकेत दे दिए हैं।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसी आगे क्या कदम उठाती है और क्या यह मामला सिर्फ वित्तीय जांच तक सीमित रहेगा या आने वाले चुनावों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाएगा।





























