महाराष्ट्र के नासिक में सामने आए TCS धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। नासिक की एक कोर्ट ने TCS की साइट हेड और POSH कमेटी सदस्य अश्विनी चैनानी को ज़मानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता की शिकायतों को नजरअंदाज कर चैनानी ने आरोपियों को संरक्षण दिया और इस दौरान उसका रवैया अपराध को बढ़ावा देने जैसा था। कोर्ट ने कहा कि एक POSH कमेटी सदस्य होने के बावजूद अश्विनी चैनानी ने अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाईं। उनकी असंवेदनशीलता ने कार्यस्थल के माहौल को और अधिक ख़राब बना दिया।
पीड़िता की शिकायत को नहीं किया दर्ज
अश्विनी चैनानी कंपनी की आतंरिक जांच समिति यानी (Internal Committee) यानी POSH कमेटी की सदस्य थीं। यह समिति ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013’ के तहत बनाई जाती है।
कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने कई बार मौखिक रूप से उत्पीड़न की शिकायत की थी, लेकिन चैनानी ने न तो शिकायत को लिखित रूप में दर्ज करवाने में मदद की और न ही आरोपों को रोकने के लिए कोई कदम उठाया। जबकि POSH कानून के तहत ऐसा करना उनकी कानूनी जिम्मेदारी थी।
इतना ही नहीं, पीड़िता के अनुसार चैनानी ने उसे आरोपी को माफ कर देने की सलाह भी दी थी।
10 अप्रैल को हुई थी गिरफ्तारी
इस मामले में अश्विनी चैनानी को 10 अप्रैल को भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध को बढ़ावा देने और आरोपियों की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
पीड़िता का कहना है कि उसने कई बार चैनानी से मिलकर मौखिक रूप से शिकायत की थी, लेकिन हर बार उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया।
बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में कहा कि अश्विनी चैनानी मुख्य रूप से TCS की पुणे शाखा में कार्यरत थीं और नासिक ऑफिस के रोजमर्रा के कामकाज की सीधी निगरानी नहीं करती थीं।
वकीलों ने यह भी दलील दी कि पीड़िता की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई थी, इसलिए कोई औपचारिक POSH प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। साथ ही शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी को भी आधार बनाया गया।
हालांकि अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने देरी पर क्या कहा?
कोर्ट ने साफ कहा कि शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी के लिए पीड़िता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अदालत के मुताबिक, पीड़िता ने घटना के तुरंत बाद POSH कमेटी सदस्य होने के नाते अश्विनी चैनानी को पूरी जानकारी दे दी थी। अदालत ने माना कि शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करना चैनानी की जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। यही वजह है कि कोर्ट ने उनकी ज़मानत याचिका खारिज कर दी।
































