TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    पुतिन ने जताया भारत पर भरोसा

    पुतिन ने जताया भारत पर भरोसा, मोदी पर पश्चिमी दबाव को किया खारिज; भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का किया समर्थन

    राजीव गांधी

    जब राजीव गांधी ने दूरदर्शन को दिए थे तियानआनमेन स्क्वायर नरसंहार की कवरेज न करने के निर्देश

    Cockroach Janta Party

    Cockroach Janta Party ने दिल्ली प्रदर्शन से पहले तीन प्रवक्ताओं का किया ऐलान, नेताओं की पृष्ठभूमि पर छिड़ी बहस

    रुद्रम-2 मिसाइल

    रुद्रम-2 मिसाइल के सफल परीक्षण से भारत की रक्षा ताकत बढ़ी, दुश्मन के रडार सिस्टम को 300 किमी दूर से कर सकती है तबाह

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी तेजी से बढ़ रहा

    UPI ने मई में 29.9 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन के साथ बनाया नया रिकॉर्ड, भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था हुई और मजबूत

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    एनडीए के कई पूर्व छात्र देश के बड़े सैन्य

    एनडीए की 150वीं पासिंग आउट परेड आज, 77 साल के इतिहास का खास पल

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस

    चीन को ‘कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस, बयान बना वैश्विक कूटनीतिक विवाद

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल आयात जारी रखेगा भारत, ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का सख्त रुख

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    गोवा राज्य स्थापना दिवस

    गोवा राज्य स्थापना दिवस 2025: जानिए इतिहास, महत्व और इस दिन से जुड़ी खास बातें

    1950 में जेल से रिहा किए जाने के बाद सावरकर (चित्र: savarkar.org)

    अंग्रेज़ों की ही नहीं, नेहरू सरकार की कैद में भी महीनों रहे थे सावरकर

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज शिप

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज पर नोरोवायरस का हमला: 3116 यात्रियों वाले क्रूज शिप पर 115 लोग बीमार

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    पुतिन ने जताया भारत पर भरोसा

    पुतिन ने जताया भारत पर भरोसा, मोदी पर पश्चिमी दबाव को किया खारिज; भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का किया समर्थन

    राजीव गांधी

    जब राजीव गांधी ने दूरदर्शन को दिए थे तियानआनमेन स्क्वायर नरसंहार की कवरेज न करने के निर्देश

    Cockroach Janta Party

    Cockroach Janta Party ने दिल्ली प्रदर्शन से पहले तीन प्रवक्ताओं का किया ऐलान, नेताओं की पृष्ठभूमि पर छिड़ी बहस

    रुद्रम-2 मिसाइल

    रुद्रम-2 मिसाइल के सफल परीक्षण से भारत की रक्षा ताकत बढ़ी, दुश्मन के रडार सिस्टम को 300 किमी दूर से कर सकती है तबाह

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी तेजी से बढ़ रहा

    UPI ने मई में 29.9 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन के साथ बनाया नया रिकॉर्ड, भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था हुई और मजबूत

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    एनडीए के कई पूर्व छात्र देश के बड़े सैन्य

    एनडीए की 150वीं पासिंग आउट परेड आज, 77 साल के इतिहास का खास पल

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस

    चीन को ‘कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस, बयान बना वैश्विक कूटनीतिक विवाद

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल आयात जारी रखेगा भारत, ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का सख्त रुख

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    गोवा राज्य स्थापना दिवस

    गोवा राज्य स्थापना दिवस 2025: जानिए इतिहास, महत्व और इस दिन से जुड़ी खास बातें

    1950 में जेल से रिहा किए जाने के बाद सावरकर (चित्र: savarkar.org)

    अंग्रेज़ों की ही नहीं, नेहरू सरकार की कैद में भी महीनों रहे थे सावरकर

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज शिप

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज पर नोरोवायरस का हमला: 3116 यात्रियों वाले क्रूज शिप पर 115 लोग बीमार

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

पोखरण-I के 51 साल: जब भारत ने दुनिया को दिखाया अपना परमाणु आत्मबल

ऑपरेशन 'स्माइलिंग बुद्धा' की कहानी

himanshumishra द्वारा himanshumishra
18 May 2026
in चर्चित
पोखरण-I के 51 साल

पोखरण-I के 51 साल

Share on FacebookShare on X

आज ही के दिन, 1974 में भारत ने राजस्थान के पोखरण में अपना पहला परमाणु परीक्षण कर वैश्विक शक्ति संतुलन को चुनौती दी थी। ‘स्माइलिंग बुद्धा’ ऑपरेशन के तहत किए गए इस ऐतिहासिक परीक्षण ने भारत को उन देशों की कतार में ला खड़ा किया, जो स्वयं की रणनीतिक संप्रभुता और सुरक्षा के लिए परमाणु क्षमता हासिल कर चुके थे।

यह परीक्षण पूरी दुनिया की निगाहों से छिपाकर अंजाम दिया गया था, क्योंकि उस दौर में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन जैसे शक्तिशाली राष्ट्र जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य (P-5) के रूप में परमाणु ताकत हासिल थी अन्य देशों को इस तकनीक तक पहुंचने से रोकना चाहते थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस परीक्षण को “शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट” बताया, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसे आक्रामक शक्ति प्रदर्शन के रूप में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और आत्मरक्षा के अधिकार के रूप में देखा जाए।

संबंधितपोस्ट

इंदिरा गांधी ने किया था सम्मान लेकिन वीर सावरकर से क्यों चिढ़ती है कांग्रेस?

पोखरण परमाणु परीक्षणों की याद में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर राजनीतिक बहस फिर चर्चा में

पीएम मोदी ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर पोखरण से तकनीकी शक्ति तक भारत की यात्रा को किया उजागर

और लोड करें

लेकिन असल सवाल यह है क्यों था P-5 देशों को भारत के परमाणु कार्यक्रम से डर? भारत ने इस परीक्षण के जरिए दुनिया को क्या संदेश दिया? और क्या यह सिर्फ एक परीक्षण था, या एक राजनीतिक और भू-सुरक्षा संकल्प? आइए, इस ऐतिहासिक निर्णय की पृष्ठभूमि, वैश्विक दबावों और भारत के आत्मनिर्भर सुरक्षा दृष्टिकोण को समझते हैं।

भारत के परमाणु परीक्षण की पृष्ठभूमि क्या थी?

1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के अंत के साथ ही जब लाखों लोग मारे गए और अभूतपूर्व तबाही हुई, तब दुनिया ने शक्ति संतुलन और वैश्विक गठबंधनों का एक नया दौर देखा। अमेरिका और सोवियत संघ (यूएसएसआर) ने वैचारिक और आर्थिक वर्चस्व की होड़ में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में परोक्ष युद्ध (प्रॉक्सी वॉर) शुरू कर दिए, जिसे आगे चलकर शीत युद्ध (Cold War) के नाम से जाना गया।

युद्ध के अंतिम चरण में, अगस्त 1945 में अमेरिका द्वारा जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराने के बाद पूरी दुनिया में परमाणु हथियारों के उपयोग से होने वाली तबाही का भय गहराने लगा। इसके चार वर्ष बाद, 1949 में जब सोवियत संघ ने भी अपना पहला परमाणु परीक्षण किया, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह एहसास हुआ कि परमाणु विनाश को रोकने के लिए ठोस नियमों की आवश्यकता है।

इसी दिशा में एक कदम था 1968 में हस्ताक्षरित परमाणु अप्रसार संधि (Nuclear Non-Proliferation Treaty – NPT)। इस संधि के तहत केवल उन्हीं देशों को “परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र” माना गया, जिन्होंने 1 जनवरी 1967 से पहले परमाणु हथियार विकसित और परीक्षण किए थे, यानी अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन जिन्हें आज हम P-5 कहते हैं।

इस संधि के तीन मुख्य स्तंभ थे:
पहला, परमाणु हथियार संपन्न देश किसी अन्य देश को न तो परमाणु हथियार देंगे, न ही इसकी तकनीक स्थानांतरित करेंगे।
दूसरा, गैर-परमाणु देशों ने यह स्वीकार किया कि वे न तो परमाणु हथियार प्राप्त करेंगे, न उसका विकास करेंगे और न ही उसे किसी भी रूप में हासिल करने की कोशिश करेंगे।
तीसरा, सभी सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) द्वारा निर्धारित अप्रसार उपायों के अंतर्गत कार्य करेंगे, और वैश्विक स्तर पर हथियारों की दौड़ को रोकने और इस तकनीक के प्रसार पर नियंत्रण के लिए सहयोग करेंगे।

हालांकि, यह संधि अपने भीतर गहरी असमानता और पक्षपात को समेटे हुए थी क्योंकि यह कुछ गिने-चुने देशों को ही परमाणु शक्ति का अधिकार देती थी और बाकी राष्ट्रों को उससे वंचित रखती थी। यही वह ऐतिहासिक, कूटनीतिक और रणनीतिक पृष्ठभूमि थी, जिसने भारत को अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के लिए स्वतंत्र परमाणु नीति अपनाने की ओर प्रेरित किया।

 

भारत ने परमाणु परीक्षण करने का निर्णय क्यों लिया?

भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) को एकतरफा और भेदभावपूर्ण करार देते हुए इसे खारिज कर दिया। भारत का स्पष्ट मानना था कि यह संधि केवल P-5 देशों को परमाणु शक्ति बनाए रखने की अनुमति देती है, जबकि अन्य देशों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे परमाणु हथियारों के विकास से दूर रहें। विदेश नीति विशेषज्ञ सुमित गांगुली के शब्दों में, “भारत सरकार ने इस संधि की शर्तों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, क्योंकि यह भारत की आपत्तियों को संबोधित करने में पूरी तरह असफल रही,” खासतौर पर इस कारण से कि गैर-परमाणु देशों पर हथियार न बनाने की बाध्यता थी, लेकिन परमाणु हथियार संपन्न देशों पर कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं थी कि वे अपने हथियारों को खत्म करेंगे या विकास रोकेंगे।

भारत के भीतर भी परमाणु ऊर्जा और अनुसंधान की नींव पहले ही रखी जा चुकी थी। वैज्ञानिक होमी जे. भाभा और विक्रम साराभाई ने देश में वैज्ञानिक सोच और आत्मनिर्भरता के आधार पर परमाणु शक्ति की दिशा में मजबूत नींव तैयार की थी। 1954 में परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) की स्थापना की गई और भाभा इसके पहले निदेशक बने। परमाणु ऊर्जा के शुरुआती समर्थक होमी भाभा ने लिखा था, “जब परमाणु ऊर्जा को अगले कुछ दशकों में विद्युत उत्पादन के लिए सफलतापूर्वक लागू किया जाएगा, तो भारत को विशेषज्ञों के लिए विदेश नहीं देखना पड़ेगा, वे यहीं मौजूद होंगे।” हालांकि उस समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू परमाणु हथियारों और सैन्य आधुनिकीकरण को लेकर संकोच में रहते थे।

लेकिन 1960 के दशक में परिस्थितियां तेजी से बदलीं। नेहरू की मृत्यु, मोरारजी देसाई का उत्तराधिकार, और भारत-चीन युद्ध (1962) में हुई हार ने भारत की रणनीतिक सोच को झकझोर दिया। इसके बाद 1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ दो युद्ध हुए, जिनमें भारत विजयी रहा इसने भारत की सैन्य और परमाणु नीति को नया मार्ग देने का काम किया। इस दौरान चीन ने भी 1964 में अपना परमाणु परीक्षण किया, जिसने भारत के लिए खतरे की नई परिभाषा खड़ी कर दी। इन सभी घटनाओं ने भारत को यह एहसास दिलाया कि अगर उसे अपनी संप्रभुता की रक्षा करनी है, तो वह दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकता। भारत को आत्मनिर्भर परमाणु शक्ति बनना ही होगा न सिर्फ ऊर्जा के लिए, बल्कि अपने रणनीतिक अस्तित्व की रक्षा के लिए भी।

पोखरण-I परीक्षण का नाम क्यों पड़ा स्माइलिंग बुद्धा

जहाँ प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू परमाणु परीक्षणों को लेकर संकोच में थे, वहीं प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का रुख कहीं अधिक स्पष्ट और दृढ़ था। उन्होंने परमाणु शक्ति को एक रणनीतिक आवश्यकता के रूप में देखा, न कि केवल वैज्ञानिक उपलब्धि के तौर पर। लेकिन चूंकि उस समय P-5 देशों द्वारा बनाई गई संधियाँ और दबाव पूरी दुनिया पर हावी थे, भारत ने तय किया कि यह परीक्षण पूरी तरह गोपनीय तरीके से किया जाएगा — बिना किसी अंतरराष्ट्रीय पूर्व सूचना के। 18 मई 1974 को राजस्थान के पश्चिमी रेगिस्तान में स्थित पोखरण सेना परीक्षण क्षेत्र में भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण सफलतापूर्वक किया, जिसकी शक्ति लगभग 12-13 किलोटन TNT के बराबर थी। इस मिशन में करीब 75 वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की टीम शामिल थी, जिन्होंने कई महीनों तक गुप्त तैयारी के बाद इसे अंजाम दिया।

इस मिशन को “स्माइलिंग बुद्धा” नाम दिया गया, क्योंकि यह परीक्षण गौतम बुद्ध की जयंती के दिन किया गया था — एक शांतिपूर्ण प्रतीक के दिन भारत ने अपनी रणनीतिक संप्रभुता की घोषणा की। पोखरण-I न केवल एक तकनीकी सफलता थी, बल्कि यह भारत का विश्व मंच पर आत्मनिर्भरता और सुरक्षा नीति का ऐलान भी था एक ऐसा फैसला, जिसने आने वाले दशकों की भू-राजनीतिक दिशा को बदल दिया।

पोखरण परमाणु परिक्षण के बाद क्या हुआ

भारत ने पोखरण परीक्षण के माध्यम से दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया कि यदि कोई चरम परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो वह अपनी सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित करने में सक्षम है। लेकिन यह भी उल्लेखनीय है कि 1974 में किए गए इस परीक्षण के बावजूद भारत ने तत्क्षण परमाणु हथियारों का निर्माण या तैनाती नहीं की। यह अगला कदम भारत ने 1998 के पोखरण-II परीक्षण के समय उठाया। हालांकि, इस परीक्षण के तुरंत बाद भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीव्र आलोचना का सामना करना पड़ा। वर्ष 1978 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने “न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन एक्ट” पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अमेरिका ने भारत को परमाणु सहायता देना बंद कर दिया।

अमेरिका का नजरिया भारत के प्रति लंबे समय तक सख्त बना रहा और इसमें बदलाव 18 जुलाई 2005 को देखने को मिला, जब अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वाशिंगटन में पहली बार भारत-अमेरिका परमाणु समझौते की मंशा सार्वजनिक की। इसी दौरान अमेरिका ने यह सुनिश्चित करने के लिए भी पहल की कि परमाणु उपकरण और विखंडनीय सामग्री का प्रसार नियंत्रित किया जाए। इसी सोच से 48 देशों का “न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप” (NSG) बना, जिसने परमाणु सामग्री के निर्यात के लिए साझा नियम लागू किए। इस समूह में नया सदस्य केवल सर्वसम्मति से ही शामिल हो सकता है, जिससे भारत की राह चुनौतीपूर्ण बन गई।

भारत 2008 से लगातार NSG में शामिल होने की कोशिश कर रहा है, ताकि उसे वैश्विक परमाणु व्यापार के “हाई टेबल” में स्थान मिल सके, जहां परमाणु उपकरणों की बिक्री, नियमन और सहयोग पर निर्णय लिए जाते हैं। प्रारंभ में जिन देशों ने विरोध किया था, जैसे ऑस्ट्रेलिया, उन्होंने बाद में अपना रुख बदला। मैक्सिको और स्विट्ज़रलैंड जैसे राष्ट्र भी अब भारत के पक्ष में समर्थन जाहिर कर चुके हैं। भारत ने चीन को छोड़कर लगभग सभी विरोधी देशों को धीरे-धीरे सहमत कर लिया है, लेकिन चीन आज भी एकमात्र ऐसा देश है जो भारत की सदस्यता का विरोध करता रहा है।

यही कारण था कि भारत ने 1974 के बाद तुरंत अगला परीक्षण नहीं किया, और पूरी रणनीतिक समझदारी और अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ही 1998 में पोखरण-II परीक्षण को अंजाम दिया। उस समय भी वैश्विक प्रतिक्रियाएं नकारात्मक थीं, लेकिन वर्षों में भारत ने स्वयं को एक “जिम्मेदार परमाणु शक्ति” के रूप में स्थापित किया है, जो केवल सुरक्षा और संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से परमाणु हथियार रखता है। भारत की यही संयमित, रणनीतिक और राष्ट्रहित-प्रधान नीति है, जिसने उसे आज NSG जैसे मंचों पर वैध दावेदार बना दिया है और वैश्विक समुदाय में एक परिपक्व परमाणु राष्ट्र के रूप में मान्यता दिलाई है।

ये लेख 18 मई 2025 को लिखा गया था, जिसे पहले परमाणु परीक्षण की एनिवर्सिरी के अवसर पर पुन: प्रकाशित किया गया है

स्रोत: पोखरण-I के 51 साल, पोखरण, इंदिरा गाँधी, स्माइलिंग बुद्धा, अमेरिका, 51 Years of Pokhran-I, Pokhran, Indira Gandhi, Smiling Buddha, USA
Tags: 51 Years of Pokhran-IIndira GandhiPokhranSmiling BuddhaUSAअमेरिकाइंदिरा गाँधीपोखरणपोखरण-I के 51 सालस्माइलिंग बुद्धा
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

TCS धर्मांतरण केस: आरोपियों की जमानत याचिका ख़ारिज, कोर्ट ने क्या बताया ?

अगली पोस्ट

सीएम रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, दिल्ली में हर सोमवार मनाया जाएगा ‘मेट्रो डे’

संबंधित पोस्ट

प्रज्ञानानंदा ने ऐतिहासिक नॉर्वे चेस
चर्चित

प्रज्ञानानंदा ने ऐतिहासिक नॉर्वे चेस खिताब जीतकर ओस्लो में रचा इतिहास

6 June 2026

भारतीय शतरंज के लिए एक ऐतिहासिक पल में आर. प्रज्ञानानंदा ने ओस्लो में आयोजित नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीत लिया। इसके साथ ही वह...

वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि
अर्थव्यवस्था

वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

6 June 2026

वित्त वर्ष 2025–26 में भारत की वास्तविक जीडीपी (GDP) वृद्धि दर 7.7% रही, जो उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है। यह दिखाता है...

मणिपुर DGP राजीव सिंह
चर्चित

पूर्व मणिपुर DGP राजीव सिंह ने संभाला कैबिनेट सचिवालय में सचिव (सुरक्षा) का पद


6 June 2026

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव सिंह कैबिनेट सचिवालय में सचिव (सुरक्षा) का पदभार ग्रहण कर लिया है। मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (DGP) के रूप में चुनौतीपूर्ण...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

AIRCRAFT CARRIERS: INDIA’S MOST POWERFUL TOOL OF MARITIME POWER PROJECTION | INS Vikrant |

AIRCRAFT CARRIERS: INDIA’S MOST POWERFUL TOOL OF MARITIME POWER PROJECTION | INS Vikrant |

00:03:22

Rudram 2 Success: Made in India Missile Ready To Crush Enemy Radars| DRDO’s Big Breakthrough

00:03:46

From Runways to Warships: India’s Firefighting Warrior Built for Bases & Battles| IAF | VayuShakti

00:05:40

Ethanol, EVs and Solar- How India’s Energy Game Is Changing | Modi on LPG & Crude Oil | war| Hormuz

00:05:21

Truth of IRIS Dena: 8 Days That Changed Narrative | War zone Reality, Not an Indian Navy Exercise

00:08:02
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited