भारत और इटली के रिश्तों को लेकर इन दिनों “मेलोडी” शब्द खूब चर्चा में है। प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनीइटली की प्रधानमंत्री की दोस्ताना तस्वीरों और हल्के-फुल्के अंदाज ने सोशल मीडिया पर “Melodi” ट्रेंड को जन्म दिया। समर्थकों ने इसे दोनों नेताओं की मजबूत केमिस्ट्री और भारत-इटली संबंधों की नई गर्मजोशी का प्रतीक बताया। लेकिन विपक्ष को यही “मेलोडी” अब राजनीतिक तौर पर चुभती हुई दिखाई दे रही है।
पवन खेड़ा का तंज
दरअसल, कांग्रेस नेता Pawan Khera ने इस पूरे मुद्दे पर तंज कसते हुए कहा कि विदेश नीति को “इवेंट मैनेजमेंट” और सोशल मीडिया ब्रांडिंग तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर अंतरराष्ट्रीय मुलाकात को कैमरे और प्रचार के नजरिए से पेश करती है, जबकि असली सवाल आर्थिक चुनौतियों, बेरोजगारी और घरेलू मुद्दों पर होने चाहिए।
सोशल मीडिया से राजनीति तक
पवन खेड़ा के बयान के बाद “मेलोडी” सिर्फ सोशल मीडिया ट्रेंड नहीं रही, बल्कि राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई। भाजपा समर्थकों ने इसे विपक्ष की “जलन” बताया और कहा कि भारत की बढ़ती वैश्विक छवि विपक्ष को असहज कर रही है। वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि विदेशी नेताओं के साथ व्यक्तिगत समीकरण दिखाने से ज्यादा जरूरी ठोस नीतिगत परिणाम होते हैं।
भारत-इटली रिश्तों में बढ़ती नजदीकी
हालांकि, यह भी सच है कि प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकातें केवल तस्वीरों तक सीमित नहीं हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत और इटली के बीच व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, तकनीक और रणनीतिक साझेदारी में तेजी आई है। दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक, सप्लाई चेन और नई टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया है। हाल ही में दोनों नेताओं ने एक संयुक्त लेख लिखकर इस रिश्ते को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” बताया।
भाजपा बनाम विपक्ष की अलग सोच
यही वजह है कि भाजपा इस दोस्ती को भारत की कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश कर रही है। दूसरी तरफ विपक्ष का मानना है कि विदेश नीति को केवल व्यक्तिगत ब्रांडिंग या वायरल तस्वीरों के जरिए नहीं देखा जाना चाहिए।
क्यों खास बन गई ‘मेलोडी’?
“मेलोडी” इसलिए दिलचस्प बन गई है क्योंकि इसमें राजनीति, कूटनीति और सोशल मीडिया — तीनों का मिश्रण दिखाई देता है। समर्थकों के लिए यह भारत की सॉफ्ट पावर और वैश्विक स्वीकार्यता की निशानी है, जबकि आलोचकों के लिए यह ज्यादा प्रचार और कम गंभीरता का उदाहरण बन गई है।
































