उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा से विधायक और जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ ‘राजा भैया’ के एक ताजा बयान ने राज्य के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भारी हलचल पैदा कर दी है। कुंडा में आयोजित एक धार्मिक कथा कार्यक्रम के दौरान जनता को संबोधित करते हुए राजा भैया ने धर्म परिवर्तन, इतिहास और सनातन धर्म को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
“आज जो मुस्लिम हैं, वे पहले हिंदू थे” राजा भैया का बड़ा दावा
कुंडा के एक धार्मिक मंच से जनता से मुखातिब होते हुए राजा भैया ने कहा कि वर्तमान में देश के भीतर जितने भी लोग मुस्लिम समाज के रूप में दिखाई दे रहे हैं, वे सभी इतिहास में पहले हिंदू ही थे। उन्होंने दावा किया कि सदियों पहले परिस्थितियों के वश होकर इन लोगों के पूर्वजों ने अपना मूल धर्म छोड़ दिया था। उनके इस बयान के बाद से ही विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच बहस छिड़ गई है।
धर्म परिवर्तन को लेकर प्रलोभन और कायरता की टिप्पणी
भाषण के दौरान राजा भैया ने धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) के ऐतिहासिक कारणों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा:
“जो लोग आस्था विहीन, लोभी, निष्ठाहीन, लालची और कायर थे, उन्होंने बाहरी दबाव और प्रलोभन में आकर अपना धर्म परिवर्तन किया और हिंदू धर्म छोड़कर मुस्लिम धर्म अपना लिया।”
इसके विपरीत, उन्होंने वर्तमान हिंदू समाज की प्रशंसा करते हुए आगे जोड़ा कि जो लोग उस दौर में भी धार्मिक, वीर, स्वाभिमानी और बलिदानी थे, उन्होंने अत्याचार के सामने घुटने नहीं टेके। उन्होंने गर्व से कहा कि आज हम सब हिंदू उन्हीं वीर और बलिदानी पूर्वजों की संतान हैं।
“सनातन नहीं रहेगा, तो संविधान भी नहीं रहेगा”
अपने संबोधन में राजा भैया ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे और संविधान को लेकर भी एक बड़ा कूटनीतिक और वैचारिक बयान दिया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से कहा कि भारत की सहिष्णुता, विविधता और लोकतांत्रिक मूल्य तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक यहाँ सनातन संस्कृति बहुसंख्यक है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि देश में सनातन धर्म ही नहीं बचेगा, तो भारत का संविधान भी सुरक्षित नहीं रह पाएगा।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, प्रशासन अलर्ट पर
राजा भैया का यह वीडियो सामने आने के बाद प्रतापगढ़ और आसपास के जिलों में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे ध्रुवीकरण की राजनीति से प्रेरित बयान बताया है, जबकि उनके समर्थक इसे ऐतिहासिक सच करार दे रहे हैं। संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने की बात कही है। प्रशासन सोशल मीडिया के माध्यम से फैल रही प्रतिक्रियाओं और जमीनी हालात पर लगातार पैनी नजर रखे हुए है।





























