पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर भारत में आतंक और जासूसी का नेटवर्क खड़ा करने के आरोपों में घिरे शहजाद भट्टी पर केंद्र सरकार बड़ा एक्शन लेने की तैयारी में है। सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिश के बाद गृह मंत्रालय भट्टी को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA के तहत आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर काम कर रहा है।
12 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले सुरक्षा एजेंसियों ने 14 राज्यों में एक साथ कार्रवाई की। जांच में सामने आया कि नेटवर्क स्थानीय युवाओं और अपराधियों को जोड़कर रेकी, हथियार पहुंचाने और हमलों की तैयारी जैसे काम कर रहा था। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्धों को पकड़ा गया और हथियारों के साथ निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे उपकरण भी बरामद किए गए। द प्रिंट के अनुसार पूरे नेटवर्क पर शिंकजा कसने के लिए जल्द ही शहजाद भट्टी को आतंकी घोषित किया जाएगा।
कौन है शहजाद भट्टी?
शहजाद भट्टी पिछले कुछ वर्षों से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच के केंद्र में रहा है। करीब 45 साल के भट्टी पर एजेंसियां सीमा पार अपराध और आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप लगाती रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि भट्टी खुद को न गैंगस्टर मानता है और न माफिया। लेकिन जांच एजेंसियों के मुताबिक, उसकी भूमिका अब ऐसे नेटवर्क से जुड़ गई है, जिसके तार अपराध और आतंक से जुड़े बताए जा रहे हैं।
भट्टी ने लंबे समय तक सोशल मीडिया पर अपनी एक अलग पहचान बनाई। वह खुद को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कारोबारी के तौर पर पेश करता रहा। ‘333’ ब्रांड के नाम से वीडियो और पोस्ट के जरिए वह धार्मिक विवादों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के बीच चलने वाले विवादों और भारत–पाकिस्तान संबंधों जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखता था। धीरे–धीरे उसके वीडियो को बड़ी संख्या में लोग देखने लगे और सोशल मीडिया पर उसका एक बड़ा फॉलोअर्स बेस तैयार हो गया।
जिसके बाद इसने भारत में स्थानीय स्तर पर एक नेटवर्क तैयार किया। इस नेटवर्क में बेरोजगार युवाओं, स्थानीय अपराधियों और ऐसे लोगों को जोड़ा गया, जिन्हें पैसों के बदले छोटे–छोटे काम सौंपे जाते थे। आरोप है कि इन लोगों का इस्तेमाल संवेदनशील जगहों की रेकी, हथियारों की डिलीवरी और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की तैयारी के लिए किया जा रहा था।
निशाने पर कौन–कौन?
जांच में सुरक्षा प्रतिष्ठानों, पुलिस चौकियों और धार्मिक स्थलों की निगरानी तथा संभावित हमलों की तैयारी के आरोप सामने आए हैं। एजेंसियों को आशंका है कि नेटवर्क के जरिए ग्रेनेड, IED और पेट्रोल बम जैसे हथियारों का इस्तेमाल कर स्थानीय स्तर पर हिंसा फैलाने की योजना बनाई जा रही थी।
हालिया कार्रवाई में पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री यानी POF की मार्किंग वाले ग्रेनेड, पिस्टल और विस्फोटक बरामद किए जाने की बात सामने आई है। एजेंसियां इसे सीमा पार मौजूद हैंडलर्स से नेटवर्क के संभावित संपर्क के अहम सबूत के तौर पर देख रही हैं।
सिर्फ हथियार नहीं, CCTV से भी निगरानी
इस पूरे नेटवर्क की जांच में उसका जासूसी वाला तरीका भी सामने आया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, स्थानीय युवाओं को पैसे का लालच देकर संवेदनशील जगहों के आसपास सोलर पावर्ड CCTV कैमरे लगवाए जाते थे।
इन कैमरों का मकसद ऐसी जगहों की लगातार निगरानी करना था, जहां सामान्य तौर पर पुलिस या सुरक्षा बलों की आवाजाही रहती है। आरोप है कि इन कैमरों से मिलने वाली जानकारी को सीमा पार बैठे हैंडलर्स तक पहुंचाया जाता था।
यानी नेटवर्क का मॉडल सिर्फ हथियार पहुंचाने तक सीमित नहीं था। स्थानीय स्तर पर लोगों को जोड़ना, इलाके की जानकारी जुटाना, निगरानी करना और फिर जरूरत के मुताबिक लॉजिस्टिक सपोर्ट देना इसकी पूरी कड़ी का हिस्सा था।
छोटी रकम, अलग अलग काम
जांच में सबसे अहम बात यह सामने आई कि नेटवर्क के लिए काम करने वाले सभी लोग कट्टर आतंकी या प्रशिक्षित लड़ाके नहीं थे। स्थानीय युवाओं को छोटी रकम का लालच देकर अलग–अलग काम सौंपे जाने का आरोप है।
किसी को रेकी का काम दिया जाता था, कोई हथियार पहुंचाता था तो किसी से CCTV लगाने या पेट्रोल बम जैसे हमलों के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान की व्यवस्था कराई जाती थी।
यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां इस तरह के नेटवर्क को पारंपरिक आतंकी संगठन से अलग और ज्यादा चुनौतीपूर्ण मानती हैं। इसमें स्थानीय स्तर पर छोटे–छोटे मॉड्यूल बनाए जाते हैं, जिनके सदस्य एक–दूसरे की पूरी पहचान से भी अनजान हो सकते हैं।
12 अगस्त की कार्रवाई में क्या हुआ?
स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की। यह ऑपरेशन 14 राज्यों में चलाया गया। इस दौरान 253 से ज्यादा संदिग्धों और ओवरग्राउंड वर्कर्स को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया, जबकि 80 से ज्यादा FIR दर्ज की गईं। कार्रवाई में UAPA, BNS, Arms Act और NDPS Act समेत कई कानूनी प्रावधानों के तहत केस दर्ज किए गए।
छापेमारी के दौरान एजेंसियों ने ग्रेनेड, IED, पिस्टल, विस्फोटक और निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए। कार्रवाई की खास बात यह रही कि अलग–अलग राज्यों में मौजूद संदिग्धों के खिलाफ लगभग एक साथ ऑपरेशन चलाया गया। इससे एजेंसियों को नेटवर्क की अलग–अलग कड़ियों को जोड़ने और स्थानीय मॉड्यूल की भूमिका समझने में मदद मिली।
गृह मंत्रालय के सामने प्रस्ताव क्यों?
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि भट्टी का नेटवर्क किसी एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं है। इसकी गतिविधियों के तार उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक जुड़े होने का आरोप है।
इसी वजह से भट्टी को UAPA के तहत आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर सरकार यह कदम उठाती है तो उसके खिलाफ भारत में कानूनी कार्रवाई का दायरा और व्यापक हो जाएगा।
साथ ही, एजेंसियां उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों, फंडिंग चैनल और सीमा पार मौजूद संपर्कों की भी जांच कर सकेंगी।
आतंकी घोषित होने के बाद क्या बदलेगा?
UAPA के तहत किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित किए जाने के बाद उसके खिलाफ कई स्तरों पर कार्रवाई का रास्ता खुलता है। उसकी संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की जांच और कार्रवाई तेज हो सकती है। नेटवर्क को पैसा पहुंचाने वाले लोगों और लॉजिस्टिक मदद करने वालों पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।
अगर फंडिंग हवाला, ड्रग्स या दूसरे अवैध माध्यमों से होने की बात सामने आती है तो संबंधित एजेंसियां उन चैनलों की जांच कर सकती हैं। विदेश में मौजूद संपर्कों के मामले में इंटरपोल और दूसरे अंतरराष्ट्रीय सहयोग तंत्र का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
हालांकि किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने के बाद भी उसके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध अपील के प्रावधान अपनी जगह बने रहते हैं।
असली चुनौती नेटवर्क की अगली कड़ी तलाशना
सुरक्षा एजेंसियों के लिए भट्टी पर कार्रवाई सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। असली चुनौती उस पूरे नेटवर्क को खत्म करना है, जिसमें स्थानीय स्तर पर लोगों की भर्ती, रेकी, फंडिंग और हथियारों की सप्लाई जैसी कई कड़ियां जुड़ी हुई हैं।
अगर जांच में सीमा पार से निर्देश और फंडिंग के ठोस सबूत मिलते हैं तो मामला सिर्फ स्थानीय अपराध का नहीं रहेगा, बल्कि इसे भारत में चलाए जा रहे एक संगठित आतंकी नेटवर्क के तौर पर देखा जाएगा।
अगर UAPA के तहत भट्टी को आतंकी घोषित किया जाता है, तो आने वाले दिनों में जांच का फोकस इस बात पर रहेगा कि भारत में उसके नेटवर्क की कितनी कड़ियां मौजूद हैं और सीमा पार बैठे हैंडलर्स तक सुरक्षा एजेंसियां कितनी दूर तक पहुंच पाती हैं।































