जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट (GSO) से रियल-टाइम इमेजिंग करने वाले चुनिंदा देशों की सूची में अब भारत भी शामिल हो गया है। EOS-05 भारत का पहला अत्याधुनिक इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया गया है। इससे पहले अमेरिका और चीन ही इस तरह के अत्याधुनिक रियल-टाइम अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट का इस्तेमाल कर रहे थे।
इसरो का जियो-ऑर्बिट (भू-स्थिर कक्षा) में देश का पहला इमेजिंग सैटेलाइट भेजना भारत के लिए बहुत बड़ी कामयाबी है। इसे सीधे शब्दों में कहें तो अंतरिक्ष में भारत का एक ऐसा ‘स्थायी पहरेदार’ बैठ गया है, जिसकी पलकें कभी नहीं झपकतीं। आईए जानते है कि यह मिशन भारत के लिए इतना जरूरी क्यों है, और इससे सेना और आम आदमी को क्या फायदा होगा?
जियो-ऑर्बिट क्या है?
धरती से ठीक 35,786 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में एक खास रास्ता (कक्षा) है। धरती अपने अक्ष पर एक चक्कर 24 घंटे में पूरा करती है और इस ऊंचाई पर मौजूद सैटेलाइट भी ठीक 24 घंटे में ही धरती का एक चक्कर लगाता है। नतीजा यह होता है कि नीचे ज़मीन से देखने पर यह सैटेलाइट हमेशा आसमान में एक ही जगह टिका हुआ दिखाई देता है।
इमेजिंग सैटेलाइट क्या काम करता है?
यह एक तरह का बेहद ताकतवर उड़ता हुआ कैमरा है। इसमें हाई-टेक लेंस और सेंसर लगे होते हैं, जो अंतरिक्ष से धरती के नक्शे, जंगलों, बादलों, सड़कों और सीमाओं की साफ तस्वीरें खींचते हैं।
अब तक क्या होता था और अब क्या बदल गया?
अब तक भारत के जितने भी जासूसी या निगरानी कैमरे वाले सैटेलाइट थे, वे ‘निचली कक्षा’ (LEO यानी 500 से 800 किमी ऊपर) में चक्कर लगाते थे। ये सैटेलाइट धरती के चक्कर बहुत तेजी से लगाते हैं। यानी वे भारत के ऊपर से उड़ते हुए कुछ ही मिनटों में आगे निकल जाते थे। अगर लद्दाख या अरुणाचल सीमा की दोबारा तस्वीर लेनी हो, तो उनके दोबारा उसी जगह लौटने का कई दिन इंतजार करना पड़ता था।
लेकिन जियो-ऑर्बिट सैटेलाइट के साथ ऐसा नहीं है। यह भारत के ठीक ऊपर एक जगह स्थिर खड़ा रहेगा। यानी यह देश के ऊपर 24 घंटे और 365 दिन ‘लाइव वीडियो कॉल’ की तरह काम करेगा।
36,000 किमी ऊपर कैमरा लगाना आसान क्यों नहीं था?
इतनी दूर सैटेलाइट भेजना अंतरिक्ष विज्ञान की सबसे मुश्किल चुनौतियों में से एक है। पहला, 36 हजार किमी से धरती की साफ तस्वीर लेने के लिए बेहद भारी और बड़े टेलीस्कोपिक कैमरे चाहिए। दूसरा, इतने भारी वजन को इतनी ऊंचाई तक ले जाने के लिए भारत के सबसे भारी रॉकेट (जैसे बाहुबली रॉकेट LVM3 या GSLV) की जरूरत होती है। तीसरा, अंतरिक्ष के शून्य तापमान और झटकों के बीच कैमरे को बिल्कुल स्थिर रखना पड़ता है, क्योंकि वहां बाल बराबर भी कंपन हुआ तो तस्वीर पूरी तरह धुंधली हो जाएगी। इसरो के वैज्ञानिकों ने इस बेहद जटिल तकनीक पर महारत हासिल की है।
देश के लिए रणनीतिक जरूरत
भारत के तीनों तरफ संवेदनशील सीमाएं हैं—एक तरफ पाकिस्तान और दूसरी तरफ चीन और तीसरी तरफ बांग्लादेश में मौजूदा सरकार भारत के साथ खास सहयोग नहीं कर रही है। ऐसे में यह सैटेलाइट हमारी सेना के लिए सबसे बड़ा मददगार साबित होगा। यानी अब से सरहद पर कोई दुश्मन की हलचल नहीं छिपेगी। एलएसी (LAC) या एलओसी (LoC) पर दुश्मन कोई नया बंकर बना रहा हो, भारी तोपें या गाड़ियां आगे बढ़ा रहा हो—यह सैटेलाइट हर 20-30 मिनट में नई तस्वीर भेजकर अलर्ट कर देगा। सरप्राइज अटैक का खतरा बिल्कुल खत्म हो जाएगा।
यही नहीं नए सेटेलाईट से अब समुद्र में ड्रैगन पर नजर रख सकेगें। हिंद महासागर में चीनी युद्धपोतों और पनडुब्बियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। 36 हजार किमी ऊपर से यह सैटेलाइट पूरे समंदर पर नजर रखेगा कि कौन सा संदिग्ध जहाज किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
युद्ध या तनाव के वक्त सबसे कीमती चीज ‘समय’ होती है। जब सेना के कमांडरों को सीमा की ताजा तस्वीरें कुछ ही मिनटों में स्क्रीन पर मिलेंगी, तो वे बिना वक्त गंवाए सटीक फैसले ले सकेंगे।
आम जनता और किसानों को क्या फायदा मिलेगा?
यह सैटेलाइट सिर्फ सरहद की सुरक्षा के लिए नहीं है, बल्कि देश के आम नागरिक के जीवन और जान-माल की रक्षा में भी अहम भूमिका निभाएगा। देश को तूफान और चक्रवात की सटीक खबर मिलेगी। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में जब भी कोई चक्रवात उठेगा, तो उसकी दिशा और हवा की रफ्तार को यह मिनट-दर-मिनट ट्रैक करेगा। इससे तटीय इलाकों के लोगों को सही समय पर सुरक्षित निकाला जा सकेगा।
नेपाल जैसे किसी आपदा में पहाड़ों में बादल फटने या नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने की जानकारी फौरन मिलेगी, जिससे राहत-बचाव दल (NDRF) बिना देरी किए मौके पर पहुंच सकेंगे। जल्द जानकारी मिलने से जंगलों की आग पर जल्द काबू पाने में मदद मिलेगी। : गर्मियों में जंगलों में आग तेज़ी से फैलती है। इस उपग्रह के इंफ्रारेड कैमरे आग की चिंगारी भड़कते ही उसकी लोकेशन बता देंगे, जिससे बड़े नुकसान से पहले उसे बुझाया जा सकेगा।
सीधे शब्दों में कहें तो यह सैटेलाइट भारत का वह आसमानी सुरक्षा कवच है, जो शांति के समय विकास में हाथ बंटाएगा और संकट के समय देश की सीमाओं की रक्षा करेगा।
































