नोएडा के चर्चित निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है। शुक्रवार, 18 सितंबर को हरिद्वार में एक चाय की दुकान के अंदर कोली का शव फंदे से लटका मिला। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा है। हालांकि, मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है और मौत की सही वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद स्पष्ट होगी।
कोली की मौत की खबर मिलने के बाद निठारी कांड के पीड़ित परिवारों में भी नाराजगी और सवाल उठे। सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के बाहर पहुंचे कुछ पीड़ित परिवारों ने कहा कि घटना के करीब दो दशक बाद भी उन्हें अपने परिजनों की मौत का पूरा न्याय नहीं मिला है।
पीड़ित परिवारों में शामिल झब्बूलाल ने कोली की मौत को आत्महत्या मानने पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि अगर कोली को अपनी जान देनी होती तो वह जेल में भी ऐसा कर सकता था। उनका आरोप है कि कोली निठारी कांड से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण जानकारी सामने लाने वाला था, इसलिए उसकी हत्या की गई। हालांकि, हत्या की यह बात फिलहाल एक पीड़ित परिवार का आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
2005-06 में सामने आया था निठारी कांड
निठारी और आसपास के इलाकों से 2005-06 के दौरान कई बच्चे और महिलाएं लापता हुए थे। शिकायतों के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। दिसंबर 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के पीछे नाले और आसपास से मानव अवशेष मिलने के बाद मामला देशभर में सुर्खियों में आया। इस कोठी में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर रहते थे और सुरेंद्र कोली वहां घरेलू सहायक के रूप में काम करता था।
मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई। कोली और पंढेर के खिलाफ कई अलग-अलग मामले दर्ज हुए। कोली को अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया और उसे मौत की सजा भी सुनाई गई थी। हालांकि, बाद की न्यायिक प्रक्रिया में उसके खिलाफ कई मामलों में दोषसिद्धियां खत्म हो गईं।
सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में आखिरी मामले में भी किया बरी
निठारी कांड से जुड़े कुल 13 मामलों में सुरेंद्र कोली के खिलाफ मुकदमे चले। पहले 12 मामलों में उसे बरी किया जा चुका था। 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने रिम्पा हलदार मामले में भी उसकी दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जिन साक्ष्यों के आधार पर उसकी बाकी मामलों में दोषसिद्धियां टिक नहीं पाईं, उन्हीं परिस्थितियों में आखिरी मामले की दोषसिद्धि भी कायम नहीं रखी जा सकती। इसके बाद कोली की रिहाई का रास्ता साफ हुआ और वह करीब 19 साल जेल में रहने के बाद बाहर आया।
जेल से बाहर आने के बाद हरिद्वार में रहने लगा था
रिहाई के बाद कोली हरिद्वार चला गया था। हाल के दिनों में वह भूपतवाला इलाके में एक छोटी चाय की दुकान चला रहा था। रिपोर्टों के मुताबिक, वहां वह अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था और कुछ समय से इसी दुकान पर काम कर रहा था। 18 सितंबर को उसका शव दुकान के अंदर फंदे से लटका मिला। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित परिवारों का सवाल- आखिर उन्हें न्याय कब मिलेगा?
निठारी कांड के पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनके बच्चों और परिजनों के लापता होने और मौत के मामले में उन्हें आज भी कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। उनका आरोप है कि अगर जांच एजेंसियों ने शुरुआत में मामले की सही तरीके से जांच की होती तो स्थिति अलग हो सकती थी।
वहीं, सुरेंद्र कोली की मौत को लेकर पुलिस की शुरुआती जांच आत्महत्या की ओर इशारा कर रही है, लेकिन अभी जांच पूरी नहीं हुई है। इसलिए उसकी मौत के पीछे किसी साजिश या हत्या के दावे को फिलहाल प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच से ही मौत की परिस्थितियों की आगे की तस्वीर साफ होगी।





























