फ़ैज़पुर 1937: तिरंगे की डोर और राजनीति की स्मृति
दिसंबर 1937 की ठंडी सुबह। महाराष्ट्र का छोटा-सा कस्बा फ़ैज़पुर उस दिन भारत की राजनीति का केंद्र बन गया था। भारतीय ...
दिसंबर 1937 की ठंडी सुबह। महाराष्ट्र का छोटा-सा कस्बा फ़ैज़पुर उस दिन भारत की राजनीति का केंद्र बन गया था। भारतीय ...
जुलाई की उमस भरी शाम थी। बक्सर ज़िले के सहार थाना क्षेत्र का छोटा-सा गाँव बथानी टोला हमेशा की तरह अपनी ...
पाकिस्तान इस समय जिस तथाकथित “रणनीतिक रक्षा समझौते” का ढोल पीट रहा है, उसकी असलियत कुछ और है। इस्लामाबाद इसे ऐसे ...
पाकिस्तान का जन्म ही असुरक्षा और कट्टरता की ज़मीन पर हुआ था। 1947 के बाद से ही उसने अपनी राजनीतिक असफलताओं ...
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की फ़र्श पर जब भारतीय स्थायी प्रतिनिधि ने अपनी आवाज़ उठाई, तो वहाँ जो सिर्फ़ कूटनीतिक भाषण ...
दुनिया का इतिहास अक्सर विजेताओं के शब्दों में लिखा गया है। लेकिन कभी-कभी, अगर हम गहराई से देखें तो इस इतिहास ...
बिहार की राजनीति में जब “जंगलराज” शब्द उभरा, तो यह किसी विपक्षी नेता की गढ़ी हुई परिभाषा नहीं थी। यह उस ...
भारत की राजनीति में नेताओं की चर्चा अक्सर उनके चुनावी भाषणों, जनसभाओं की भीड़ या बड़े नारों तक सीमित रहती है। ...
तमिलनाडु की राजनीति और समाज में एक नाम दशकों से छाया हुआ है—ई.वी. रामासामी नायकर, जिन्हें उनके अनुयायी “पेरियार” यानी “महान ...
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अक्सर सच से ज़्यादा ज़ोर उस पर होता है कि किसका नैरेटिव दुनिया भर में सुना जाए। लेकिन ...
17 सितंबर—आज जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना जन्मदिन मना रहे हैं, तब यह महज़ कैलेंडर पर दर्ज़ एक तारीख ...
बिहार के औरंगाबाद ज़िले की सोनई नदी के किनारे बसा एक छोटा सा गांव—लक्ष्मणपुर बाथे। आज यह नाम भारतीय राजनीति और ...


©2026 TFI Media Private Limited