पश्चिम बंगाल के चुनावी समर का पहला चरण समाप्त होते ही राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है। एक तरफ जहाँ 91.91 प्रतिशत (लगभग 92%) के ऐतिहासिक मतदान ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है, वहीं दूसरी तरफ हिंसा की घटनाओं ने जुबानी जंग को और तेज कर दिया है। असम के मुख्यमंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता हिमंता बिस्वा सरमा ने बीजेपी उम्मीदवारों पर हुए हमलों के बाद तीखा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि “हिंसा करने वालों को सबक सिखाया जाएगा।” पहले चरण के इस भारी मतदान और सरमा के कड़े बयानों ने 29 अप्रैल को होने वाले अगले चरण के लिए दांव बेहद ऊंचे कर दिए हैं।
हिमंता का तीखा प्रहार: ‘हिंसा का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देंगे’
23 अप्रैल की शाम 6 बजे मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बंगाल की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अग्निमित्रा पॉल और सुवेंदु सरकार जैसे बीजेपी उम्मीदवारों को जानबूझकर निशाना बनाया गया और उन पर हमले किए गए। सरमा ने कहा, “जो लोग यह सोच रहे हैं कि वे डरा-धमकाकर या हमला करके चुनाव जीत जाएंगे, उन्हें यह जान लेना चाहिए कि उन्हें इसका कड़ा सबक सिखाया जाएगा।” बीजेपी इस चुनाव को केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि बंगाल में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को बहाल करने के संघर्ष के रूप में पेश कर रही है।
वोटिंग का ‘सुनामी’: 91.91% मतदान के मायने क्या हैं?
भारत निर्वाचन आयोग के आंकड़ों ने इस बार सबको स्तब्ध कर दिया है। पश्चिम बंगाल के पहले चरण में दर्ज हुआ 91.91 प्रतिशत मतदान यह दर्शाता है कि जनता के भीतर किसी बड़े बदलाव की छटपटाहट है या फिर अपनी पसंद की सरकार को बनाए रखने का जबरदस्त जुनून। कुछ जिलों में तो यह आंकड़ा 94 प्रतिशत को भी पार कर गया। दक्षिण दिनाजपुर 94.85 प्रतिशत के साथ सबसे आगे रहा, जबकि कूचबिहार में 94.54 प्रतिशत मतदान हुआ। बीरभूम (93.70%), जलपाईगुड़ी (93.23%) और मुर्शिदाबाद (92.93%) में भी जनता ने घरों से बाहर निकलकर लोकतंत्र के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता दिखाई। बीजेपी इस भारी मतदान को ‘परिवर्तन की लहर’ के रूप में देख रही है।
चुनावी अंकगणित: असम में 100 और बंगाल में 200 पार का दावा
असम के मुख्यमंत्री ने न केवल चेतावनी दी, बल्कि जीत का एक बड़ा दावा भी ठोक दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि बीजेपी असम में कम से कम 100 सीटें और पश्चिम बंगाल में 200 से अधिक सीटें जीतकर इतिहास रचेगी। सरमा ने कहा कि बंगाल की जनता अब हिंसा और डर के माहौल से बाहर निकलना चाहती है और यह रिकॉर्ड मतदान इसी बात का प्रमाण है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के योगदान की भी सराहना की, विशेष रूप से ‘विशेष गहन संशोधन’ (Special Intensive Revision – SIR) अभ्यास के लिए, और सुझाव दिया कि इसी तरह का अभ्यास असम में भी किया जाना चाहिए ताकि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित हो सके।
हिंसा के केंद्र में बीजेपी नेता: अग्निमित्रा पॉल और सुवेंदु सरकार पर हमला
पहले चरण के दौरान अग्निमित्रा पॉल और सुवेंदु सरकार सहित कई बीजेपी नेताओं के साथ हुई धक्का-मुक्की और हमलों ने राज्य के राजनीतिक माहौल को और अधिक ध्रुवीकृत कर दिया है। बीजेपी ने इन घटनाओं को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हताशा का प्रतीक बताया है। पार्टी का तर्क है कि जब सत्ताधारी दल को अपनी हार का डर सताता है, तो वह हिंसा का सहारा लेता है। हालांकि, टीएमसी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बीजेपी का चुनावी स्टंट बताया है। लेकिन हिमंता बिस्वा सरमा के हस्तक्षेप ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना दिया है।
अगले चरण की तैयारी: 29 अप्रैल का महामुकाबला
पहले चरण के इस शोर-शराबे और रिकॉर्ड वोटिंग के बाद अब सभी की नज़रें 29 अप्रैल को होने वाले अगले चरण पर टिकी हैं, जहाँ शेष 142 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होना है। 4 मई को होने वाली मतगणना यह तय करेगी कि बंगाल की इस ‘महा-वोटिंग’ ने किसे सत्ता के शिखर पर पहुँचाया है। हिमंता बिस्वा सरमा का बयान स्पष्ट करता है कि बीजेपी अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि बेहद आक्रामक मोड में है। पार्टी का मानना है कि पहले चरण ने जो मोमेंटम सेट किया है, वह उसे बंगाल में सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य तक ले जाएगा।



























