TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    र्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है

    धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, बोलें- जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटूंगा

    नितिन नबीन

    स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बीच BJP का बड़ा प्लान: युवाओं तक पहुंचेगी पार्टी, सांसदों-विधायकों को मिला विशेष जिम्मा

    पेपर लीक, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सियासत तेज

    पेपर लीक, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सियासत तेज, पीएम मोदी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की कही बात

    TCS केस में अदालत की अहम टिप्पणी

    TCS धर्म परिवर्तन केस: गर्भवती निदा खान को जमानत, कोर्ट ने दिया मानवीय आधार का हवाला

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    INS 'निपुण' भारतीय नौसेना का दूसरा स्वदेशी Diving Support Vessel (DSV)।

    INS निपुण: नेवी के बेड़े में शामिल होने वाला ये डाइविंग सपोर्ट वेसल इतना महत्वपूर्ण क्यों है ?

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव: पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से बदलेगी युद्ध की रणनीति

    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    क्या यूरोप पर 'आक्रमण' शुरू हो चुका है

    क्या यूरोप पर ‘आक्रमण’ शुरू हो चुका है? स्यूटा से उठ रहे वे सवाल जिन्हें अब यूरोप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद

    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद, कर्नाटक सरकार बदलना चाहती है पुराना नियम

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक

    ऑपरेशन सिंदूर: शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए दर्ज

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    र्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है

    धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, बोलें- जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटूंगा

    नितिन नबीन

    स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बीच BJP का बड़ा प्लान: युवाओं तक पहुंचेगी पार्टी, सांसदों-विधायकों को मिला विशेष जिम्मा

    पेपर लीक, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सियासत तेज

    पेपर लीक, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सियासत तेज, पीएम मोदी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की कही बात

    TCS केस में अदालत की अहम टिप्पणी

    TCS धर्म परिवर्तन केस: गर्भवती निदा खान को जमानत, कोर्ट ने दिया मानवीय आधार का हवाला

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    INS 'निपुण' भारतीय नौसेना का दूसरा स्वदेशी Diving Support Vessel (DSV)।

    INS निपुण: नेवी के बेड़े में शामिल होने वाला ये डाइविंग सपोर्ट वेसल इतना महत्वपूर्ण क्यों है ?

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव: पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से बदलेगी युद्ध की रणनीति

    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    क्या यूरोप पर 'आक्रमण' शुरू हो चुका है

    क्या यूरोप पर ‘आक्रमण’ शुरू हो चुका है? स्यूटा से उठ रहे वे सवाल जिन्हें अब यूरोप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद

    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद, कर्नाटक सरकार बदलना चाहती है पुराना नियम

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक

    ऑपरेशन सिंदूर: शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए दर्ज

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

मोदी जी ने इस कारण से फ़लस्तीन की यात्रा नहीं की, और सच वो नहीं जो आप समझते हैं

Kannan द्वारा Kannan
10 July 2017
in अमेरिकाज़
इज़राएल फ़लस्तीन मोदी

Image Courtesy: Firstpost

Share on FacebookShare on X

इतिहास पढ़ने से अधिक दिलचस्प है उसकी व्याख्या करना। वाद विवाद में नाम और तारीख याद करना आवश्यक है पर इसमें खो जाता इतिहास को पढ़ने का सार और उसका मुख्य उद्देश्य। इतिहास के एक अहम अध्याय से आज की व्याख्या करना और भी ज़्यादा दिलचस्प बनता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इज़राएल की यात्रा कर रहे हैं, पर सिर्फ इज़राएल की, न की फ़लस्तीन की।

ये भारत के मिडिल ईस्ट के साथ संबंध को एक अहम मोड़ देता है। कुछ साल पहले, ऐसे यात्रा की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। एक भारतीय प्रधानमंत्री इज़राएल की यात्रा कर रहा, ये अविश्वसनीय तो है ही, उससे भी ज़्यादा अविश्वसनीय है इस यात्रा में फ़लस्तीन का नामोनिशान न होना।

संबंधितपोस्ट

लंदन में CJP प्रदर्शन के समर्थन कार्यक्रम में पहुंचीं ग्रेटा थनबर्ग, भारत में तेज हुई राजनीतिक बहस

मॉनसून ने पूरे देश को किया कवर, दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश से जनजीवन प्रभावित

मोहन भागवत बोले- विभाजन के बाद भारत आए लोग ‘शरणार्थी’ नहीं, बल्कि संघर्ष के योद्धा थे

और लोड करें

भारत के संबंध दूसरे देशों से कैसे संभाले जाते हैं, इसमे पहले के रवैये और नरेंद्र मोदी के रवैये में ज़मीन आसमान का फर्क है। चेहरे भले ही बदलें हो, पर सिक्का तो सदैव नेहरू के नीतियों का चला है। ज़रूरत के हिसाब से इन्दिरा गांधी और पीवी नरसिम्हा राव ने कुछ बदलाव किए। वही दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी ने आवश्यकतानुसार विदेश नीति का निर्माण किया, जिसमें भारत के एक देश के तौर पर पड़ने वाली ज़रूरत को दायरे में रखते हुये किया गया।

नेहरू अपने लिए एक ऐसी छवि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनाना चाहते थे, जिसमें वो न तो पूंजीवादियों के प्रति आसक्त दिखें, और न ही साम्यवादियों के प्रति [ये अलग बात है की उनकी रूस के प्रति आसक्ति कुछ और ही बयां करती थी]  जहां ये लड़ाई में दीवार पर बैठने में विश्वास रखते थे, मोदी के पास ऐसा नौटंकी करने की सुविधा न थी, वो भी ऐसे विश्व में जो बहुआयामी है, जहां पर कई समुदाय अपने अपने तरह के पूंजीवाद या साम्यवाद या धार्मिक उन्माद या फिर राष्ट्रवाद की उपासना करते हैं

कहने को साम्यवादी चीन व्यक्तिगत अधिकारों की आहुती देकर एक निहायती पूंजीवादी राज्य की तरह काम करता है। पूंजीवादी अमेरिका उधर न सिर्फ व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा करता है, अपितु वैश्वीकरण को भी बाहर फेंकता है, क्योंकि वह राष्ट्रवादी भी बन रहा है। हिटलर के अपराधों के लिए हर वक़्त क्षमा मांगने वाली यूरोप इतनी उदारवादी तो कभी न थी, जबकि रानी के साम्राज्यवादी द्वीप अब अपने ही क्षेत्रीय समुदाय को ठेंगा दिखा रही है। अरब तो एक अलग ही गुट है, और एक ही व्यापारी से एक दूसरे को मारने के लिए  हथियार खरीदेंगे। क्योंकि दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध अब एक आम बात बन चुकी है, तो शायद मानव जीवन इतना सस्ता भी कभी न रहा होगा।

स्वतन्त्रता के पश्चात भारत का इज़राएल के प्रति दो बिन्दुओं द्वारा संचालित था। एक था स्थानीय मुस्लिम आबादी का तुर्की अथवा इस्लामी खिलाफत के प्रति वफादारी। दूसरी है कैसे इज़राएल अपने वर्तमान स्वरूप में आया। इज़राएल ने अपने आप को एक राष्ट्रवादी लोकतन्त्र में परिवर्तित किया, उसी कारण को अपनाया जिसकी वजह से करोड़ों यहूदियों को अपना देश छोडना पड़ा। और इनहि दो कारणों ने भारत को इज़राएल से दूर बनाए रखा।

अब दूसरे कारण पर प्रकाश डालें। अपने आप को पीड़ित कहते हुये यहूदी जर्मनी से भागे और कई अन्य यहूदियों के साथ अपने मातृभूमि वापस आए, किसी रीति को पूर्ण करने। पर यहाँ एक समस्या थी, यहाँ दो हज़ार वर्षों से व्याप्त अरबियों को हटाना। अरबों को उनके घर से हटाना निंदनीय है, क्योंकि यहूदी जिस भी देश में थे, वहाँ पर शरणार्थी के अलावा कुछ नहीं थे। अपने दोगलेपन के लिए कुख्यात अरबी सहयोगियों ने इनकी प्रार्थनाएँ अनसुनी कर दी। भारत चूंकि तटस्थ था, या उसका नाटक कर रहा था, इस मसले पर फ़लस्तीन के साथ खड़े होने की शपथ ली। क्योंकि विभाजन का दर्द भारत ने भी झेला था, इसलिए वो इज़राएलियों के अरबों को उनके घर से खदेड़ने के कारण इज़राएल के पक्ष में नहीं खड़ा होना चाहता  थी – ऐसे इसे वर्षों तक समझाया गया।

इसके साथ भारतीय मुसलमानों का प्रभुत्व देखिये, इनके साथ समस्या ये हैं की यह सीमापार के उपदेशों को शाश्वत सत्य समझने की भूल करते हैं। यहूदियों द्वारा कथित रूप से भगाये गए अरबों में ईसाई और मुस्लिम दोनों थे, पर सब समझते हैं की सारे अरबी मुसलमान है, और इनके लिए ईसाई अरब की सोच का कोई स्थान न था। जब तक फर्क समझा, अरब में ईसाई ही न बचे। विशाल मुस्लिम आबादी को मनाने और अंदरूनी अशांति को रोकने के लिए भारत ने फ़लस्तीन के प्रति हमदर्दी बढ़ानी शुरू की। निस्संदेह फ़लस्तीन को उसके साथ हुए अन्याय के लिए सहानुभूति मिलना अवश्यंभावी थी, पर भारतीय मुसलमानों का प्रभुत्व ही मुख्य कारण था की क्यों भारत ने इज़राएल को ठेंगा दिखाया।

पर इसके पश्चात भी इज़राएल एक ताकतवर मुल्क के तौर पर खड़ा हुआ, और भारत ने राव के वक़्त गर्मजोशी भी दिखाई, हालांकि वो ज़्यादा नहीं थी। पर इस पृष्ठभूमि में मोदी की यात्रा इस रीति के सर्वथा विरुद्ध लगती है।

कई महान आलोचक हैं असदुद्दीन ओवैसी की तरह , जो मोदी को फ़लस्तीन में भी देखना चाहते थे। उनके अनुसार ‘फ़लस्तीन के मक़सद का क्या?’ उन्होने यह नहीं बताया की कैसे ये कथित इस्लामिक मुल्क वक़्त बेवक्त भारत के साथ विश्वासघात करते आए हैं और फ़लस्तीन का कभी साथ नहीं दिया? चर्चा भी गरम थी ये कैसे इज़राएल और सऊदी को एकत्रित कर ईरान के खिलाफ युद्ध करना चाहते हैं। और तो और, सद्दाम हुसैन वाले इराक को छोडकर किसी ने भी हमारा कश्मीर मुद्दे पर कभी समर्थन नहीं किया, बल्कि पाकिस्तान को बेहिसाब मदद दी।

जो बेइज्जती अरब भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों की करते हैं, उससे अभी कुलीन भारतीय मुसलमानों की आँखें नहीं खुली है, जो अपने आप को हिंदुओं से अरब के नजदीक समझते हैं।

अब ये सब राजनैतिक कारण है और मोदी के विदेश नीति का एक छोटा सा हिस्सा है। पर जो इस विदेश नीति का मूल आधार है, वो है व्यापार। खुद एक ‘चतुर बनिया’ होते हुये मोदी सिर्फ उनही चीजों पर उस देश से संधि करते  हैं, जो वो चाहते है। भारत के कश्मीर राज्य पर ईरान के कडवे बोल के बाद भी वे अरबों डॉलर के एक तेल क्षेत्र का निर्माण करने पर मुहर लगा रहे हैं। फ़लस्तीन भारत को क्या दे सकता है? कुछ नहीं।

ये सही समय है भारत के लिए आगे बढ़कर समय के साथ नीतियाँ बदलने का। कोई भी नीति, यहाँ तक की वर्तमान नीति भी हर वक़्त नहीं टिक सकती। समय के साथ चीज़ें भी बदलती हैं और रिश्ते भी।

शायद फ़लस्तीन की यात्रा न करने का अर्थ अरब देशों के लिए ये संकेत है की अब वे भारत के अंदरूनी मामलों में टांग अड़ाना बंद करे। इज़राएल यात्रा भारत की आवश्यकता है। शायद बुरा लगे, पर विदेश नीतियाँ भी आज एक गला काट व्यापार है।

Tags: इज़राइलइजराइल-फ़लस्तीननरेन्द्र मोदीप्रधानमंत्री मोदीभारतभारत इजराइल नीति
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

मनमोहन सिंह ने इस ओछी हरकत से अपना नाम इतिहास के काले पन्नो में दर्ज करवाया लिया है

अगली पोस्ट

मोरारजी देसाई का विश्वासघात! अपने देश को छला और पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान जीता

संबंधित पोस्ट

‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?
अमेरिकाज़

‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

22 May 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों एक बेहद अजीब और संवेदनशील दुविधा में फंस गए हैं। यह मामला सिर्फ व्हाइट हाउस की फाइलों या अंतरराष्ट्रीय...

वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है
अमेरिकाज़

वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

8 January 2026

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पैदा होने वाले तनाव अक्सर वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन जाते हैं, खासकर जैसा कि अमेरिका और...

भूमध्यसागर में भारत की दहाड़: आईएनएस त्रिकंद ने बढ़ाया नौसैनिक परचम
अमेरिकाज़

भूमध्यसागर में भारत की दहाड़: आईएनएस त्रिकंद ने बढ़ाया नौसैनिक परचम

15 September 2025

जब भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस त्रिकंद भूमध्यसागर की लहरों पर उतरा, तो यह सिर्फ एक साधारण तैनाती नहीं थी। यह उस भारत की पहचान...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

POJK ERUPTS IN PROTEST

POJK ERUPTS IN PROTEST

00:02:53

The Indian Air Force Mission That Broke Pakistan's Backbone at Tiger Hill | Op Safed Sagar

00:58:34

Pakistan’s Plebiscite Claim: The Missing Context of the UN Framework

00:03:23

TRUMP'S PHARMA TARIFF SHOCK

00:03:54

A Decade After 709 Crackdown: Remembering China's Human Rights Lawyers

00:04:16
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited