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भारत में मास्टर कार्ड और वीज़ा कार्ड की धज्जियां उड़ाने के बाद अब ग्लोबल हो रहा भारत का ‘रुपे कार्ड’

Vikrant Thardak द्वारा Vikrant Thardak
20 August 2019
in व्यवसाय
भारत में मास्टर कार्ड और वीज़ा कार्ड की धज्जियां उड़ाने के बाद अब ग्लोबल हो रहा भारत का ‘रुपे कार्ड’

(PC: Maps of India)

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प्रधानमंत्री मोदी 23 से 25 अगस्त तक संयुक्त अरब अमीरात यानि यूएई और बहरीन की यात्रा पर रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी की संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा इस मायने में भी खास है क्योंकि इस दौरान वह यूएई का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘आर्डर आफ जायद’ ग्रहण करेंगे। लेकिन जो सबसे महत्वपूर्ण बात है वह ये है कि इस दौरान वह इन दोनों देशों में भारत के अपने ‘रूपे कार्ड ’की शुरूआत करेंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री ने ‘रूपे-कार्ड’ को भूटान में लॉंच किया था। तथा इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मई 2018 को सिंगापुर में भी रुपे कार्ड, भीम और एसबीआई ऐप को लॉन्च कर चुके हैं।

बता दें कि रुपे एक घरेलू प्लास्टिक कार्ड है, जिसका मकसद देश में पेमेंट सिस्टम का एकीकरण करना है और यह मूलतः स्वदेशी भुगतान प्रणाली पर आधारित एक एटीएम कार्ड है। पहले यह केवल भारत में ही मान्य था लेकिन अब ये विश्व के 195 देशों में मान्य है। भारत में कार्ड लेन-देन प्रणाली में अमेरिकी कंपनियों जैसे मास्टर कार्ड और वीज़ा कार्ड को पछाड़ने के बाद अब रुपे कार्ड अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम रौशन करने की ओर अग्रसर है। भारत जैसे बड़े मार्केट में पिछड़ चुकी इन कंपनियों के लिए यह खतरे की घंटी है। ये रूपे कार्ड की अभूतपूर्व सफलता ही है कि इसकी लोकप्रियता भारत के बाहर भी बढ़ रही है। तभी तो भूटान, मालदीव और सिंगापूर में भी अब ये शुरू हो चुका है। अब यूएई और बहरीन में भी पीएम मोदी इसे जल्द ही लॉन्च करने वाले हैं। मतलब साफ़ है कि अब भारत की घरेलू कंपनी ‘रूपे’ विश्व के अन्य देशों में भी अपनी वर्चस्वता बनाने के लिए तैयार है।

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उल्लेखनीय है कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने ‘रूपे कार्ड’ को वर्ष 2011 में विकसित किया था और इसका एक ही मकसद था कि देश के लोग घरेलू कार्ड प्रणाली का ही उपयोग करें, जिससे लेन-देन पर शुल्क विदेशी कार्ड्स की तुलना में कम भी हो तथा वह शुल्क देश में ही रह जाए ताकि भारत का पैसा भारत से बाहर ना जाये। स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से देश हित में ‘रूपे कार्ड’  और डिजिटल ट्रांजेक्शन प्लैटफॉर्म यूपीआई प्रयोग करने का आह्वान किया था। जिसके बाद रूपे और यूपीआई द्वारा लेन-देन में भारी बढ़ोतरी देखी गयी।

इससे पहले देश में भुगतान के लिए वीजा और मास्टर कार्ड के डेबिट कार्ड तथा क्रेडिट कार्ड प्रचलन में था और ये कार्ड विदेशी भुगतान प्रणाली पर आधारित है। भारत के बैंक हर साल वीजा और मास्टर कार्ड को डेबिट और क्रेडिट कार्ड की पेमेंट प्रोसेस करने के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की फीस चुकाते थे। लेकिन ‘रूपेकार्ड’ के आने से बैंको को भी राहत मिली क्योंकि ‘रूपे’ के इस्तेमाल पर बैंकों को विदेशी कंपनियों के कार्ड के इस्तेमाल के मुक़ाबले काफी कम शुल्क देना पड़ता है। रूपे कार्ड के इस्तेमाल के बदले दुकानदार हर ट्रांजेक्शन के लिए अभी करीब 1.5-2 फीसदी कमीशन चुकाते हैं, लेकिन वीजा और मास्टर कार्ड के मुकाबले रूपे में ये कमीशन 30 फीसदी कम है।

नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद मोदी सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की शुरुआत की थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार सार्वजनिक रूप से भारतीय पेमेंट गेटवे रुपे के इस्तेमाल की अपील करते रहे हैं। नोटबंदी के बाद भारत में कार्ड से लेन-देन दोगुना होकर 51 बिलियन डॉलर पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत खोले गए सभी खातों के लिए रुपे कार्ड जारी किये गए थे जिससे अमेरिका की दिग्गज पेमेंट गेटवे कंपनियां जैसे मास्टरकार्ड और वीजा का दबदबा कम हो चुका है। भारत के लगभग 1 बिलियन डेबिट और क्रेडिट कार्ड में से लगभग आधे से अधिक यानि करीब 58 प्रतिशत कार्ड अब रुपे पेमेंट सिस्टम के तहत काम कर रहे हैं। रूपे के आने से पहले केवल 35 बैंक ही डेबिट कार्ड जारी करते थे लेकिन अब 1000 से ज्यादा बैंक डेबिट कार्ड जारी करते है।

द हिन्दू बिजनेस लाइन की एक रिपोर्ट के अनुसार ‘रूपे’ आधारित कार्डो पर लेनदेन का मूल्य और मात्रा दोनों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली। वित्त वर्ष 2016 में रूपे कार्ड से जहां सिर्फ 1127 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था, तो वहीं इस वर्ष यह लेन-देन 104 गुना बढ़ कर 1,17,400 करोड़ हो गया। इसके अलावा ‘रूपे’ के द्वारा लेन-देन की संख्या में भी भारी वृद्धि हुई है। वर्ष 2016 के दौरान रूपे कार्ड के माध्यम से 60 लाख बार लेन-देन हुआ था, जबकि मौजूदा वक्त में इस कार्ड के माध्यम से 1.1 अरब बार लेन-देन हो चुका है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के आंकड़ों के मुताबिक देश के प्रमुख भुगतान प्लेटफॉर्म यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से लेनदेन 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। इसकी सफलता को देखते हुए भारत सरकार ने इसे विश्वव्यापी बनाने का फैसला लिया था। डिजिटल भुगतान के संबंध में सुझाव देने के लिए रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने पिछले महीने नीलेकणि की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनायी थी। इस समिति ने भी यूपीआई को ग्लोबल बनाने, डिजिटल लेनदेन पर लगने वाले शुल्क को हटाने, चौबीस घंटे आरटीजीएस और एनईएफटी की सुविधा देने और पॉइंट ऑफ सेल मशीन के आयात को शुल्क मुक्त करने समेत कई सुझाव दिए थे।

यही नहीं लाइवमिंट में प्रकाशित एक लेख में ‘Privacy 3.0 : Unlocking Our Data Driven Future’ के लेखक एवं ट्राइलीगल के पार्टनर राहुल मत्थान ने भी इस बात पर ज़ोर डाला है कि कैसे यूपीआई विश्व स्तरीय है और अब समय आ चुका है कि इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया जाए। मत्थान ने इस आर्टिकल में लिखा था कि, ‘यूपीआई को भले ही विकेंद्रित न कर पायें, परंतु हम जानते हैं कि यह कैसे पैची मोबाइल नेटवर्क पर भी सुचारु रूप से काम करता है”। सरकार ने रुपे कार्ड की शुरुआत भी वन नेशन वन कार्ड योजना के तहत शुरू किया था। और सरकार की ये योजना इस दिशा में सफल भी हो रही है।

भारत की स्वदेशी भुगतान प्रणाली पर आधारित रुपे कार्ड की सफलता से बौखलाकर अमेरिकी कंपनी वीजा और मास्टरकार्ड, दोनों ने ही अमेरिकी सरकार से शिकायत की थी और भारत सरकार पर ‘रूपे’ के लिए संरक्षणवादी नीतियों के आरोप लगाए थे। रूपे की बढ़ती लोकप्रियता और इस्तेमाल की वजह से इन दोनों ही कंपनियों का मार्केट शेयर बिल्कुल गिर चुका है और अब विश्व के अन्य देशों में भी यही होने वाला है। वीजा कार्ड और मास्टर कार्ड 3 दशको तक भारत में काफी मुनाफा कमाते रहे हैं लेकिन अब भारतीय कंपनी रूपे (RUPAY) इस क्षेत्र में अपनी वर्चस्वता की ओर बढ़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस पहल से जहां रूपे भुगतान प्रणाली का अंतरराष्ट्रीयकरण शुरू होगा वहीं इससे अरबों डालर के लेनदेन का मार्ग भी प्रशस्त होगा। जिससे इस कंपनी का मार्केट शेयर और भी बढ़ेगा तथा भारत की इस कंपनी की विश्व में स्वीकार्यता बढ़ेगी। यह भारत के लिए गर्व की बात है।

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