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‘चीन के खिलाफ sanctions की लाइन लगने वाली है’, अमेरिका ने चीन के पीछे अपनी खुफिया एजेंसी को लगा दिया है

Animesh Pandey द्वारा Animesh Pandey
9 July 2020
in विश्व
एफबीआई
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अब अमेरिका ने चीन को उसकी औकात बताने के लिए एफ़बीआई को मैदान में उतारा है। दरअसल, चीन पर अमेरिकी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (बौद्धिक संपत्ति) को चोरी करने केआरोप लगते रहे हैं, और इससे अब चीन पर बड़े और तगड़े प्रतिबंध लगने के कयास लगाए जा रहे हैं।

अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन पर पिछले कुछ महीनों से चीन के विरुद्ध अमेरिका के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (बौद्धिक संपत्ति) की चोरी को लेकर चीन के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई की मांग की गई है, और अमेरिका के लिए वर्तमान समय किसी सुनहरे अवसर से कम नहीं है। अब चूंकि एफ़बीआई मैदान में उतर चुकी है, तो इसका अर्थ है कि अमेरिका चीन को बर्बाद करने के लिए उसे ग्लोबल डॉलर सिस्टम से भी उखाड़ फेंकने को तैयार है।

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FBI के निदेशक क्रिस्‍टोफर रे ने स्वयं इस दिशा में एफ़बीआई की योजनाओं के बारे में संक्षेप में बताते हुए कहा की अमेरिका चीन की हर गतिविधि का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होने चीनी इंटेलिजेंस के प्रति अमेरिकियों और विश्व के अन्य देशों को आगाह किया है, क्योंकि चीन अमेरिका और बाकी दुनिया के लिए काफी लंबे समय तक किसी खतरे से कम नहीं होगा।

परंतु एफबीआई के निदेशक क्रिस्टोफर रे वहीं पर नहीं रुके। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि चीन द्वारा इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की चोरी इस स्तर पर की जाती है कि इसे आराम से मानव इतिहास का सबसे बड़ा धन हस्तांतरण माना जा सकता है। एफबीआई के निदेशक क्रिस्टोफर रे के अनुसार बीजिंग अमेरिकी इंटेलेक्चुअल संपत्ति चुराकर अपने कंपनियों को अनुचित तरह से मालामाल बना रहे हैं। उनके अनुसार, “चीन अपने आप को विश्व की इकलौती महाशक्ति बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है। इसे वह बर्बरतापूर्ण तरह से पूरा भी कर सकता है। चीन सत्ता का भूखा है, और वह इसके  लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है”। उन्‍होंने चीन पर गंभीर आरोप लगाते हुए ये भी कहा है कि आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चीन जासूसी करता है जो अमेरिका के लिए बड़ा खतरा है।

एफबीआई के निदेशक क्रिस्टोफर रे ने आगे कहा,

‘अमेरिका में वर्तमान में चल रहे लगभग 5,000 सक्रिय एफबीआई काउंटर इंटेलिजेंस मामलों में से लगभग आधे चीन से संबंधित हैं। अब तो हालत यह है कि एफबीआई हर 10 घंटे में चीन-संबंधी नया मामला देख रही है।’

अमेरिका को अब आभास हो चुका है कि चीन उसके देश और वर्तमान वैश्विक व्यवस्था के लिए कितना बड़ा खतरा बन चुका है। चीन बहुत बड़े ‘रिवर्स टेक्नोलॉजी’ का स्वामी है, जिसके अंतर्गत दूसरे देशों के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की चोरी के दम पर अर्थव्यवस्था चलाई जाती है। अब चीनी कंपनियों को ही देख लीजिये, ये अमेरिकी कंपनियों की किस तरह से नकल करती है। इतना ही नहीं, अब चीन यूएसए और रूस के बीच के वर्चस्व की लड़ाई में तीसरे खिलाड़ी की भांति प्रवेश ले चुका है, और ऐसे में अमेरिका चीन को बिलकुल भी हल्के में नहीं ले सकता। ऐसे में एफ़बीआई द्वारा चीन की हेकड़ी को नियंत्रण में लाने के लिए मैदान में उतरना चीन के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं होगा।

चीन के खिलाफ इस बीच हर 10 घंटे में एक इन्वेस्टीगेशन खुल रही है जिसका अर्थ ये है कि एक दिन में दो इन्वेस्टीगेशन चीन के खिलाफ खुल रही है और ये चीन को उसकी करतूतों के लिए जवाबदेही तय करेगा। चीन के खिलाफ अमेरिका भविष्य में भी कई तरह के सैंक्शंस लगा सकता है जैसे उसने हाल में किया है। चाहे चीनी कंपनियों को डीलिस्ट [delist] करना हो, उइगर मुसलमानों पर अत्याचार करने वाले चीनी अफसरों के विरुद्ध प्रतिबंध लगाने हो, या फिर तिब्‍बत एक्‍ट के तहत चीनी अधिकारियों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाना हो, या फिर ताइवान और तिब्बत की स्वतन्त्रता के लिए समर्थन जताना हो, अमेरिका ने चीन को खुलेआम चुनौती देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।  अमेरिका का ऐसा रुख इससे पहले रूस के खिलाफ देखने को मिला है और अब चीन अमेरिका के रडार पर है जो आने वाले समय में चीन की महाशक्ति बनने के सपने पर जोरदार ब्रेक लगाने वाली है।

अमेरिका ने अपने आपको चीन के पीछे ठीक वैसे ही लगाया है जैसे कभी रूस के पीछे लगाया था। चीन को यदि अमेरिका से भिड़ंत का इतना ही शौक है, तो उसे ये भी ध्यान रखना चाहिए कि यदि अमेरिका ने अपने sanction लगा दिये, तो चीन की हालत बद से बदतर हो जाएगी। उदाहरण के लिए रूस और ईरान को ही देख लीजिये। अमेरिका ने पिछले कुछ वर्षों में इन दोनों देशों पर ताबड़तोड़ sanction जारी किए हैं, जिससे दोनों लगभग आधी से अधिक दुनिया से अलग थलग पड़ चुका है। ईरान की आर्थिक हालत बहुत पतली हो चुकी है, और हालांकि रूस के हालत ईरान जैसे तो बिलकुल नहीं है, परंतु रूस की अर्थव्यवस्था को भी बहुत भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में चीन के लिए इस समय अमेरिका से पंगा मोल लेना खतरे से खाली नहीं होगा।

यदि अमेरिका ने चीन पर बड़े और तगड़े प्रतिबंध लगाए हैं, तो बीजिंग की डावांडोल अर्थव्यवस्था पूरी तरह डूब जाएगी। बीजिंग के हालात वैसे भी अभी ठीक नहीं है, और अब अमेरिका के रुख को देखते हुए चीनी अर्थव्यवस्था का डूबना लगभग तय है।

 

Tags: अमेरिकाचीन
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