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“ये विवाद चीन को बर्बाद कर देगा”, बॉर्डर अब शांत है, लेकिन 2 महीनों में चीन ने जो खोया, उसका क्या?

60 दिन में चीन घोड़े से गधा बन गया...

Vikrant Thardak द्वारा Vikrant Thardak
8 July 2020
in समीक्षा
जिनपिंग

(PC: TIME)

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5 मई को भारत-चीन के बीच शुरू हुआ बॉर्डर विवाद आखिरकार 5 जुलाई को सुलझता दिखाई दिया, जब दोनों ओर से यह साफ कर दिया गया कि वे अपनी-अपनी सेनाओं को LAC से 2 किमी पीछे लेकर जाएंगे। भारतीय सेना ने एक बयान जारी कर कहा है “चीनी सेना अब अपने सैनिकों, वाहनों और टैंट्स को पीछे ले जा रही है। कोर कमांडर स्तर पर बातचीत के बाद चीनी सेना बॉर्डर से 2 किलोमीटर पीछे हटने को तैयार हो गयी है”। यानि कुल मिलाकर अब चीन बॉर्डर पर उसी स्थिति में पहुँच गया है, जहां वह आज से लगभग 2 महीने पहले था। लेकिन यहाँ बड़ा सवाल यह है कि चीन को बॉर्डर पर अपनी इस आक्रामकता के लिए आखिर कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। पिछले 2 महीनों में चीन ने इतना कुछ खो दिया है कि अगर आप भारत के साथ विवाद को चीन के इतिहास की सबसे महंगी गलती कहेंगे, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। चीन ने खोया तो बहुत कुछ, लेकिन उसे कुछ मिला तो बस धिक्कार और लानत! आइए देखते हैं कि चीन ने पिछले दो महीनों में क्या-क्या खो दिया है।

  1. अपने सैनिक खोये : किसी विवाद, झड़प या युद्ध में चीन ने अपने सैनिक पिछले 50 सालों में नहीं खोये थे। 15 जून की घटना से पहले आखिरी बार भारत-चीन के बीच ऐसी हिंसक मुठभेड़ वर्ष 1967 में हुई थी, जिसमें 88 भारतीय सैनिकों के अलावा 300 चीनी सैनिकों की मौत हुई थी। उसके बाद अब जाकर चीन को पता चला है कि युद्ध के मैदान में लड़ना किसे कहते हैं। बता दें कि 15 जून की रात को मुठभेड़ में चीन के 40 से ज़्यादा सैनिकों की बलि चढ़ा दी गयी थी।
  2. अपना रुतबा और अपना प्रभाव खो दिया: भारत-चीन विवाद से पहले चीन अपनी सेना का गुणगान करते नहीं थकता था। वह अपनी सेना को दुनिया की सबसे सर्वश्रेष्ठ और अभेद्य सेना बताता था। हालांकि, भारत के साथ विवाद के बाद दुनिया में ये संदेश गया कि चीन के सैनिक सिर्फ गरजने वाले बादल हैं, बरसने वाले नहीं! अपनी सेना की जो छवि बनाने में चीन को दशकों का समय लग गया, उसको भारत ने एक दिन में उखाड़ फेंक दिया।
  3. सभी दोस्त खो दिये: चीन के पास दोस्त के नाम पर चुनिन्दा देश हैं। वे हैं उत्तर कोरिया, नेपाल और पाकिस्तान! तीनों ही देशों का अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में कोई खास योगदान नहीं है। पहले जो देश China का समर्थन कर भी रहे थे, वे भी बॉर्डर पर चीनी आक्रामकता देख अपना रुख बदलने पर मजबूर हो गए। पहले जर्मनी, इटली समेत यूरोप के कई देश खुलकर चीन का समर्थन कर रहे थे, लेकिन अब वे भी निष्पक्ष हो चुके हैं और समय पड़ने पर चीन की आलोचना भी कर रहे हैं।
  4. जिस ज़मीन पर दावा ठोका, वो ज़मीन खो दी: चीन ने जिस ज़मीन के लिए भारत के खिलाफ ये पूरा विवाद बढ़ाया और सैनिक खोये, चीन को आखिर में वो ज़मीन ही नहीं मिली। China ने भारत की गलवान घाटी को अपना बताया था, जिसे भारत ने साफ तौर पर खारिज कर दिया। इतना ही नहीं, जब पीएम मोदी ने लेह में जाकर हुंकार भरी और अजीत डोभाल ने कड़े शब्दों में चीनी विदेश मंत्री के सामने अपना मत पेश किया, तो चीन को मजबूर होकर पीछे हटना ही पड़ा। उसे वो मिला ही नहीं, जिसे वो कल तक अपना बता रहा था।
  5. प्रोपेगैंडे को बड़ी चोट: China अगर किसी चीज़ में निपुण है तो वह है अपनी सेना, अपने मंत्रालयों और अपनी मीडिया के जरिये दुनिया में प्रोपेगैंडा फैलाने में। भारत के मामले में वह बुरी तरह विफल साबित हुआ। China का Global Times बड़ी बड़ी हुंकार भरता रहा और भारत के सैनिकों ने बॉर्डर पर अपना दम-खम दिखा भी दिया। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर भारतीय यूजर्स के हाथों जिस प्रकार चीनी मीडिया की हर दिन ई-लिंचिंग होती है, वह भी अपने-आप में हास्यस्पद है।
  6. भारत का बड़ा बाज़ार खो दिया: चीन ने बॉर्डर पर अपनी आक्रामकता दिखाकर भारत के 1.3 अरब लोगों के बाज़ार खो दिया। भारत ने चीन की 59 एप्स ब्लॉक कर दी। इसी के साथ ही भारत सरकार ने अपने प्रोजेक्ट्स से सभी चीनी कंपनियों को बाहर कर दिया। आसान भाषा में कहें तो भारत के खिलाफ आक्रामकता दिखाने के लिए China को करोड़ों-अरबों रुपयों की चपत लग गयी, और हासिल हुआ कुछ भी नहीं!
  7. एक अच्छा पड़ोसी खो दिया: भारत शुरू से ही एक अच्छा पड़ोसी रहा है। भारत ने ना तो कभी UN में China को घेरने की कोशिश की, और न ही भारत ने China के लिए कोई कूटनीतिक और रणनीतिक खतरा पैदा किया। अब भारत सरकार ने अपनी इस नीति को छोड़ दिया है। भारत ने वन China पॉलिसी को कूड़े के ढेर में फेंकते हुए हाल ही में Hong-Kong मुद्दे पर UN में अपनी बात कही।
  8. टेक बाज़ार बर्बाद: भारत से पंगा लेने के बाद China की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद ज़रूरी टेक बाज़ार अब बर्बादी की कगार पर पहुँचने वाला है। भारत पहले ही 59 चीनी एप्स को ब्लॉक कर चुका है। भारत की देखा-देखी में अब अमेरिका भी China के टेक बाज़ार को बर्बाद करने के लिए चीनी टेक कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। अमेरिका अपने यहाँ से हुवावे और ZTE को बैन कर चुका है। वहीं भारत भी अनौपचारिक रूप से हुवावे को प्रतिबंधित कर चुका है।
  9. ट्रम्प की जीत पक्की: China को जिसका सबसे ज़्यादा डर सता रहा था, अब ठीक वही होने जा रहा है। भारत के खिलाफ China के कड़े रुख के बाद अमेरिका को चीन के खिलाफ सैन्य दमखम दिखाने का मौका मिल गया। अमेरिका में चीन विरोधी रुख दिखाने के लिए ट्रम्प की लोकप्रियता बढ़े ही जा रही है। ऐसे में भारत से पंगा लेकर अब China ने अमेरिका को अपना दश्मन बना लिया है। इससे आगामी चुनावों में ट्रम्प की जीत पक्की हो गयी है।

मतलब साफ है: चीन को भारत चीन विवाद से मिला कुछ नहीं, और उसने खो बहुत कुछ दिया। भारत के खिलाफ विवाद भड़काने को चीन के इतिहास की सबसे बड़ी गलती कहना किसी भी दृष्टिकोण से गलत नहीं होगा।

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