भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच व्यापार समझौते को 27 जनवरी 2026 को अंतिम रूप दिया गया था। यह तीनों समझौतों में सबसे बड़ा माना जा रहा है। इसके तहत भारत को यूरोपीय संघ में करीब 97 प्रतिशत टैरिफ श्रेणियों में विशेष व्यापारिक सुविधा मिलने का प्रावधान है। इससे भारत के कुल निर्यात मूल्य के लगभग 99.5 प्रतिशत हिस्से को लाभ मिल सकता है।
हालांकि, इस समझौते को लागू करने से पहले जरूरी मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए यूरोपीय संसद और यूरोपीय संघ की परिषद की स्वीकृति आवश्यक है।
इस समझौते से भारतीय कपड़ा, परिधान और चमड़ा उद्योग को यूरोपीय बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलेगा। अभी जिन देशों को यूरोप में विशेष व्यापारिक सुविधाएं मिलती हैं, भारतीय कंपनियां भी उनके मुकाबले अधिक मजबूत स्थिति में आ सकती हैं।
इसके अलावा, यूरोप में कारोबार करने वाली कंपनियों को भारत से सामान खरीदने और यहां निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे भारत की विनिर्माण क्षमता और वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी भूमिका मजबूत होने की उम्मीद है।
कनाडा के साथ व्यापार समझौते पर तेजी से काम
भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर बातचीत भी आगे बढ़ रही है। इसके लिए पांचवें दौर की वार्ता 5 से 9 अक्टूबर 2026 तक ओटावा में हुई।
दोनों देश 2026 के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अगले 90 दिनों को दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर के आसपास कनाडा जाने की भी उम्मीद जताई गई है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और कनाडा के बीच वस्तुओं का व्यापार 8.66 अरब डॉलर था। इसमें भारत का निर्यात 4.22 अरब डॉलर रहा। दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
भारत के आईटी और सेवा क्षेत्र को इस साझेदारी से विशेष फायदा मिल सकता है। कनाडा में भारतीय आईटी कंपनियों की पहले से मौजूद भागीदारी दोनों देशों के बीच सेवाओं के व्यापार को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।
इसके अलावा, कनाडा ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों का एक अहम संभावित साझेदार है। इन क्षेत्रों में सहयोग से भारत को स्वच्छ ऊर्जा, बैटरी निर्माण और अन्य औद्योगिक जरूरतों के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिल सकती है। कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो कारोबार, शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में भी योगदान देते हैं।
तीनों समझौते भारत के लिए क्यों अहम हैं?
ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और कनाडा के साथ व्यापारिक साझेदारी भारत को दुनिया के बड़े उपभोक्ता बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर देती है। इससे निर्यात बढ़ाने, रोजगार पैदा करने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खोलने में मदद मिल सकती है।
इन समझौतों से भारत को अलग-अलग देशों के साथ व्यापार बढ़ाने का भी अवसर मिलेगा। इससे किसी एक बाजार पर निर्भरता कम करने और वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
ब्रिटेन के साथ समझौता लागू हो चुका है, यूरोपीय संघ के साथ समझौते को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़नी है और कनाडा के साथ बातचीत जारी है। ऐसे में अनीता आनंद का भारत दौरा दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
































