पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा से पहले बिरयानी को लेकर दो अलग-अलग विवाद सामने आए हैं। एक तरफ कोलकाता के आसपास बिरयानी के विज्ञापनों में देवी दुर्गा की तस्वीर के साथ चिकन, अंडे और मछली जैसे खाद्य पदार्थ दिखाए जाने पर आपत्ति जताई गई। दूसरी तरफ उत्तरी बंगाल के सिलीगुड़ी में हिंदू जागरण मंच ने पोस्टर लगाकर लोगों से बिरयानी और पूजा सामग्री हिंदू व्यापारियों की दुकानों से खरीदने की अपील की।
आखिर विवाद शुरू कहां से हुआ?
कोलकाता के आसपास हुगली जिले के हिंदमोटर और उत्तर 24 परगना के दमदम इलाके में बिरयानी की दुकानों के विज्ञापनों को लेकर विरोध की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, हिंदमोटर में ‘रॉकस्टार’ नाम की बिरयानी दुकान के बैनर में देवी दुर्गा की तस्वीर के साथ चिकन, अंडे और मछली जैसे खाद्य पदार्थ दिखाए गए थे।
स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया। उत्तरपाड़ा के भाजपा विधायक दिपांजन चक्रवर्ती के हस्तक्षेप के बाद दुकानदार ने बैनर हटाए और पुलिस के सामने लिखित माफी भी दी। दमदम इलाके में भी देवी दुर्गा की तस्वीरों का बिरयानी के विज्ञापन में इस्तेमाल करने पर विरोध हुआ। हिंदु जनता का तर्क ये भी था कि धार्मिक प्रतीक का इस्तेमाल मांसाहारी भोजन बेचने के प्रचार के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भाजपा नेता राकेश सिंह ने भी धार्मिक भावनाओं और नवरात्र के दौरान खानपान की परंपराओं का हवाला देकर आपत्ति जताई।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन करना कई समुदायों और परिवारों की प्रचलित परंपरा है। इसलिए यहां विवाद सिर्फ मांसाहार का नहीं, बल्कि देवी की तस्वीर को व्यावसायिक विज्ञापन में किस तरह इस्तेमाल किया जाए, इस सवाल का भी है। अप्रैल 2026 में ‘विशु’ (Vishu) के त्योहार के अवसर पर एक रेस्टोरेंट (‘मेहर मंडी एंड ग्रिल्स’) द्वारा सोशल मीडिया पर एक ग्रीटिंग कार्ड जारी किया गया था
सिलीगुड़ी में हिंदू जागरण मंच ने क्या अपील की?
दूसरा विवाद सिलीगुड़ी में सामने आया, जहां हिंदू जागरण मंच (HJM) ने दुर्गा पूजा से पहले कई पोस्टर लगाए। इनमें संदेश दिया गया कि लोग बिरयानी हिंदू दुकानों से खरीदें और पूजा की सामग्री भी हिंदू व्यापारियों से ही लें।
पोस्टरों में इस तरह के संदेश थे कि बिरयानी खाने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन इसे हिंदू दुकान से खरीदें। कुछ पोस्टरों में मांस हिंदू दुकानों से खरीदने और QR कोड से भुगतान करने से पहले दुकानदार का नाम ध्यान से देखने की अपील भी की गई।
क्या हिंदू संगठन मुस्लिम दुकानदारों से बिरयानी ऑर्डर नहीं करने को कह रहे हैं?
सामने आए पोस्टरों का संदेश मुख्य रूप से हिंदू दुकानों से बिरयानी और पूजा सामग्री खरीदने की अपील है। इसे सीधे तौर पर मुस्लिमों से बिरयानी ऑर्डर न करने का आदेश कहना उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर पूरी तरह सटीक नहीं होगा।
हालांकि, इस अपील का व्यावहारिक असर मुस्लिम दुकानदारों से खरीदारी कम करने के रूप में हो सकता है। इसी वजह से विपक्षी दलों और कुछ स्थानीय लोगों ने इसे धार्मिक आधार पर आर्थिक विभाजन बढ़ाने वाला अभियान बताया है। सीपीएम नेता अशोक भट्टाचार्य ने पोस्टरों को धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। सीपीएम के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने भी इसे समुदायों को अलग-थलग करने और आर्थिक बहिष्कार को बढ़ावा देने वाला कदम बताया।
दूसरी ओर, भाजपा के एक स्थानीय नेता ने कहा कि हिंदू जागरण मंच एक स्वतंत्र संगठन है और इस अभियान में पार्टी की भूमिका नहीं है। इस तरह मामले में संगठन का अपना तर्क, विपक्ष की आपत्ति और भाजपा की स्थानीय प्रतिक्रिया अलग-अलग हैं।
बंगाल में बिरयानी और दुर्गा पूजा का विवाद इतना संवेदनशील क्यों है?
बंगाल में दुर्गा पूजा सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक जीवन का भी बड़ा हिस्सा है। पूजा के दौरान खानपान, बाजार, पंडाल, कपड़े और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां बढ़ती हैं। बिरयानी भी राज्य के लोकप्रिय व्यंजनों में शामिल है।
पहला, क्या देवी-देवताओं की तस्वीरों का इस्तेमाल किसी व्यावसायिक खाद्य विज्ञापन में करते समय धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए? दूसरा, क्या किसी ग्राहक को दुकानदार की धार्मिक पहचान के आधार पर खरीदारी करने की अपील करना उचित है? पहले सवाल पर बहस धार्मिक प्रतीकों के सम्मान और विज्ञापन की सीमाओं से जुड़ी है। दूसरे सवाल में धार्मिक स्वतंत्रता के साथ व्यापार करने और खरीदारी चुनने की आजादी भी शामिल है।
































