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‘हम पीछे हटने को तैयार हैं’, लद्दाख की ठंड बर्दाश्त नहीं कर पाएं चीनी सैनिक,सैनिकों की संख्या कम करने के लिए भारत से किया वादा

बातों के शेर ,आखिर मिट्टी में हो ही गए ढेर

Krishna Bajpai द्वारा Krishna Bajpai
23 September 2020
in रणनीति
चीनी
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लद्दाख में इंडो-तिब्बत सीमा पर भारत-चीन विवाद के बीच अब भारतीय सेना की शक्ति को देखकर चीनी पीएलए और सरकार के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। पीएलए के सैनिक लद्दाख की ठंड में अस्पताल भाग रहे हैं तो भारतीय सेना लगातार बर्फ जमीं चोटियों पर तिरंगा लहरा रही है। भारतीय सेना के इस शौर्य से डरकर अब चीनी सरकार सरेंडर करते हुए भारत के सामने कहने लगी है कि हम अब सीमा पर सैनिक नहीं भेजेंगे आप भी मत भेजिए।

दरअसल, कमांडर लेवल की बैठक के बाद भारत-चीन के अपने सुंयक्त बयान में कहा है कि “गलतफहमी से बचने, सीमा पर ज्यादा जवान नहीं भेजने, एकतरफा जमीनी कार्रवाई से हालात बदलने की कोशिश से बचने की बात के पालन पर सहमति बनी है. जल्द से जल्द कमांडर लेवल की बैठक के 7वें राउंड के आयोजन पर भी सहमति बनी.” बयान में आगे कहा गया कि, “दोनों पक्ष भारत और चीन के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति के ईमानदारी से क्रियान्वयन पर सहमत हुए. भारत और चीन की सेनाएं आपस में संपर्क मजबूत करने और गलतफहमी तथा गलत निर्णय से बचने पर सहमत हुईं.”

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कई स्तर की बैठकों के बाद इस बयान से अगर किसी की हार दिखाई देती है तो वो चीन ही है. भारत ने तो पहले ही लद्दाख में बढ़त हासिल की हुई है और चीन के हर नापाक मंसूबों पर पानी फेर रहा है. पिछले एक महीने के अंदर जिस तरह से भारतीय सैनिकों ने चीन द्वारा हड़पी गयी चोटियों को अपने कब्जे में किया है और लगातार बढ़त बनाये हुए है उससे चीन अब इस तनाव पर विराम लगाने की बात कर रहा है.

हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई थी कि भारतीय सेना ने लद्दाख की 6 चोटियों अपना कब्जा जमाया था। यही नहीं, 29-30 अगस्त के बीच चीनी सैनिकों की घुसपैठ की कोशिशों पर भारतीय सेना ने जिस तरह से अपनी बचाव की रणनीति को हमलावर कर दिया है उससे चीनी पीएलए के होश फाख्ता हो गए हैं। चीनी सेना जिन जगहों से भारत के खिलाफ भारी पड़ सकती थी उन सभी जगहों पर चीनी सैनिकों से पहले चुस्ती दिखाते हुए भारतीय जवानों ने न केवल कैंप लगा लिए हैं बल्कि लंबे वक्त के लिए ठहरने के इंतजाम भी कर लिया है।

ठंड को लेकर रक्षा विशेषज्ञों को चिंता थी कि भारतीय सेना को इसके कारण दिक्कतें होंगी और सेना को लॉजिस्टिक्स पहुंचाने में समस्याएं आएंगी। लेकिन सेना ने अगले 7-8 महीनों के लिए पहले से ही हथियार, टैंक्स, कपड़े, ईंधन समेत भोजन का बेहतरीन इंतजाम कर लिया है जिससे भारतीय जवान किसी भी विषम परिस्थिति में चीनी सैनिकों को उनकी औकात दिखा सकें।

यही नहीं, भारत ने लद्दाख सीमा पर क़रीब 30 से 35 हजार जवानों की तैनाती कर दी है जिसमें स्पेशल फोर्सेज के प्रशिक्षित जवान और कमांडो भी शामिल हैं। इसके अलावा वायुसेना के महत्वपूर्ण लड़ाकू विमानों को हाईअलर्ट पर रखने के साथ ही भारतीय सरकार ने चीन से जुड़ीं सभी सीमाओं पर अपनी चौकसी पहले से ज्यादा सख्त करते हुए भारी संख्या में सैन्य तैनाती कर दी है। भारत के इसी रवैए के चलते उसका पलड़ा पूरे क्षेत्र में भारी हो गया है जो कि चीन के लिए परेशानी का सबब है।

बता दें कि सर्दी के मौसम में दोनों देशों की सेनाएं लंबे वक्त तक बाहरी दुनिया से कट जाती हैं। ऐसे में वहां भारतीय सेना पहले ही अपनी जबरदस्त तैयारी कर चुकी है जबकि चीनी सैनिकों की हालत बेहद पतली हो गई है। वो लद्दाख की ठंड नहीं झेल पा रहे हैं और उन्हें आए दिन अस्पताल जाना पड़ रहा है. हमने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि भारतीय सैनिकों ने एलएसी के उस पार पीएलए के सैनिकों को पैंगोंग त्सो के उत्तरी छोर पर स्थित फिंगर 4 क्षेत्र से स्ट्रेचर पर नीचे जाते देखा है। उन्हें फिंगर छह से आगे स्थित चीनी मेडिकल फैसिलिटी पर भेजा गया, क्योंकि पीएलए के सैनिकों को ऊंचे इलाकों में काम करने के कारण तकलीफ़ें महसूस हो रही हैं। ये प्रकरण पिछले कई दिनों से जारी है।

बता दें कि सर्दियों की शुरुआत को ध्यान में रखते हुए पहले ही भारतीय सैनिकों ने अपनी तैयारी कर ली थी। इसके साथ ही ऊंचाई वाले स्थानों पर काम आने वाले उपकरणों और अन्य सामग्री की पर्याप्त आपूर्ति का प्रबंध किया गया है। इसके अलावा लद्दाख में स्थानीय निवासी भी भारतीय सेना की मदद करने के लिए स्वेच्छा से आगे हैं और जब भी किसी चीज की जरूरत होगी, तब वह भारतीय जवानों की सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर हैं।

ऐसे में संभावनाएं ये भी हो सकती है कि भारत चीन की विस्तारवादी नीति पर ब्रेक लगाते हुए चीन द्वारा हड़पे गए भारतीय गोस्थान क्षेत्र यानी अक्साई चिन को वापस अपने कब्जे में ले ले. भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में संसद के अपने संबोधन में कहा था, “चीन ने आज भी लद्दाख के 38000 स्क्वेयर किलोमीटर वर्ग क्षेत्र की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा जमाया हुआ है। इसके अलावा 1963 के सिनो-पाकिस्तान बाउंडरी एग्रीमेंट के अंतर्गत पाकिस्तान ने अपने कब्ज़े में स्थित कश्मीर का 5180 स्क्वेयर किलोमीटर हिस्सा चीन को सौंप दिया। चीन अरुणाचल प्रदेश के लगभग 90,000 स्क्वेयर किलोमीटर के भूमि क्षेत्र पर भी दावा करता है। जो कि भारत का ही है।” गौरतलब है कि गृहमंत्री अमित शाह अक्साई चिन को लेकर भारत की प्रतिबद्धता ज़ाहिर कर चुके हैं। शायद यही कारण है कि चीन अब इस तनाव को कम करने पर जोर दे रहा है जो चीन की भारतीय सैनिकों के समक्ष उसकी निराशा को दर्शाता है।

जहाँ एक तरफ भारतीय सैनिक सीमा पर डटे हुए हैं तो वहीं चीनी सैनिक अस्पताल के चक्कर काट रहे.
भारत अब सीमा पर और जवान नहीं भेज रहा क्योंकि पहले ही भारत ने आवश्यक सैनिकों की तैनाती कर दी है खासकर पूर्वी लद्दाख में. जबकि चीन को अपने सैनिकों को सीमा पर लगातार भेज रहा और ये उसकी जरूरत भी थी परन्तु अब चीन ने ऐसा न करने की बात कही है.

हर बार चीन को भारत के सामने झुकना ही पड़ता और इस बार भी ऐसा ही होता दिखाई दे रहा है. डोकलाम विवाद के बाद एक बार फिर चीनी पीएलए को भारत के सामने मुंह की खानी पड़ी है और बातचीत के टेबल पर आना पड़ा।

चीन भले ही अपने इस कदम को दोनों देशों की साझा नीति बताकर पेश कर रहा हो लेकिन असल में चीन भारत की युद्धक तैयारियों, कठोर रुख और भारतीय सेना के आक्रामक रवैए से डर गया है जिस कारण उसने सेना के पीछे हटाने की भारतीय कूटनीतिज्ञों की बात को स्वीकार किया है।

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