गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक बहुत ही खास और लोकप्रिय त्योहार है। यह भगवान गणेश के जन्म का पर्व है। भगवान गणेश को “विघ्नहर्ता” कहा जाता है, यानी वे सभी परेशानियाँ और बाधाएँ दूर करते हैं। साथ ही उन्हें सौभाग्य, समृद्धि और ज्ञान का देवता भी माना जाता है। इसलिए किसी भी नए काम या शुभ कार्य की शुरुआत से पहले उनकी पूजा करना जरूरी माना जाता है।भारत में यह त्योहार हर जगह मनाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र, गोवा और तेलंगाना में इसे खास धूमधाम से मनाया जाता है। यहां बड़े-बड़े पंडाल सजाए जाते हैं, अलग-अलग तरह की गणेश प्रतिमाएँ बनाई जाती हैं और लोग दूर-दूर से बप्पा के दर्शन करने आते हैं। यह पर्व 10 दिन तक चलता है।इसकी शुरुआत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से होती है और अंत अनंत चतुर्दशी को प्रतिमा विसर्जन के साथ होता है। माना जाता है कि इन 10 दिनों तक भगवान गणेश पृथ्वी पर रहते हैं और अपने भक्तों की परेशानियाँ दूर करते हैं। इसी वजह से भक्तगण उन्हें खुश करने के लिए पूरे मन और श्रद्धा से पूजा करते हैं। कई एैसे देश है जहां गणेश चतुर्थी तो नही मनाई जाती लेकिन गणेश जी की पूजा की जाती है।
किन-किन देशों में होती है गणेश जी की पूजा और कैसे?
“गणेश चतुर्थी भारत में मनाई जाती है लेकिन एैसे कई देश है जहां गणेश जी को माना जाता है, उन्हें अलग- अलग नामों से जाना जाता है। इन देशों में नेपाल, श्रीलंका, चीन, थाईलैंड, इंडोनेशिया, कंबोडिया और मलेशिया जैसे कई देश शामिल है। हर जगह की मान्यताए और परंपराए अलग है लेकिन श्रद्धा और भक्ति एक जैसी है।”
नेपाल
नेपाल में हिंदू धर्म सबसे बड़ा धर्म है और यहाँ लगभग 81% लोग हिंदू हैं। नेपाल में भगवान गणेश को “विनायक” कहा जाता है। यहां लोग मारू गणेश और सूर्य विनायक जैसे बड़े मंदिरों में जाकर गणेश जी की पूजा करते हैं, और उनके लिए लड्डू और मोदक का भोग बनाते है।
श्रीलंका
श्रीलंका में भी गणेश जी की पूजा का खास महत्व है। यहाँ हिंदू धर्म सबसे पुराना धर्म है और लगभग 12.6% लोग हिंदू हैं, जिनमें ज्यादातर तमिल समुदाय के लोग हैं। श्रीलंका में भगवान गणेश को “पिल्लयार” कहा जाता है। कोलंबो के आसपास के बौद्ध मंदिरों में भी गणेश जी की मूर्तियाँ हैं, जो उनकी पूजा की गहरी श्रद्धा दिखाती हैं। यहाँ 14 प्राचीन गणेश मंदिर हैं, जहाँ आज भी लोग जाकर पूजा करते हैं।
चीन
इतिहास में चीन और गणेश जी का खास संबंध रहा है। उत्तरी चीन में उन्हें “कांगितेन” या “कांजितेन” कहा जाता है। पाँचवीं और छठी सदी में दुनहुआंग (Mogao Caves) और शांक्सी प्रांत के हेंग पर्वत (Hanging Temple) में गणेश की मूर्तियाँ और चित्र बनाए गए थे। यह दिखाता है कि पुराने समय में वहां गणेश जी की पूजा होता थी। आजकल चीन में गणेश चतुर्थी सिर्फ भारतीय परिवारों और दूतावास में ही मनाई जाती है। यहाँ बड़े जुलूस, मूर्ति स्थापना या विसर्जन जैसी रस्में नहीं होती। कुछ पुराने चीनी ग्रंथों में गणेश को परेशानी देने वाला देवता बताया गया है, जबकि हिंदू मान्यता में उन्हें सभी समस्याएँ दूर करने वाला “विघ्नहर्ता” माना जाता है।
थाईलैंड
थाईलैंड में भगवान गणेश को “फ्रा फिकानेट” या “फ्रा फिकानेसुआन” कहा जाता है और उन्हें सफलता और सौभाग्य का देवता माना जाता है। यहाँ गणेश जी की पूजा का इतिहास कम से कम 1000 साल पुराना है। कई पुराने मंदिरों में उनकी प्रतिमाएँ देखी जा सकती हैं। चाचोएंगसाओ में दुनिया की सबसे ऊँची गणेश प्रतिमा (39 मीटर) स्थित है। थाई लोग नए काम, शादी या किसी शुभ काम से पहले हमेशा गणेश जी की पूजा करते हैं। यहाँ गणेश चतुर्थी भी बहुत उत्साह और धूमधाम से मनाई जाती है।
इंडोनेशिया
इंडोनेशिया में गणेश जी की पूजा बहुत खास है। खासकर बाली में उन्हें ज्ञान और सुरक्षा का देवता माना जाता है। माउंट ब्रोमो ज्वालामुखी के पास 700 साल पुरानी गणेश प्रतिमा है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह प्रतिमा उन्हें प्राकृतिक आपदाओं से बचाती है और गाँव की सुरक्षा करती है। यहाँ हर दिन फूल, फल और धूप अर्पित करके उनकी पूजा की जाती है ताकि ज्वालामुखी शांत रहे। यह परंपरा आज भी चल रही है और गणेश जी यहाँ सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन का भी अहम हिस्सा हैं।
मलेशिया
मलेशिया में श्री सिथि विनयगर मंदिर (कुआलालंपुर) जैसे बड़े मंदिरों में कई दिन तक पूजा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक भोज आयोजित किया जाता है। मलेशिया के हिंदू लोग गणेश जी को नए काम की शुरुआत का देवता मानते हैं और श्रद्धा के साथ उनकी पूजा करते हैं।
इस तरह देखा जाए तो गणेश जी की पूजा सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि नेपाल, श्रीलंका, चीन, थाईलैंड, इंडोनेशिया, कंबोडिया और मलेशिया जैसे कई देशों में भी की जाती है। हर जगह इनकी पूजा का तरीका अलग है, लेकिन भक्ति और श्रद्धा सब जगह एक जैसी है।