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चार बार राष्ट्रपति चुनाव हारे, फिर भी ईरान की कूटनीति के ‘कप्तान’: कौन हैं मोहम्मद बाघेर कालिबाफ?

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली अहम वार्ता ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है

Ayush Aman Rai द्वारा Ayush Aman Rai
11 April 2026
in भू-राजनीति
चार बार राष्ट्रपति चुनाव हारे, फिर भी ईरान की कूटनीति के ‘कप्तान’: कौन हैं मोहम्मद बाघेर कालिबाफ?

मोहम्मद बाघेर कालिबाफ

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ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली अहम वार्ता ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस वार्ता में ईरान की ओर से जिस नेता ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं, वह हैं मोहम्मद बाघेर कालिबाफ। चार बार राष्ट्रपति चुनाव हारने के बावजूद कालिबाफ आज ईरान की सत्ता संरचना के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उनकी मौजूदगी इस वार्ता को केवल एक कूटनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शक्ति संतुलन और रणनीतिक संदेश का हिस्सा बना देती है।

सैन्य पृष्ठभूमि से राजनीति तक का सफर

मोहम्मद बाघेर कालिबाफ का करियर ईरान की राजनीति में किसी साधारण नेता की तरह नहीं रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से की, जो ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य संस्थाओं में से एक है। यहां उन्होंने एयर फोर्स कमांडर के रूप में अपनी पहचान बनाई। सैन्य रणनीति और सुरक्षा मामलों में उनकी गहरी समझ ने उन्हें शुरुआती दौर में ही अलग पहचान दिला दी।

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इसके बाद कालिबाफ को ईरान की पुलिस फोर्स का प्रमुख बनाया गया, जहां उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर कई सख्त फैसले लिए। उनकी प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें तेहरान का मेयर नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने 2005 से 2017 तक लंबा कार्यकाल पूरा किया। इस दौरान उन्होंने शहरी विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शहर की पहचान मजबूत करने के लिए कई पहल कीं।

चार बार राष्ट्रपति चुनाव, लेकिन सफलता नहीं

कालिबाफ का राजनीतिक करियर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने 2005, 2013, 2017 और 2024 में ईरान के राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन हर बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। खास बात यह है कि 2017 के चुनाव में उन्होंने बीच में ही अपना नाम वापस ले लिया था, ताकि रूढ़िवादी धड़े को एकजुट किया जा सके।

लगातार चुनाव हारने के बावजूद उनकी राजनीतिक पकड़ कमजोर नहीं हुई, बल्कि समय के साथ और मजबूत होती गई। इसका कारण है उनकी रणनीतिक सोच, संगठनात्मक क्षमता और सत्ता के प्रमुख केंद्रों से करीबी संबंध।

ईरान की संसद के स्पीकर और प्रभावशाली नेता

वर्तमान में मोहम्मद बाघेर कालिबाफ ईरान की संसद (मजलिस) के स्पीकर हैं। इस पद पर रहते हुए उन्होंने देश की नीतियों और विधायी प्रक्रियाओं पर गहरा प्रभाव डाला है। उन्हें ईरान के ‘प्रिंसिपलिस्ट’ धड़े का प्रमुख चेहरा माना जाता है, जो 1979 की इस्लामी क्रांति के मूल सिद्धांतों को बनाए रखने की वकालत करता है।

उनकी छवि एक सख्त, अनुशासित और रणनीतिक नेता की रही है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के मुद्दों पर स्पष्ट और मजबूत रुख रखते हैं। यही कारण है कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी गंभीरता से लिया जाता है।

खामेनई परिवार से नजदीकी

कालिबाफ की सबसे बड़ी ताकत उनकी ईरान के सुप्रीम लीडर के परिवार से नजदीकी मानी जाती है। उन्हें खामेनई परिवार का भरोसेमंद नेता माना जाता है, जो उनकी राजनीतिक ताकत को और बढ़ाता है। इस नजदीकी का असर उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों में साफ नजर आता है।

हालिया ईरान युद्ध के बाद जब देश की सत्ता संरचना में बदलाव आया, तब कालिबाफ एक मजबूत नेता के रूप में उभरे। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख अली लारीजानी की मौत के बाद उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई।

ईरान-अमेरिका वार्ता में क्यों अहम हैं कालिबाफ?

इस्लामाबाद में हो रही ईरान-अमेरिका वार्ता में कालिबाफ की मौजूदगी कई मायनों में महत्वपूर्ण है। वे न केवल एक राजनीतिक नेता हैं, बल्कि सैन्य और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ भी हैं। ऐसे में उनकी भागीदारी यह संकेत देती है कि ईरान इस वार्ता को बेहद गंभीरता से ले रहा है।

कालिबाफ ने पूरे ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान लगातार सक्रिय भूमिका निभाई है। उनके बयान और कूटनीतिक गतिविधियां यह दर्शाती हैं कि वे केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

रणनीतिक सोच और वैश्विक दृष्टिकोण

कालिबाफ उन नेताओं में से हैं जो केवल पारंपरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहते। उन्होंने विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भाग लिया है और पश्चिमी देशों के साथ संवाद की वकालत की है। यह उन्हें अन्य रूढ़िवादी नेताओं से अलग बनाता है।

उनकी रणनीतिक सोच में संतुलन देखने को मिलता है—एक ओर वे ईरान की पारंपरिक नीतियों के समर्थक हैं, वहीं दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर संवाद और कूटनीति के महत्व को भी समझते हैं।

ईरान की राजनीति में ‘पावर सेंटर’

आज के समय में मोहम्मद बाघेर कालिबाफ ईरान की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं। उनकी भूमिका केवल संसद तक सीमित नहीं है, बल्कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और रणनीतिक फैसलों में भी सक्रिय रूप से शामिल रहते हैं।

उनकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चार बार राष्ट्रपति चुनाव हारने के बावजूद वे सत्ता के केंद्र में बने हुए हैं। यह उनकी राजनीतिक क्षमता, नेटवर्क और प्रभाव का प्रमाण है।

मोहम्मद बाघेर कालिबाफ का राजनीतिक सफर यह दिखाता है कि केवल चुनाव जीतना ही किसी नेता की ताकत का पैमाना नहीं होता। उनकी सैन्य पृष्ठभूमि, प्रशासनिक अनुभव, रणनीतिक सोच और सत्ता के केंद्रों से करीबी संबंध उन्हें ईरान की राजनीति में एक अलग पहचान देते हैं।

इस्लामाबाद में हो रही ईरान-अमेरिका वार्ता में उनकी भूमिका आने वाले समय में बेहद निर्णायक साबित हो सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कालिबाफ अपनी कूटनीतिक क्षमता से इस तनाव को कम करने में सफल हो पाते हैं या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि ईरान की रणनीतिक सोच के प्रमुख स्तंभ बन चुके हैं।

Tags: Iran diplomacy newsIran politics newsIran speaker parliamentIran US talks PakistanIRGC commander IranMiddle East tensionQalibaf biographyTehran mayor Qalibaf
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