नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। कई पुल, सड़कें, घर और दूसरी बुनियादी सुविधाएं भी बाढ़ की चपेट में आई हैं। नेपाल सरकार ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।
अब तक 165 शव बरामद
नेपाल सरकार के अनुसार, अब तक 165 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें धाडिंग से 27, नुवाकोट से 12, रसुवा से 2, गोरखा से 20, नवलपरासी पूर्व से 26, तनाहुन से 9, चितवन से 64 और नवलपरासी पश्चिम से 5 शव मिले हैं।
बाढ़ में 63 लोग घायल भी हुए हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लगातार राहत और बचाव का काम कर रही हैं।
826 लोग अभी भी लापता
बाढ़ के बाद 826 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें नेपाली सेना के 44 जवान, नेपाल पुलिस के 28 जवान और नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के 12 जवान शामिल हैं।
नेपाल के पर्यटन विभाग के अनुसार, 579 पर्यटक भी लापता हैं। इनमें 466 विदेशी और 113 नेपाली पर्यटक बताए गए हैं।
वहीं, राहत और बचाव टीमों ने अब तक 132 लोगों को सुरक्षित बचाया है। इनमें 111 नेपाली और 21 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
पुल और सड़कें भी बर्बाद
भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ से बुनियादी ढांचे को भी काफी नुकसान हुआ है। बाढ़ में 14 सस्पेंशन पुल, 25 परिवहन पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़क तबाह हो गई है। कई जगहों पर रास्ते बंद होने से प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
रसुवा जिले का तिमुरे और स्याफ्रुबेसी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित बताया जा रहा है। यहां कई बस्तियां बाढ़ की चपेट में आई हैं और बड़ी संख्या में वाहन व सामान बह गए हैं।
ईशा फाउंडेशन के तीर्थयात्री भी फंसे
बाढ़ के बीच ईशा फाउंडेशन के कई तीर्थयात्रियों के फंसे होने की जानकारी भी सामने आई है। फाउंडेशन की समन्वयक मां गंभीरी ने बताया कि अभी तक कई तीर्थयात्रियों से संपर्क नहीं हो पाया है।
उन्होंने बताया कि इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए फाउंडेशन के 21 समूह हैं। कुछ समूह अपनी यात्रा पूरी कर चुके हैं, जबकि कुछ अभी रास्ते में हैं और कुछ यात्रा शुरू करने वाले हैं। फाउंडेशन अधिकारियों से जानकारी मिलने का इंतजार कर रहा है।
सेना और पुलिस ने संभाला मोर्चा
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, बाढ़ के तुरंत बाद नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें राहत और बचाव अभियान में जुट गई थीं। सेना ने बुधवार रात से ही प्रभावित लोगों तक खाना, पानी, टेंट और दवाइयां पहुंचानी शुरू कर दी थीं।
बचाव अभियान में सेना और निजी क्षेत्र के हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली जा रही है। सेना की टीमें पूरी रात अभियान में लगी रहीं। गुरुवार सुबह से तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और नदी किनारे के इलाकों में हेलीकॉप्टरों के साथ पैदल बचाव दल भी लगाए गए हैं।
सरकार ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और खतरा बढ़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
बिहार तक पहुंचा बाढ़ का पानी
नेपाल में आई बाढ़ का असर बिहार में भी देखने को मिला है। नेपाल से आया पानी गंडक बैराज, वाल्मीकिनगर तक पहुंच गया। जल संसाधन विभाग के अनुसार, बुधवार रात करीब 8:30 बजे तक बैराज में पानी के बहाव में लगभग 20 हजार क्यूसेक की बढ़ोतरी हुई।
विभाग का अनुमान है कि रात करीब 11 बजे पानी का बहाव अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकता है। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने इसे फिलहाल सामान्य स्तर पर रहने की संभावना जताई है।
इसके बावजूद गंडक बैराज, तटबंधों और नियंत्रण कक्षों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
जल संसाधन विभाग के मुताबिक, इस साल 14 जुलाई को गंडक नदी में अधिकतम जलप्रवाह 2.24 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया था। वहीं, 28 सितंबर 2024 को यह आंकड़ा 5.62 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया था। इस तुलना में इस बार संभावित जलप्रवाह कम रहने का अनुमान है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार ने भी संबंधित जिलों में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नदी के जलस्तर में बदलाव को देखते हुए सावधानी जरूरी है।
सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि नेपाल और बिहार दोनों जगह स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत और बचाव अभियान तेज किया जाएगा।
































